जयपुर। भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच वनडे मैच 21 फरवरी को जयपुर में होगा, लेकिन जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम के पैवेलियन में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं। राजस्थान सरकार ने राजस्थान क्रिकेट संघ को चेतावनी दी कि स्टेडियम का नॉर्थ पैवेलियन दर्शकों के लिए सुरक्षित नहीं है। आरसीए दर्शकों को बैठने की इजाजत न दे। लेकिन आरसीए अपनी जिद पर अड़ा है और ज्यादा से ज्यादा लोगों के बैठने की व्यवस्था करने में जुटा है।
नौ हजार की दर्शक क्षमता वाले नॉर्थ पैवेलियन के गेट नंबर 1 से अंदर घुसते ही पैवेलियन की दीवार में बडी़-बड़ी दरारें नजर आती हैं। ये चौड़ी दरारें दीवार से होकर पैवेलियन की कुर्सियों के बीच से होते हुए छठे नंबर के गेट तक जाती हैं। यहां ऐसी कई बड़ी दरारें हैं। राजस्थान सरकार के सार्वजनिक निर्माण विभाग ने राजस्थान क्रिकेट संघ को पत्र लिखकर चेताया भी था कि स्टेडियम का नॉर्थ पैवेलियन क्षतिग्रस्त है,यहां पर बैठने की किसी को अनुमति न दें। अब क्रिकेट प्रशंसक भी निराश हैं कि वे मैच देखना चाहते हैं, लेकिन इस पैवेलियन में बैठने का रिस्क नहीं ले सकते।
आरसीए ने नॉर्थ पैवेलियन में 2006 में नया निर्माण कराकर कुर्सियां लगाई थीं। लेकिन जल्दबाजी में किए काम में पुरानी जर्जर दीवारें वजन को सहन नहीं कर पाईं और दीवारें धंस गईं। पैवेलियन में तीन हजार लोगों की क्षमता वाला हिस्सा तो पूरी तरह क्षतिग्रस्त है। पैवेलियन में 600 की क्षमता वाला प्रेसिडेंट बॉक्स, मीडिया बॉक्स औऱ आरसीए गेस्ट का बॉक्स भी है। ये स्टेडियम राजस्थान सरकार ने एक एग्रीमेंट कर बीस साल की लीज पर राजस्थान क्रिकेट संघ को सौंपा था, लेकिन आरसीए ने दो साल से इसकी मरम्मत नहीं कराई। अब आरसीए ने एक इंफ्रास्ट्रक्चर कमेटी दरारों की जांच औऱ तकनीकी रिपोर्ट के लिए गठित की, लेकिन कमेटी को जांच से ज्यादा मैच के लिए पैवेलियन को किसी भी कीमत पर तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया।
राजस्थान क्रिकेट संघ के सचिव संजय दीक्षित ने कहा कि हमने कमेटी गठित कर दी है जो देखेगी कि क्या फाल्ट रहे और कैसे ठीक करेंगे, लेकिन हमारी अभी प्राथमिकता इस मैच की है, कि ये सेफ हो जाए, फिर आगे रिपोर्ट पर भी विचार करेंगे।
पिछले एक साल से आरसीए में चल रही कुर्सी की जंग की वजह से कोई बड़ा मैच नहीं हुआ। वैसे आरसीए ने अब तक इन दरारों की तो सुध नहीं ली, लेकिन दर्शक क्षमता बढ़ाने के लिए इसी पवेलियन की चौथी मंजिल पर निर्माण का काम शुरू कर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने कम वक्त में पवेलियन की दरारों को ठीक करने की कोशिश भी बड़े रिस्क को दावत दे सकती है।








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