भोपाल। भोपाल गैस त्रासदी को 25 साल बीत चुके हैं लेकिन यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री का जहर अब भी भोपाल की मिट्टी और पानी में घुला हुआ है। दिल दहलाने वाली ये रिपोर्ट किसी एनजीओ ने तैयार नहीं की है, ये रिपोर्ट है सेन्ट्रल पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड यानि खुद सरकार की। ऐसे में सवाल ये उठता है कि भोपाल के लोगों की जिंदगी से चल रहे खेल की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।
सेन्ट्रल पोल्यूशन कंट्रोल बोर्ड यानि सीपीसीबी ने हादसे के 25 साल बाद फैक्ट्री के आस-पास के इलाकों की मिट्टी और पानी के सैम्पल की जांच की है। हालांकि बोर्ड ने ये रिपोर्ट अभी जारी नहीं की है लेकिन आईबीएन 7 के पास मौजूद रिपोर्ट की कॉपी बताती है कि भोपाल का सच दिल दहलाने वाला है।
रिपोर्ट के मुताबिक फैक्ट्री के आस-पास के इलाकों की मिट्टी में भारी मात्रा में हैवी मेटल्स मौजूद हैं। इसमें खतरनाक आर्सेनिक, मरकरी, लेड और क्रोमियम शामिल हैं। हैवी मेटल्स की मात्रा तय सीमा से 50 गुना ज्यादा पाई गई है। इतनी भारी मात्रा में अगर हैवी मेटल हमारे शरीर में चला जाए तो कैंसर और लीवर की जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं।
बोर्ड ने फैक्ट्री के आसपास मिट्टी के 8 सैम्पल और पानी के 14 सैम्पल उठाए। रिपोर्ट के मुताबिक 75 फीसदी सैम्पल में जहर की जानलेवा मात्रा पाई गई है। हैवी मेटल के अलावा सीपीसीबी को भारी मात्रा में पेस्टीसाइड, आर्गेनोक्लोरीन और क्लोरिनेटेट बेनजीन जैसे केमिकल मिले हैं।
ये पहला मौका है जब किसी सरकारी संस्थान ने भोपाल में फैले जहर का लैब टेस्ट किया है। इस टेस्ट ने साबित कर दिया है कि तमाम सरकारी दावों के बावजूद पिछले 25 साल से भोपाल के लोग जहर का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर सरकार ने अब तक फैक्ट्री में रखे जहरीले कचरे को क्यों नहीं हटाया? कौन है जहर के बीच नरक होती जिंदगी में रहने के मजबूर लोगों का गुनहगार?
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