नई दिल्ली। देश के मशहूर चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन ने कतर की नागरिकता मिलने के बाद पहली बार अपने दिल के दर्द को उजागर किया। एक अखबार को दिए इंटरव्यू में हुसैन ने खुल कर अपने दिल का हाल बयान किया। हुसैन का कहना है कि वो तो भारत को दिलों जान से प्यार करते हैं लेकिन भारत ने ही उन्हें नकार दिया। हुसैन कहते हैं 'भारत मेरी मातृभूमि है। मैं अपनी मातृभूमि से घृणा नहीं कर सकता। लेकिन भारत ने मुझे खारिज कर दिया। ऐसे में मुझे भारत में क्यों रहना चाहिए?'
एम एफ हुसैन भारत में अपने साथ हुए व्यवहार के लिए नेताओं को दोषी ठहराते हैं। उनका कहना है कि किसी ने भी बुरे वक्त में उनका साथ नहीं दिया। हुसैन कहते हैं ''जब संघ परिवार ने मेरे ऊपर हमला किया तो उस समय सभी चुप्पी साधे रहे। राजनीतिक नेतृत्व, कलाकारों या बुद्धिजीवियों में से किसी ने भी मेरे पक्ष में आवाज नहीं उठाई। लेकिन मैं इस सच्चाई को जानता हूं कि भारत की 90 प्रतिशत जनता मुझे प्यार करती है। वे सभी मेरे साथ हैं। कुछ राजनेताओं सहित केवल 10 प्रतिशत लोग मेरे खिलाफ हैं।''
मालूम हो कि हुसैन को कतर की तरफ से नागरिकता की पेशकश हुई थी। जिसे उन्होंने मान लिया और अब हुसैन कतर के नागरिक हैं। हुसैन का मानना है कि भारत में उन्हें पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी गई। जबकि कतर में उन्हें हर तरह की आजादी है।
''भारत की सरकारें मेरी हिफाजत नहीं कर सकीं। इसलिए इस तरह के देश में निवास करना मेरे लिए बहुत कठिन है। राजनेताओं की नजर सिर्फ वोट पर है। जबकि कतर में मैं पूरी आजादी का आनंद ले रहा हूं। अब कतर ही मेरा स्थान है। यहां मेरी अभिव्यक्ति की आजादी पर किसी का अंकुश नहीं है। मैं यहां बहुत खुश हूं।''
गौरतलब है कि हुसैन के खिलाफ देश में दर्जनों कानूनी याचिकाएं दायर हैं। उन पर हिंदू देवी-देवताओं के अश्लील चित्र बनाने के आरोप हैं। लेकिन अब कतर की नागरिकता मिलने के बाद हुसैन खुश हैं। हुसैन का साफ कहना है कि कतर में उनकी आजादी पर किसी तरह की कोई बंदिश नहीं होगी।
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