नई दिल्ली। नए नियम, नए कानून। कभी विधेयक तो कभी किसी कानून में संशोधन। जी हां, इन सब के लिए जिम्मेदार हैं विधायक जो अपने-अपने इलाकों से चुनकर आते हैं और फिर विधानसभा में बैठकर हर मुद्दे को जनता के नजरिये से अंजाम देते हैं। लेकिन क्या ये कानून कोई ऐसा व्यक्ति बना सकता है जिसे कानून का ‘क’ भी न मालूम हो? क्या विपक्ष में बैठे ऐसे विधायक किसी कानून को बनने से रोक सकते हैं जिनकी शिक्षा ही लापता हो? यूपी विधानसभा की एक किताब ने लापता शिक्षा का पता बता दिया है। 533 पन्नों की इस किताब ने कर दिया है हर खुलासा।
उत्तर प्रदेश के संस्थागत वित्त मंत्री नंदगोपाल गुप्ता नंदी, समाजवादी पार्टी के विधायक रामस्वरूप सिंह और बीजेपी के विधायक कुबेर सिंह तीनों भले ही अलग पार्टियों के विधायक हों लेकिन समान बात ये है कि तीनों को अपनी शैक्षिक योग्यता का ही पता नहीं है। 404 विधायकों वाली यूपी विधानसभा में 59 ऐसे विधायक हैं जिन्हें अपनी शैक्षिक योग्यता मालूम ही नहीं है। इस मामले में या तो विधायक अपनी शिक्षा बताना ही नहीं चाहते या फिर वो अनपढ़ भी हो सकते हैं लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि ऐसे में कानून कैसे बनेंगे और कोई जनविरोधी विधेयक कैसे रुकेगा?
मुख्य सचेतक बीजेपी विधानमंडल दल राधा मोहन दास अग्रवाल कहते हैं कि शिक्षा से आचरण आता है ये नियम तो सौ फीसदी लागू नहीं होता लेकिन कानून, व्यवस्था और विधेयक के लिए तो पढ़ा-लिखा होना जरूरी है ही। कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता प्रमोद तिवारी के मुताबिक पढ़ाई-लिखाई जरूरी है, बल्कि नालेज अपडेट करना भी जरूरी है। जो लोग अपनी शैक्षिक योग्यता छिपाते हैं वो हाईस्कूल पास भी नहीं होते हैं। पूर्व मंत्री एवं एसपी महासचिव अशोक वाजपेयी के मुताबिक कोई भी विधेयक आता है दो मिनट में पास हो जाता है। किसी को पता ही नहीं है कि क्या धाराएं हैं, क्या उपबंध हैं। जिस दिन विधायक शिक्षित हो जाएगा, विधानसभा धन्य हो जाएगी।
बीजेपी, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेता बड़ी बातें कर रहे हैं लेकिन यूपी की विधानसभा में सत्ताधारी बीएसपी के 42, समाजवादी पार्टी के 09, बीजेपी के 05, कांग्रेस के 02 और आरएलडी के 1 विधायक की शिक्षा अज्ञात श्रेणी में आती है। 9 MLA 10वीं पास भी नहीं है। 19 एमएलए 10वीं तक ही पढ़े लिखे हैं और 36 एमएलए 12वीं तक पढ़े हैं यानि 404 विधायकों में से 123 विधायकों का शिक्षा के मामले में हाथ तंग है। शायद इसीलिए विधानसभा में चर्चा की जगह होता है तो सिर्फ हंगामा। विधानसभा सचिवालय सूत्रों के मुताबिक सैकड़ों बार विधायकों से उनकी शिक्षा का ब्यौरा मांगा गया लेकिन अज्ञात बताकर विधायकों ने अपना पल्ला झाड़ लिया और हकीकत यही है कि यही विधायक आपके और हमारे लिए कानून बनाते हैं।
क्या विधायकों की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय होनी चाहिए? राय दें।
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