नई दिल्ली। राज्यसभा से पास महिला आरक्षण बिल 15 या 16 मार्च को लोकसभा में पेश हो सकता है। कानून मंत्री वीरप्पा मोइल्ली के मुताबिक शुक्रवार को इसकी तारीख तय कर ली जाएगी। लेकिन मुलायम, लालू और शरद यादव पूरी ताकत के साथ बिल का विरोध कर रहे हैं।
राज्यसभा की मार्शल कार्रवाई की तपिश ने बुधवार को लोकसभा में असर दिखाया। फर्क ये कि यहां राज्य सभा की तरह आरजेडी, समाजवादी पार्टी और जेडीयू के अनजान सांसद नहीं थे। लोकसभा में कमान संभाली लालू, मुलायम और शरद यादव जैसे दिग्गजों ने। तीन बार सदन की कार्रवाई शुरू हुई लेकिन पांच मिनट से ज्यादा नहीं चल पाई। यादव तिकड़ी अपने राज्य सभा सांसदों के खिलाफ मार्शल कार्रवाई से आगबबूला हैं और लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पेश ना होने देने की खुली चुनौती दे रही है।
लालू यादव ने कहा कि मंगलवार को राज्यसभा में लोकतंत्र का गला घोंटा गया है। महिला आरक्षण बिल वहां पास किया गया जहां आरक्षण का कोई प्रावधान ही नहीं है। मुस्लिम और दलित महिलाओं को आगे लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारा विरोध जारी रहेगा। लेकिन सरकार राज्य सभा में बिल पास करवाकर आत्मविश्वास से लबरेज़ है। इसलिए वो लोक सभा में जल्द से जल्द बिल पेश करना चाहती है।
दरअसल अगर लोकसभा में बिल जल्द पेश ना हुआ तो सरकार पर औपचारिकता पूरी करने का आरोप लगेगा जो वो नहीं चाहती। महिला आरक्षण बिल सोनिया गांधी का निजी एजेंडा है और वो इसे जल्द से जल्द पास करवाने का निर्देश अपनी पार्टी को दे चुकी हैं। लोकसभा में सरकार के पास पर्याप्त बहुमत है जबकि राज्यसभा में वो अल्पमत में थी। यानी लोक सभा में बिल पेश करने का नैतिक दबाव भी उस पर है।
16 मार्च को संसद के बजट सत्र का पहला हिस्सा खत्म हो रहा है। इसके बाद करीब तीन हफ्ते की छुट्टी है। सरकार की रणनीति किसी भी तरह बिल पेश कर देने की है। इसके बाद आम सहमति बनाने के लिए उसके पास माकूल वक्त भी होगा।
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