नई दिल्ली। इसे कुदरत का करिश्मा कहा जाए या फिर इत्तिफाक कि कभी लड़ाई-झगड़े में लगे रहने वाले अपराधी किस्म के एक शख्स की जिंदगी मस्तिष्काघात के बाद इतनी बदल गई कि अब वह एक जुनूनी कलाकार बन चुका है।
कभी पेशे से भवन निर्माता रहे 60 वर्षीय टामी मैकहाग का दिमाग मस्तिष्काघात के बाद बिल्कुल बदल चुका है और वह हर रोज ।6 घंटे चित्रकारी में लगाते हैं। चित्र बनाने का जुनून उन पर इस हद तक छाया हुआ है कि उन्होंने अपने घर की दीवारों, छत, यहां तक कि फर्श को भी खूबसूरत चित्रों से सजा दिया है।
टामी के सिर के पिछले हिस्से में दो फोड़े हो गए थे। उनके फूट जाने के बाद वह 200। में एक हफ्ते तक कोमा में रहे। इस दौरान वह मौत के बिल्कुल नजदीक पहुंच चुके थे। जब वह इस गहरी बेहोशी से जागे तो जिन्दगी के प्रति उनका नजरिया पूरी तरह से बदल चुका था। उनमें सृजन की ऐसी ऊर्जा आ गई थी कि उसे संभालना उनके लिए मुश्किल हो गया और वह कविता लिखने, चित्र बनाने, मूर्तियां गढ़ने और नक्काशी करने लगे।
डाक्टरों का मानना है कि टामी के अचानक कलाकार बन जाने का कारण मस्तिष्काघात है। अमेरिका में हार्वर्ड विश्वविद्यालय की एक तंत्रिका विज्ञानी डा.एलिस फ्लाहर्टी ने टीम और उसकी अविश्वसनीय स्थिति का अध्ययन करने के बाद कहा कि उनकी चोट के कारण ही उनमें यह प्रकाश फूटा।
टामी के मित्र समझ नहीं पा रहे हैं कि इस बदले हुए व्यक्ति का क्या किया जाए। वो मूर्तियां बनाने के लिए लट्ठे पर घंटों मोम टपकाता रहता है। अक्सर कविताएं कहता है। बिल्लियों को प्यार करता है और गलती से भी कोई कीडा कुचल जाए तो रोने लगता है।








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