नागपुर। पिछले 5 साल में टेस्ट क्रिकेट में भारत का मिडिल ऑर्डर इस कदर मजबूत रहा कि सिर्फ युवराज सिंह जैसी प्रतिभा को ही DEBUT करने का मौका मिला लेकिन, नागपुर टेस्ट में वक्त ऐसा आया है कि द्रविड़, लक्ष्मण टीम में नहीं हैं। नतीजा 13 साल के इतिहास में पहली बार भारत सबसे कमजोर मिडिल ऑर्डर के साथ उतरा है।
आपको पिछला कोई ऐसा टेस्ट मैच याद आता है जब बैटिंग लाइन अप में ना तो राहुल द्रविड़ हो, ना सौरव गांगुली हो और ना ही वीवीएस लक्ष्मण। नागपुर में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट मैच में टीम इंडिया के मिडिल ऑर्डर में तीनों ही नहीं हैं लेकिन कोशिश कर याद कीजिए कि इससे पहले ऐसा कब हुआ था।
13 साल पहले, जी हां 20 जून 1996 को जब लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर सौरव गांगुली और राहुल द्रविड़ ने अपना पहला टेस्ट खेला था, इसके बाद ऐसा कभी नहीं हुआ। इस मिडिल ऑर्डर की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि युवराज के बाद बद्रीनाथ ऐसे पहले बल्लेबाज हैं जिसे इस धाकड़ मिडिल ऑर्डर में पहला मैच खेलने का मौका मिला है। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि नागपुर में भारत अबतक के सबसे कमजोर मिडिल ऑर्डर के साथ उतरा है।
ये सच है कि सौरव रिटायर हो चुके हैं और इस बारे में कुछ नहीं किया जा सकता। ये भी सच है कि द्रविड़ चोटिल हैं और इस बारे में भी कुछ नहीं किया जा सकता, लेकिन सवाल ये है कि क्या वीवीएस लक्ष्मण की फिटनेस का अंदेशा सेलेक्टरों और टीम मैनेजमेंट को बिल्कुल नहीं था।
धोनी के कवर के तौर पर दूसरे विकेटकीपर रिद्धिमान शाह को चुन लिया गया, लेकिन क्या लक्ष्मण के कवर के तौर पर किसी को नहीं चुना जाना चाहिए था। अगर ऐसा किया गया होता तो टीम को अहम मैच में दो-दो विकेटकीपर के साथ नहीं उतरना पड़ता। आनन-फानन में रोहित शर्मा तो रोक लिए गए, लेकिन क्या विराट कोहली को मौका देना बेहतर नहीं होता जिन्होंने हाल में जबरदस्त खेल दिखाया है।








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