नई दिल्ली। सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी सत्यम कंप्यूटर के संस्थापक बी.रामालिंगा राजू के साथ मिलकर कंपनी के खातों में फर्जी तरीके से 7,136 करोड़ रुपये का लाभ दिखाने में कथित तौर पर शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार प्राइसवाटरहाउस के आडिटर तालुरी श्रीनिवास को सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को जमानत दे दी।
प्रधान न्यायाधीश के.जी.बालाकृष्णन, न्यायाधीश जे.एम.पांचाल और न्यायाधीश बी.एस.चौहान की खंडपीठ ने 20 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतने ही मूल्य की दो जमानतों पर तालुरी की जमानत मंजूर की।
जमानत मंजूर करने के साथ ही अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की स्थानीय शाखा की अनुमति के बगैर तालुरी को हैदराबाद न छोड़ने का आदेश दिया।
खंडपीठ ने तालुरी को देश से भागने से रोकने के लिए उसका पासपोर्ट सीबीआई के कब्जे में बने रहने की अनुमति दी।
तालुरी ने अपनी जमानत खारिज करने के हैदराबाद उच्च न्यायालय के फैसले को दिसम्बर के शुरू में सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
तालुरी को हैदराबाद पुलिस ने नौ जनवरी 2009 को गिरफ्तार किया और बाद में मामले की जांच करने वाली सीबीआई के सुपुर्द कर दिया।








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