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स्कूल नहीं, मासूम बच्चियां पहुंच रही हैं चकलाघर

Posted on Feb 18, 2010 at 01:50pm IST | Updated Feb 18, 2010 at 06:36pm IST

नई दिल्ली। खुशबू जिस पेशे में है उसे दुनिया धंधा कहती है। और खुशबू उसका असली नाम भी नहीं। धंधे में वो दूसरे नाम से जानी जाती है। वो ऐसे मंजी हुई प्रोफेशनल की तरह बात करती है कि लगता नहीं वो महज बारह साल की है। खुशबू के हाथ में स्कूल बैग होना चाहिये मगर उसके हाथ में है फैशनेबल पर्स। शायद क्लाइंट अट्रैक्ट करने का नुस्खा हो जो खुशबू को उसकी आंटी ने सिखाया है। खुशबू को इस छोटी सी उम्र में स्कूल जाना चाहिये मगर उसके दिन और रात का टाइम-टेबल तो उसकी आंटी सेट करती हैं। सुबह डॉक्टर के पास, दोपहर खरीदारी और शाम को ग्राहकों के पास।

वैसे खुशबू की आंटी से भी आपका तआर्रुफ कराते चलें। दुनिया इन्हें दलाल के नाम से जानती है। ये ही है खुशबू की माई-बाप। जिसके इशारे पर खुशबू नाचती है। हमने पड़ताल की तो पता चला नौकरी के बहाने खुशबू को उसके मां-बाप से छीन लिया गया और डाल दिया गया आंटी की मांद में। खुशबू की मासूमियत कब छिन गयी ये जब तक उसे पता चलता उसका नाम धंधे की व्यापारियों के जुबां पर चढ़ चुका था।

खुशबू की इस दर्दनाक दास्तान की तस्दीक यूएनडीपी द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट करती है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में वेश्यावृत्ति में शामिल लोगों में 15 फीसदी तादात 15 साल से कम उम्र के बच्चों की है। इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाईजेशन की रिपोर्ट भी इस बात को मानती है। यही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी कुछ दिन पहले ये टिप्पणी की थी कि भारत बाल वेश्यावृति का केन्द्र बनता जा रहा है।




भारत में सेक्स वर्कर की संख्या करीब 28 लाख है। इनमें करीब 43 फीसदी महिलाएं ऐसी हैं जो उस उम्र में ही इस धंधे में धकेल दी गईं जब उनकी उम्र अठारह बरस भी नहीं थी। भारत में 15 से 35 साल तक की महिलाओं की गिनती की जाए तो उनमें से 2.4 फीसदी महिलाएं सेक्स वर्कर हैं। इनमें सबसे ज्यादा महिलाएं मध्य प्रदेश और बिहार से हैं। इसके बाद राजस्थान और यूपी का नंबर आता है।

मतलब साफ है आज भी हमारे समाज की परिस्थितियां ऐसी हैं जो इन मासूमों को इस दलदल में उतरने के लिये मजबूर करती हैं। दो महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने ये अहम सवाल केंद्र सरकार से पूछा था कि वेश्यावृत्ति रोक नहीं सकते तो उसे कानूनी मंजूरी क्यों नहीं देते। हालांकि सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी पर दो अलग-अलग राय हैं। कुछ लोगों की राय में वैधानिक मान्यता इसका समाधान नहीं है।

दिल्ली और मुंबई सेक्स वर्कर की पहली पसंदीदा जगह हैं। भारत में नेपाल से आने वाली सेक्स वर्कर की बड़ी तादाद है। सेक्स के काले धंधे में बच्चों की मांग बहुत ज्यादा है। एक सर्वे के मुताबिक 60 फीसदी सेक्स वर्कर लोअर कास्ट से और 40 फीसदी सेक्स वर्कर ऊंची जातियों से ताल्लुक रखती हैं। औसतन एक सेक्स वर्कर महीने में 2 हजार से 24 हजार रुपए कमाती हैं जबकि कॉल गर्ल 40 हजार से 60 हजार रुपए महीना कमाती है।

पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने भी बाल वेश्यावृति रोकने के लिए एक स्पेशल जांच एजेंसी बनाने की बात कही। कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से कहा है कि बच्चों से देह व्यापार करवाने वालों को जमानत नहीं मिलनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बाल वेश्यावृति रैकेट के चलते हिन्दुस्तान सेक्स का हब बनता जा रहा है। कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि सरकार बाल वेश्यावृति करवाने वालों के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 के तहत मामला क्यों नहीं दर्ज करती।

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