भुवनेश्वर। कुछ लोगों पर पुत्ररत्न की चाह इस कदर हावी रहती है कि इसके लिए वे कुछ भी करने को आमादा होते हैं। उड़ीसा के केंद्रपाड़ा जिले में एक व्यक्ति ने अपने बेटे द्वारा खानदान को पुत्र रूपी चिराग देने से इनकार करने के बाद खुद शादी की और 62 वर्ष की उम्र में पिता बन गया।
जिले के बाराडांगा गांव के निवासी धनेश्वर पात्रा के घर सोमवार को पुत्ररत्न पैदा हुआ। इससे दो वर्ष पहले उनकी दूसरी पत्नी ने एक बेटी को जन्म दिया था। धनेश्वर ने 57 वर्ष की उम्र में दूसरी शादी रचाई थी। ऐसा उन्होंने इसलिए किया था क्योंकि उनके अपने पुत्र ने अपने पिता की इस इच्छा को पूरा करने से इनकार कर दिया था।
धनेश्वर ने कहा कि मैं बहुत खुश हूं। मैंने पुत्ररत्न के लिए कई वर्ष तक इंतजार किया। अब मेरी जिम्मेदारी पूरी हो गई है। मेरा बेटा अपनी पत्नी की बीमारी का बहाना बनाकर मेरी इच्छा को टालता रहा लेकिन मैं हार मानने वाला नहीं था। मैं इस बात को लेकर आश्वस्त हो गया हूं कि अब मेरे खानदान का चिराग जलता रहेगा।
धनेश्वर चार बेटियों और एक पुत्र के पिता हैं लेकिन उनके बेटे के बाद खानदान के चिराग को जलाने के लिए उनका कोई पौत्र नहीं था। उनके पुत्र की दो बेटियां हैं और वह इससे अधिक बच्चे नहीं चाहता था। धनेश्वर ने अपने पुत्र से कहा था कि वह एक पौत्र चाहते हैं, जो इस खानदार के चिराग को जलाए रखे लेकिन उनके पुत्र ने अपना परिवार और बढ़ाने से इनकार कर दिया था।
यह देखकर धनेश्वर ने गांव और परिवार के भारी विरोध के बाद दूसरी शादी करने का फैसला कर लिया। उनकी पत्नी तरला पात्रा की उम्र 40 वर्ष है। पहली बार तो तरला ने एक बेटी को जन्म दिया लेकिन शादी के पांच वर्ष बाद बीते सोमवार को उसने पुत्र को जन्म देकर धनेश्वर की मनोकामना पूरी कर दी।








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