नई दिल्ली। क्या अच्छे दोस्त अच्छे जीवन साथी भी हो सकते हैं। टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा शायद ऐसा नहीं मानतीं क्योंकि उन्होंने अपने बचपन के साथी मोहम्मद सोहराब मिर्जा से अपनी सगाई तोड़ ली है। विचारों में असंगति के कारण उन्होंने यह सगाई तोड़ी है।
मैक्स हेल्थकेयर में सलाहकार मनोचिकित्सक समीर पारिख कहते हैं कि अच्छे दोस्त बहुत अच्छे जीवन साथी हो सकते हैं लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। उनका कहना है कि यह एक-दूसरे को समझने, एक-दूसरे को प्रोत्साहित करने और फिर रिश्ता बनाने का मामला है। कभी-कभी लोग बहुत जल्दी कुछ वादे कर लेते हैं जिनके चलते कुछ गलत उम्मीदें हो जाती हैं।
मनोचिकित्सक संजय चुग मानते हैं कि साथियों का भौतिक, भावनात्मक और मानसिक स्तर पर मिलना बेहद महत्वपूर्ण होता है।
वह कहते हैं कि दोनों साथियों के बीच एक स्वस्थ संबंध होना जरूरी है। इससे उनका रिश्ता मजबूत और संतुष्टिदायक बनता है। अगर दोनों साथी परस्पर विरोधी व्यक्तित्व के होंगे तो दोनों के बीच रिश्ते में कई निराशाजनक स्थितियां होंगी।
मेघा जैन (परिवर्तित नाम) ने दिसम्बर में अपने मित्र से विवाह किया था लेकिन अब उन्हें लगता है कि जिस व्यक्ति के साथ उन्होंने लंबा समय गुजारा उसके साथ विवाह का उनका निर्णय सही था या गलत।
जैन कहती हैं कि वह अब भी दुविधा की स्थिति में हैं। उन्हें लगता है कि क्या उनके साथी के बर्ताव में बदलाव आया है। वह नहीं समझ पा रही हैं कि उनके रिश्ते में आखिर किस जगह परेशानी है।
चुग कहते हैं कि अक्सर हम किसी भी रिश्ते के अच्छे पहलू को याद रखते हैं और उसके बुरे पहलू नजरअंदाज कर देते हैं। कुछ लोग विवाह के बाद ही यह हकीकत समझ पाते हैं।
प्रेम-विवाह और अभिभावकों की पसंद से किए गए विवाह के अपने-अपने फायदे और नुकसान हैं। हालांकि किसी अंजान व्यक्ति से विवाह की अपेक्षा जाने-पहचाने व्यक्ति से विवाह करने के अपने फायदे होते हैं।
पारिख मानते हैं कि अगर दोनों साथी एक-दूसरे को पहले से जानते हैं तो वे दोनों एक-दूसरे के प्रति सहज होते हैं।








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