नई दिल्ली। पुलिस का चेहरा नहीं बदल सकता है या यूं कहें कि कम से कम यूपी पुलिस का चेहरा तो कतई नहीं बदल सकता है। एक लड़की जिसका गैंगरेप हुआ लेकिन पुलिस मानने को तैयार नहीं हुई। फिर दबंगों की धमकियों से दहशतजदा लड़की ने आग लगाकर खुदकुशी कर ली। लेकिन यूपी पुलिस लगातार इस मामले पर पर्दा डालने की कोशिश करती रही।
जानकारी के मुताबिक 19 दिसंबर को कानपुर के कल्याणपुर इलाके से एक नाबालिग लड़की गायब हो जाती है। लड़की का बाप अपनी बेटी की तलाश में थाने के चक्कर काटता है। लेकिन पुलिस लड़की के गायब होने की बात पर यकीन नहीं करती। ठीक 30 घंटे बाद यानि 19 दिसंबर को लड़की बेहोशी की हालत में एक पार्क से बरामद होती है। होश में आने पर लड़की रोते-रोते अपने साथ हुए गैंगरेप की कहानी पुलिस को बताती है। पुलिस एक आरोपी को तो गिरफ्तार कर लेती है लेकिन गैंगरेप की बात से साफ इनकार करती है।
डीआईजी कानपुर, बीपी जोगदंड ने तब कहा था कि रामू को गिरफ्तार कर लिया गया है। पूछताछ में मारपीट या गैंगरेप की कोई बात नहीं सामने आई । सीओ नजीराबाद निहारिका वर्मा ने लड़की से भी अकेले में पूछताछ की लेकिन उसने भी बलात्कार का कोई मामला नहीं बताया।
इस पुरे मामले के बाद डीआईजी कानपुर बीपी जोगदंड कहते हैं कि लड़की घटना की वजह सेदहशत में थी। अपराधियों को जेल भेज दिया गया है। धमकी तो कोई नहीं आ रही थी लेकिन जांच चल रही है।
यानि यूपी पुलिस पहले तो गैंगरेप की बात से इंकार करती रही। फिर आनन-फानन रेप की धाराएं जुड़वा डालीं। और फिर लड़की के परिवार वालों को धमकी दिए जाने की बात से इनकार। अब सारा मामला सामने आने का बाद कांग्रेस राज्यपाल बीएल जोशी से मिलकर डीआईजी साहब के मैडेल वापस लेने और लड़की के परिवार को इंसाफ दिलाने की मांग कर रही है।
प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि पहले लड़की का गैंगरेप हुआ लेकिन पुलिस टालती रही। आरोपियों को थाने पर बैठाए ,नाश्ता तक कराया ।फिर लड़की मर गई और हमने तो राज्यपाल से मांग की है कि ऐसे अफसर के मैडेल छीने जाएं।
सबकी सुरक्षा की बात करने वाली यूपी पुलिस का ये भी एक चेहरा है। ये इंसाफ है यूपी पुलिस का जहां एक बेटी का पहले बलात्कार होता है। फिर मिलती हैं शहर छोड़कर भाग जाने की धमकियां और उसके बाद हिस्से में आती है एक दर्दनाक मौत।
क्या लापरवाह अफसरों के मेडल वापस ले लेने चाहिए ? इसपर अपनी राय दें।
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