नई दिल्ली। दिल्ली के करीब 1500 स्कूलों में डेढ़ लाख बच्चों को नर्सरी में एडमिशन मिलेगा या नहीं, इसका फैसला आज होगा। प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने वाले प्रताप और नीलम को बेसब्री से इंतजार है कि उनके बेटे हर्ष का नाम लिस्ट में निकल आए। हर्ष के माता-पिता ने एडमिशन के लिए अपने इलाके के सात स्कूलों में फॉर्म भरा था।
दरअसल दिल्ली सरकार ने नर्सरी स्कूल्स में एडमिशन के लिए प्वाइंट सिस्टम बनाया है जिसके मुताबिक किसी बच्चे का घर स्कूल के तीन किलोमीटर के दायरे में आता है तो उन बच्चों को प्वाइंट्स दिए जाएंगे। बच्चे का बड़ा भाई या बहन स्कूल में पहले से ही पढ़ रहा है तो उसे एडमिशन मिलने में कोई दिक्कत नहीं होगी।
अगर आपकी एक ही लड़की है तो उसे तत्काल एडमिशन मिल जाएगा। साथ ही अभिभावक जिस स्कूल में खुद पढ़े हैं और उसी स्कूल में अपने बच्चे का दाखिला करवाना चाहते हैं तो उनके बच्चे को तुरंत एडमिशन मिल जाएगा हालांकि सारे स्कूल इन नियमों को लागू नहीं करते हैं।
प्वाइंट्स के अलावा कई स्कूल बच्चों को उनके माता-पिता की एजुकेशन और उनके बिजनेस को देखकर भी एडमिशन देते हैं जिस पर दिल्ली सरकार ने रोक लगा दी है। अगर कोई स्कूल ऐसा करता पाया गया तो उनके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।
इसमें कोई शक नहीं कि प्वाइंट सिस्टम दाखिले की प्रक्रिया को निष्पक्ष बना देता है, लेकिन कई अनुचित प्वाइंट के चलते दाखिला ना मिलने पर अभिभावक इस सिस्टम पर ही सवाल खड़ा कर रहे हैं। क्या नर्सरी में एडमिशन के लिए ग्रेडिंग सिस्टम सही कदम है।?
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