नई दिल्ली। वरुण गांधी की जहरीली जुबान के सामने बीजेपी ने एक बार फिर अपनी बेबसी साबित कर दी है। शरद पवार को ‘रावण’ और मायावती को ‘सूर्पनखा’ बताने वाले वरुण के खिलाफ किसी कड़ी कार्रवाई के बजाए पार्टी ने उन्हें बस छोटी सी चेतावनी देकर छोड़ दिया है।
भारतीय संस्कृति के पौराणिक ग्रंथ में मौजूदा सांसदों के अक्स ढूंढते वरुण गांधी की जहरीली जुबान ने एक बार फिर सबको चौंका दिया। शनिवार को बुलंदशहर की एक रैली में महंगाई के खिलाफ बोलते-बोलते बीजेपी का ये बड़बोला युवा सांसद अनुशासन की तमाम हदों को पार कर गया। शुरुआत में तो सकपकाई बीजेपी किसी भी प्रतिक्रिया से बचती रही। आखिरकार दो दिन बाद पार्टी बोली तो लेकिन कार्रवाई छोड़ो कड़ी चेतावनी तक न दे पाई।
वरुण गांधी के मामले में बीजेपी की ये बेबसी पहली बार नहीं है। इसकी शुरुआत हुई थी मार्च 2009 में। पीलीभीत से बीजेपी का टिकट पा चुके वरुण गांधी ने एक आम सभा में ऐसी जुबान में मुस्लिमों के खिलाफ झंडा बुलंद किया था कि बड़े से बड़ा कट्टरपंथी शरमा जाए।
वरुण के इस बयान ने सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया। चुनाव आयोग तक को नोटिस जारी करना पड़ा। लेकिन पार्टी वरुण का टिकट काटने की हिम्मत ना जुटा सकी। वो चुनाव जीते और पीलीभीत से सांसद बन गए। हालांकि वरुण गांधी के खाते में एक भी ऐसी उपलब्धि नहीं है जो पार्टी के तौर पर बीजेपी को फायदा पहुंचा सके। लेकिन उनकी बदतमीजियों के खिलाफ पार्टी हर बार सिक झुकाए ही नजर आती है।








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