नई दिल्ली। केंद्र सरकार आने वाले बजट सत्र में एक ऐसे बिल को मंजूरी देने जा रही है जिसके बाद कोई भी हॉस्पिटल किसी भी इमरजेंसी केस को लेने से इनकार नहीं कर सकेगा।
इस बिल के तहत किसी भी हॉस्पिटल, मेडिकल कॉलेज या फिर सुपर स्पेशलिटी क्लीनिक्स के लिए इमरजेंसी के शिकार लोगों को इलाज देना कानूनन अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर उस हॉस्पिटल के खिलाफ पांच लाख रुपए तक का तगड़ा जुर्माना ठोंका जा सकेगा। साथ ही नीम हकीमों से छुटकारे के लिए भी इस बिल में कड़े प्रावधान किए गए हैं।
केंद्र सरकार आने वाले बजट सत्र में क्लीनिकल एस्टैबलिस्मेंट एक्ट 2010 बिल को मंजूरी देने जा रही है। इस एक्ट के तहत इमरजेंसी की हालत में अस्पतालों को हर हाल में इलाज करना ही पड़ेगा चाहे मरीज के पास पैसे हों या नहीं। अस्पताल को मरीज की हालत स्थिर होने तक इलाज करना पड़ेगा।
इस बिल के तहत एक रेग्युलेटरी अथॉरिटी का गठन किया जाएगा जो स्वास्थ्य सेवाओं के मद्देनजर जरूरी सुविधाओं और मानकों को अंतिम रूप देगी। बिल के मुताबिक सभी हॉस्पिटल्स, मेडिकल क्लीनिक्स का रजिस्ट्रेशन इस रेग्युलेटरी अथॉरिटी के साथ अनिवार्य हो जाएगा। इस मकसद के लिए दो साल के अंदर एक नेशनल रजिस्ट्री की स्थापना की जाएगी। किसी भी हॉस्पिटल या मेडिकल क्लीनिक के लिए रोगों के फैलाव को रोकने की खातिर जरूरी जानकारियां देना अनिवार्य होगा।
इसके तहत न सिर्फ एलौपैथी बल्कि आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक, यूनानी और यहां तक कि योगा से जुड़े सभी क्लीनिक्स पर भी नजर रखी जाएगी ताकि नीम हकीमों पर अंकुश लगाया जा सके। ये एक्ट अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मिजोरम, सिक्किम व सभी केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होगा और दूसरे राज्यों से उम्मीद की गई है कि वो इसे अपने यहां फॉलो करेंगे।
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