लखनऊ। गंजों के लिए खुशखबरी क्योंकि अब वे भी सिर में कंघी कर सकते हैं। माइक्रो हेयर ट्रांसप्लांटेशन विधि से गंजों के सिर में बाल उगाने की यह विधा सम्भव हुई है। इस विधा की तीन दिवसीय कार्यशाला यहां सहारा अस्पताल में आगामी दस फरवरी से आयोजित है जिसमें इस विधा का प्रदर्शन किया जाएगा।
कार्यशाला में इंडोस्कोपी एस्थेटिक सर्जरी की भी जानकारी दी जाएगी और इससे जुड़ी सामग्रियों का प्रदर्शन किया जाएगा। कार्यशाला में इंडोस्कोपिक एस्थेटिक सर्जरी और माइक्रो हेयर ट्रांसप्लांटेशन की समस्त प्रक्रिया का प्रदर्शन राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की फैकल्टी द्वारा किया जाएगा जिसमें जर्मनी से डॉ. अलबर्ट करुसे बर्गमैन, मुंबई से पद्मश्री डॉ. अशोक गुप्ता और कोलकाता के डॉ. मनोज खन्ना शामिल हैं।
सहारा अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारी अपूर्व दीक्षित ने बताया कि तीन दिवसीय इस कार्यशाला में इंडोस्कोपिक फेस लिफ्ट, इंडोस्कोपिक फोरहेड लिफ्ट, इंडोस्कोपिक एबडोमिनोप्लास्टी, इंडोस्कोपिक ब्रेस्ट एग्यूमेंटेशन जैसी प्रक्रियाएं एवं प्लॉस्टिक सर्जरी की अन्य स्पेशिलिटीज जैसे इंडोस्कोपिक करपाल टनल रिलीज, इंडोस्कोपिक टीएमजे सर्जरी (जॉ सर्जरी) आदि का प्रदर्शन होगा। जर्मन के विख्यात डॉ. अलबर्ट करुसे बर्गमैन नई तकनीक से बनें हाइड्रो-जेट लिपोक्सन उपकरण का प्रदर्शन करेंगे।
माइक्रो हेयर ट्रांसप्लांटेशन के क्षेत्र में राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त डॉ.मनोज खन्ना द्वारा पूरे दिन की विशेष कार्यशाला में माइक्रो हेयर ट्रांसप्लांटेशन की तकनीक का प्रदर्शन किया जाएगा।
अस्पताल के डॉ. एच.पी. कुमार ने कहा कि एस्थेटिक सर्जरी की मांग दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है क्योंकि लोगों में अपने रुप सौंदर्य के प्रति जागरुकता बढ़ी है। आज कोई भी हॉस्पिटल या इंस्टिट्यूशन एस्थेटिक या कहें कॉस्मेटिक सर्जरी की बढ़ती मांग को नजरअंदाज नहीं कर सकता।








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