नई दिल्ली। दिल्ली में पिछले कुछ महीनों में लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जब नौकरानियों ने अपनी जान देने की कोशिश की है या फिर अपनी जान ही दे दी है। रही सही कसर पूरी कर देती है पुलिस जो मामला ही दर्ज नहीं करती और अगर करती भी है तो कार्रवाई होती है महज खानापूर्ति के लिए। इन बातों की तस्दीक करती है इंडियन सोशल इंस्टीट्यूट द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट।
कुर्सी पर जिंदगी, हर काम के लिए सहारे की जरूरत और दोनों पांव बेकार। सीमा की ऐसी हालत पहले नहीं थी। करीब तीन साल पहले जब काम की तलाश में सीमा झारखंड से दिल्ली आई तो उसके मन में बड़े-बड़े सपने थे। एक ऐसी नौकरी की तलाश थी जिससे उसकी गुजरबसर हो जाए। उम्मीद के मुताबिक एक घर में नौकरी भी मिल गई लेकिन नौकरी के बाद सीमा के अरमान टूट गए। जिस घर में वो काम कर रही थी वहां उसे परेशान किया जाने लगा। कई बार सीमा ने वहां से निकलने की भी कोशिश की लेकिन वो कामयाब नहीं हो सकी। आखिरकार तंग आकर उसने 5 अप्रैल 2009 को उसी घर की छत से छलांग लगाकर खुदकुशी की कोशिश की।
इंडियन सोशल इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में सीमा जैसी हजारों मेड अपने मालिकों का शोषण झेलने पर मजबूर हैं। दिल्ली के घरों में काम करने वाली 80 फीसदी महिलाएं खुश नहीं हैं। करीब 47 फीसदी महिलाओं के साथ उनके मालिक अच्छा व्यवहार नहीं करते। 70 फीसदी महिलाएं 10 घंटे से ज्यादा काम करती हैं और मालिक और मेड के बीच कोई एग्रीमेंट तक नहीं होता। राजधानी की भागती-दौड़ती जिंदगी में मेड लोगों की मुसीबतों को कम करती हैं लेकिन दिनोंदिन उनकी मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं।
सीमा के साथ हुए हादसे की शिकायत जनकपुरी थाने में की गई लेकिन अभी तक सीमा के बयान तक नहीं लिए गए। परेशान सीमा अब एक कोठरी में अपनी जिंदगी काटने को मजबूर है। घर के मालिक के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है आखिर सीमा ने इतना खतरनाक कदम क्यों उठाया।
सीमा की तरह ही थी आशा। महज तीन महीने की नौकरी में आशा इस कदर टूट गई कि उसने फांसी लगाकर अपनी जिंदगी खत्म कर दी। इतना कुछ होने के बाद भी उसकी लाश का पोस्टमार्टम करवाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।
जहां तक पुलिस का सवाल है तो पुलिस केवल मालिकों को ही निर्देश देती है कि वो घर में काम करने वाले लोगों का ब्यौरा उन्हें मुहैया करवाएं लेकिन घर में काम करने वाली महिलाओं और लड़कियों के साथ क्या होता है उससे पुलिस को कोई लेना देना नहीं। पुलिस का वही घिसा पिटा जवाब है कि शिकायत मिलने पर वो कार्रवाई करती है।
इंडियन सोशल इंस्टीट्यूट की इस रिपोर्ट पर अपनी राय ।
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