नई दिल्ली। नेता वादाखिलाफी के लिए मशहूर होते हैं। वो नेता ही क्या जो अपना वादा पूरा कर दे। आईबीएन-7 भी कर रहा है खुलासा देश के साथ किए गए झूठे वायदों का। वो वायदे जो उन्होंने संसद में किए। सदन को गुमराह किया और देश को भी गुमराह किया। खुद कमेटी ऑन गवर्नमेंट एश्योरेंसेज ने खोली है ऐसे मंत्रियों की पोल और पुलिंदे में एक नहीं, दो नहीं बल्कि मंत्रियों के बोले गए 1600 झूठ।
दिल्ली के एम्स की तर्ज पर देश में 6 और एम्स खुलेंगे। पिछले 6 साल से अलग-अलग स्वास्थ्य मंत्री संसद में ये आश्वासन देते आ रहे हैं लेकिन सच ये है कि एक भी एम्स का काम अब तक शुरू नहीं हुआ है। सबसे पहले एनडीए सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहीं सुषमा स्वराज ने संसद के सामने 6 और एम्स बनाने की योजना रखी। 2 साल में ये काम पूरा होने का वादा किया गया लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उसके बाद 2004 में बनी यूपीए सरकार के स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणी रामदौस ने भी यही आश्वासन दिया।
पार्लियामेंट्री कमेटी ऑन गवर्नमेंट एश्योरेंसेज की मानें तो ये मंत्रियों के झूठ का महज एक उदाहरण है। इस कमेटी ने पिछले लगभग डेढ़ दशकों में सदन में मंत्रियों द्वारा किये ऐसे सैकड़ों झूठे वादे पकड़े।
5 साल पहले तत्कालीन पर्यावरण मंत्री ए राजा ने संसद में ये बयान दिया था कि चिड़ियाघरों की देखरेख के लिए वैज्ञानिकों की एक टीम बनाई जा रही है। टीम तो बनी नहीं, वैज्ञानिक देखरेख के अभाव में देशभर के चिड़ियाघरों में 25 हज़ार जानवर जरूर मर गए। कमेटी के मुताबिक तब से लेकर अब तक संसद में कम से कम तीन बार ये वादा दोहराया जा चुका है।
कमेटी के मुताबिक 1996 से लेकर अब तक मंत्रियों ने संसद में 1600 बार या तो साफ झूठ बोला है या फिर संसद से किए गए वादे को उन्होंने पूरा नहीं किया। झूठ की इस रेस में सभी मंत्रालय शामिल हैं लेकिन कमेटी के मुताबिक रेल और पर्यावरण मंत्रालय इस मामले में सबसे आगे हैं। कमेटी ने 1996 से लेकर 2008 तक के रिकॉर्ड खंगाले हैं। इस दौरान संसद में दिए गए सभी मंत्रियों के वादों को सच्चाई की कसौटी पर परखा गया और नतीजे हमारे सामने हैं।
कमेटी के मुताबिक पहली लिस्ट तो लोकसभा के स्पीकर को सौंप दी गई है। लेकिन झूठ की नई बन रही लिस्ट पहले से भी बड़ी हो सकती है। सबसे बड़ी मुश्किल ये है कि सरकारी वादों को लेकर बने तमाम नियम कायदों की भी धज्जियां उड़ाने से मंत्री नहीं चूकते।
जापानी इन्सेफलाइटिस से उत्तरी राज्यों में हर साल सैकड़ों लोग मारे जाते हैं। 1998 में संसद में ये सवाल किया गया कि देश में जापानी इन्सेफेलाइटिस की वजह से कितने लोगों की मौत हुई है। तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री ने तीन महीने के भीतर जवाब देने की बात कही लेकिन जवाब पूरे 10 साल बाद 2008 में आया।
नियम के मुताबिक संसद में किए गए वायदों पर अमल करने के लिए मंत्रालयों को हर महीने मीटिंग करनी होती है लेकिन रिकॉर्ड के मुताबिक किसी भी मंत्री ने ये मीटिंग नहीं की। कमेटी ऑन गवर्नमेंट एश्योरेंसेज ने अब सरकारी झूठों की लिस्ट बनाकर स्पीकर को सौंप दी है और सिफारिश की है कि सदन को गुमराह करने वाले मंत्रियों के खिलाफ विशेषाधिकार का मामला बनाया जाए।
दस साल पहले पंजाब में एक ट्रेन दुर्घटना हुई तो रेल मंत्री ने संसद में कहा कि कारणों की जांच के लिए कमेटी बना दी गई है जो तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंप देगी। सच ये है कि रिपोर्ट आज तक नहीं आई। कमेटी के मुताबिक रेल बजट में किए जाने वाले ज्यादातर वादों का पालन नहीं किया जाता। कमेटी का सुझाव है कि सदन में उठाये गये सवाल का जवाब तीन महीने के अंदर मिल जाए इसके लिये नियमों को सख्ती से लागू करना होगा।
झूठ का ये सिलसिला कैसे रुके? इसपर अपनी राय दें।
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