नई दिल्ली। महिला आरक्षण बिल को लेकर बीजेपी के अंदर भी मतभेद सामने आ गए हैं। हालत ये है कि इसे दूर करने के लिये पार्टी के बड़े नेताओं को बैठक बुलानी पड़ी। बैठक में हालांकि इस फैसले पर मुहर लगा दी गई कि महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन होगा लेकिन पार्टी सूत्रों का मानना है कि इस पूरे खेल में बीजेपी ने खोया बहुत और पाया कुछ भी नहीं। महिला आरक्षण बिल पर पार्टी की राय बंटी हुई है लेकिन व्हिप ने पार्टी नेताओं को मजबूर कर रखा है। पार्टी में इसे लेकर एक राय नहीं है इसका अंदाजा तब लग गया जब पार्टी के चीफ व्हिप रमेश बैस ने दबी जुबान ही सही, ये माना कि सांसदों के बीच बिल को लेकर संशय की स्थिति है।
रमेश बैस ने इस बात की पुष्टि की कि बीजेपी के कुछ सांसद इस बिल को लेकर उनसे मिले और अपनी असहमति जताई लेकिन ये पार्टी का अंदरूनी मसला है और वे इसे सुलझा लेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी फोरम में भी अभी तक ऐसी कोई बात नहीं उठी है। जब बैस से इस बिल पर उनकी व्यक्तिगत राय पूछी गई तो उन्होंने कहा कि मैं इस बारे में कुछ नहीं कहूंगा। वैसे भी मेरा व्यक्तिगत निर्णय पार्टी निर्णय से बड़ा नहीं है। पार्टी ने जो निर्णय लिया है वो चाहे सही हो या गलत लेकिन हम उसका समर्थन करेंगे।
बीजेपी के एक बड़े धड़े को ये लगता है कि महिला आरक्षण बिल का समर्थन कर उसे कुछ नहीं मिला। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस इस बिल को पास कराने का श्रेय ले जायेगी। तो पूरा फायदा कांग्रेस को मिला। लालू, मुलायम शरद जैसे लोग जो इस बिल की मुखालफत कर रहे हैं वो ओबीसी, दलितों और मुसलमानों को ये संदेश देने में कामयाब हो गये कि उनकी लड़ाई इन तीनों ने लड़ी। बीजेपी को एक और नुकसान ये हुआ कि मंहगाई के मुद्दे पर विपक्षी एकता को भी कांग्रेस ने इसी बहाने तोड़ दिया।
अंदरखाने की खबर तो ये भी है कि बीजेपी के सांसद ये चाहते थे कि इस बिल पर अंतिम फैसला लेने के पहले पार्टी को कम से कम संसदीय दल की एक बैठक बुलानी चाहिए थी। उसके बाद भी अगर ये फैसला कायम रहता तो वो इसके पक्ष में वोट करते। बीजेपी सांसद हुकुम देव नारायण कहते हैं कि सभी सदनों में आरक्षण का प्रावधान होना चाहिये न कि केवल विधानसभा और लोकसभा में। लेकिन बिल में समरूपता और एकरूपता आ जाये। सभी धड़ों को शामिल किया जाए। जो विरोध कर रहे हैं उनकी भी सुनी जाए। बीजेपी के एक अन्य दिग्गज सांसद योगी आदित्यनाथ ने इस बिल का विरोध करते हुए कहा है कि ये कांग्रेस का पाप है जिसे बीजेपी अपने सिर ढो रही है। उन्होंने तो यहां तक कहा कि अगर इस मुद्दे पर व्हिप जारी हुआ तो व्हिप का उल्लंघन भी होगा।
पार्टी सांसदों की इस कुलबुलाहट ने बीजेपी को इस बात पर बैठक करने को मजबूर कर दिया है। सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, राजनाथ सिंह, मुरली मनोहर जोशी सब इस बैठक में थे लेकिन दिक्कत ये थी कि इस फैसले पर पीछे जाना राजनीतिक मौत के अलावा कुछ भी नहीं था सो फैसला हुआ कि पार्टी इस बिल का समर्थन करेगी। लोकसभा में भी व्हिप जारी होगा।
बहरहाल बीजेपी के अंदर उठापटक ने कांग्रेस को ये संकेत दे दिया है कि लोकसभा में इस बिल को पास कराना उसके लिये कितना मुश्किल हो सकता है। वैसे बीजेपी के भीतर के विरोध का कांग्रेस राजनीतिक लाभ उठाने से भी नहीं चूकेगी।
कांग्रेस, जेडीयू, टीएमसी में भी विरोध के सुर
नई दिल्ली। महिला आरक्षण बिल को खतरा सिर्फ असंतुष्ट भाजपा सांसदों से ही नहीं है। इस बिल को लेकर कांग्रेस में भी विरोध के सुर उठ रहे हैं। कांग्रेस सांसद इसरार उल हक ने सबसे पहले आवाज उठाई है। इसरार ने कहा कि बिल में ये बात देखनी होगी कि इसमें सबको फायदा हो, किसी को नुकसान न हो। इसके लिए हम बात करके देखेंगे। जो कुछ लोग अंदेशा जाहिर कर रहे हैं उसपर गौर करना चाहिए।
वहीं जेडीयू जिसके सांसदों ने राज्यसभा में बिल का समर्थन किया था, लोकसभा में बिल का विरोध करने पर उतारू है। लोकसभा में पार्टी के चीफ व्हिप मांगी लाल मंडल ने कहा कि वे बिल की मूल भाषा के खिलाफ हैं और अगर इसमें संशोधन नहीं किया गया तो पार्टी इसके विरोध में व्हिप जारी करेगी। जेडीयू के लोकसभा में बीस सांसद हैं।
इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस ने बिल पर अपना रुख साफ नहीं किया है जबकि शिवसेना का कहना है कि यदि लोकसभा में मार्शल का प्रयोग कर बिल पास कराया जाता है तो वो उसका विरोध करेगी।








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