नयी दिल्ली। वैश्विक आर्थिक मंदी ने देश के हीरा और चमड़ा उद्योग के निर्यात को न केवल बुरी तरह प्रभावित किया है बल्कि इससे हजारों हीरा इकाइयां बंद हो गयी और लाखों लोग बेरोजगार हो गये हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार देश की 6547 हीरा इकाइयों में से 2230 ही चालू स्थिति में है जबकि 4317 बंद हो गयी। इससे लगभग चार लाख 13 हजार लोग बेरोजगार हो गये हैं।
सरकार ने हीरा उद्योग के संरक्षण के लिये दो आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज दिये हैं। इसके अलावा सूरत को हीरा निर्यात की दृष्टि उत्कृष्ट शहर का दर्जा दिया गया है। इसके साथ ही कई तरह के करो में भी छूट की घोषणाएं की गयी हैं।
भारतीय हीरा उद्योग की ओर से निर्यात किये जाने वाले स्थानों में मांग में कमी आने के कारण इस उद्योग पर बुरा असर पड़ा है।
मालूम हो कि वर्ष 2009-10 के छह माह के दौरान आर्थिक मंदी के कारण भारतीय चमड़ा उत्पाद के निर्यात पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक मंदी और आधारभूत सुविधाओं की कमी के बावजूद बड़े पैमाने पर घरेलू बाजार और इसके उद्योगों के जाल के कारण चमड़ा कारीगर उस सीमा तक प्रभावित नहीं हुए और न ही उनका पलायन हुआ।
केन्द्र सरकार ने 11 वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान आधारभूत सुविधाओं के विस्तार, क्षमता निर्माण, मानव संसाधन विकास, निवेश प्रोत्साहन और पर्यावरण संरक्षण को लेकर भारतीय चर्म विकास कार्यक्रम के तहत 1237.52 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।
इसी योजना के तहत राजस्थान जोधपुर, जयपुर और अलवर, पंजाब के पटियाला और कर्नाटक के अथानी को बदलते फैशन के अनुरुप बेहतर डिजाइन तैयार करने में कारीगरों की मदद के लिए 40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
कारीगरों के प्रशिक्षण के लिए आगरा, कानुपर, चेन्नई और अन्य कारखानों में प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किये गए है तथा इसके लिए 60 करोड रपये आवंटित किये गए हैं।








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