नई दिल्ली। पिछले साल रेलमंत्री ममता बनर्जी के रेल बजट की जितनी तारीफ हुई थी। साल भर बाद वही बजट लोगों को अखरने लगा है। इसकी वजह कुछ और नहीं बल्कि बजट वादों को पूरा न किए जाने को लेकर है। दुरांतो ट्रेन की तारीफ तो हो रही है। लेकिन बजट में ऐलान के बावजूद कुछ चुनिंदा दुरांतो ही चल पाई हैं।
इस बार बजट में कैसे दौड़ेगी ममता की रेल ये एक बड़ा सवाल है। अपने कार्यकाल में लालू की पोल खोलने वाली ममता दूसरों के लिए नजीर बन पाएंगी या नहीं। जल्द ही ये साफ हो जाएगा। ममता बनर्जी यूपीए टू के दूसरे रेल बजट की तैयारी में जुटी हैं। इस बार भी तैयारी बड़ी-बड़ी बातों की है।
पिछली बार ममता बंगाल पर सबसे ज्यादा मेहरबान थीं। और यहां दो कारखाने का ऐलान किया गया था। एक कांचरापाड़ा में सवारी डिब्बा कारखाना और दूसरा डानकुनी में इंजन के कलपुर्जों को बनाने का कारखाना।
इसके अलावा बंगाल में ही आद्रा में एक हजार मेगावाट का बिजलीघर बनाना था। डानकुनी में तो 6 महीने पहले कारखाने का शिलान्यास तो जरूर किया गया, लेकिन उसके बाद कहानी आगे नहीं बढ़ पाई। रही बात बिजली घर और सवारी डिब्बों की तो वो अभी सिर्फ कागजों पर ही है।
ऐसे में विपक्ष को उन्हें घेरने का मौका मिल गया। ममता से नाराजगी सिर्फ वामदलों की ही नहीं। पूर्व रेलमंत्री लालू यादव भी ममता से खुश नहीं हैं।
उन्होंने बिहार में रेलपहिया कारखाने का काम शुरू किया था। लेकिन रेलवे ने फिलहाल ये कहकर इसे रोक दिया है कि इसे पीपीपी के तहत कराया जाएगा। ऐसे में अब इस कारखाने का काम कब शुरू हो पाएगा ये कहना मुश्किल है।
ममता की दावों की खुली पोल
ममता ने दुरांतो ट्रेन का ऐलान कर सबसे ज्यादा वाहवाही लूटी थी। उन्होंने एक दर्जन से ज्यादा दुरांतो ट्रेन चलाने का ऐलान किया था। वैसे तो अब तक 7 दुरांतो को ममता रवाना कर चुकी हैं। इसके अलावा महिला स्पेशल, युवा स्पेशल ट्रेनों को पटरी पर उतारा जा चुका है। लेकिन बजट में घोषित 3 दर्जन से ज्यादा ट्रेनें अभी तक नहीं चल पाई हैं। इसे लेकर जरूर ममता पर उंगली उठ रही हैं।
पिछली बार ममता ने रेल बजट में रेल सुरक्षा को लेकर भी बड़े-बड़े दावे किए थे। लेकिन एक के बाद एक रेल हादसे और एक जैसे रेल हादसों ने ममता के इन दावों की पोल खोल दी है। सिग्नल के आधुनिकीकरण के जो दावे किए गए थे। उसकी शुरुआत तक नहीं हो सकी। खान-पान को लेकर लोगों की शिकायतें भी जस की तस हैं।
चुनाव है तो खुलेगा ही पिटारा
एक बार फिर सभी की निगाहें रेलमंत्री ममता बनर्जी के बजट पिटारे पर है। सब जानना चाहते हैं कि इसमें किसके लिए क्या है। लेकिन घबराने जैसी कोई बात नहीं है। सच माने तो इस बार इंतहान ममता बनर्जी का है। खासतौर पर इसलिए कि बंगाल के चुनाव के मद्देनजर वो खुद को दरियादिल दिखाने की कोशिश करेंगी। लेकिन रेलवे का हित भी तो उन्हें ही देखना है।
रेल को देश की लाइफ लाइन कहा जाता है। रेल देश के खास ही नहीं आम लोगों की भी सवारी है। चूंकि रेल आम आदमी से जुड़ा मसला है। इसलिए ये इससे जु़ड़े नेता की तकदीर बदलने वाला मंत्रालय भी है। पहले रेल बजट में ममता का इसी तबके पर ज्यादा जोर था। इसके तहत उन्होंने इज्जत पास का ऐलान किया। जिससे कमजोर आदमी मात्र 25 रुपये में महीने भर 100 किलोमीटर की यात्रा कर सके।
इस बार भी उनका सबसे ज्यादा जोर सामाजिक सरोकारों पर है। इसलिए ममता बनर्जी बजट में शिक्षा और स्वास्थ्य पर सबसे ज्यादा फोकस कर रही हैं। यानि रेलवे की खाली जमीनों पर अब खुलेंगे अस्पताल और स्कूल। इसके लिए ममता ने स्वास्थ्य मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के साथ तालमेल किया है। इससे दो फायदे होंगे। रेलवे की खाली जमीनों का उपयोग होगा। दूसरे स्कूल और अस्पताल खुलने से ममता को वाहवाही मिलेगी। वैसे तो देश भर में स्कूल और अस्पताल का प्रावधान बजट में होगा। लेकिन प्राथमिकता बंगाल को दी जाएगी।
चौतरफा हमले से बचने की तैयारी
वैसे ममता बनर्जी की मुश्किल ये भी है कि बंगाल को लेकर उन पर चौतरफा हमला हो रहा है। कहा जा रहा है कि उन्हें बंगाल के अलावा कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। दूसरे दलों के अलावा वामदल भी उन्हें नसीहत दे रहे हैं।
ऐसे हमलों से निपटने के लिए ममता ने रास्ता निकाल लिया है। उनको लगता है कि सबसे पहले मीडिया का ध्यान बंगाल से हटाना होगा।
इसी के मद्देनजर ममता बनर्जी सोनिया को एक बड़ा तोहफा 'पैलेस ऑन व्हील' का देने जा रही हैं। ये ट्रेन आगरा से चलेगी और लखनऊ, रायबरेली, प्रयागघाट, वाराणसी, खजुराहो, झांसी होते हुए आगरा पहुंचेगी।
इसके अलावा लखनऊ से रायबरेली होते हुए वाराणसी के रास्ते में पड़ने वाले सभी 10 महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों पर खास सुविधाएं दी जाएंगी। लखनऊ से अमेठी के बीच रेलवे फाटक से मुक्ति दिलाने के लिए पुल बनाने का भी बजट में प्रस्ताव किया जाएगा। इसके साथ ही ममता की एक और कारखाना इस क्षेत्र में देने की योजना है।
लेकिन फिलहाल ममता रेल बजट के बारे में कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं। ममता बनर्जी भले ही देश की रेल मंत्री हों। लेकिन उनकी नजर पश्चिम बंगाल की गद्दी पर है। ऐसे में रेल बजट पर इसका असर पड़ना लाजिमी है। यानी, इस बार का रेल बजट लोकलुभावन होगा। साफ है, यात्री किराया और माल भाड़ा इस बार भी नहीं बढ़ेगा। इसके अलावा दुरांतो ट्रेन को मिली कामयाबी को भुनाते हुए वो कुछ और दुरांतो ट्रेन का ऐलान कर सकती हैं।








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