अहमदाबाद। 8 सालों में पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को 2002 दंगों से जुड़े चुभते सवालों के जवाब देने पड़ेंगे। पहली बार उन्हें देनी होगी सफाई कि जब अहमदाबाद के बीचोंबीच बने गुलबर्गा सोसाइटी दंगों की आग में धू-धू कर जल रही थी तो वो क्या कर रहे थे। पहली बार उन्हें ये बताना होगा कि जब उस सोसाइटी में मौजूद 69 लोगों का कत्लेआम हो रहा था तो उनकी पुलिस चुपचाप तमाशा क्यों देख रही थी। इस केस की जांच कर रही एसआईटी ने मोदी को तलब कर लिया है, उन्हें पूछताछ के लिए समन भेजा गया है।
आजाद हिंदुस्तान के माथे पर कलंक
पहली बार अहमदाबाद की गुलबर्गा सोसाइटी हत्याकांड में मोदी से होगी पूछताछ। वो हत्याकांड जिसमें कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी को जिंदा जला दिया गया था। उनकी सोसाइटी में आग लगा दी गई थी। कुल 69 बेगुनाह लोग धर्म की सूली पर टांग दिए गए थे। वो जख्म आज भी हरे हैं, बल्कि आठ सालों में नासूर बन चुके हैं।
मोदी संगीन आरोपों के कठघरे में हैं -
आरोप ये कि उन्होंने गुलबर्गा सोसाइटी हत्याकांड में शामिल दंगाइयों की मदद की। पुलिसवाले तमाशबीन बनकर लोगों का कत्लेआम देखते रहे। कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी लगातार प्रशासन के आला अफसरों को फोन कर-कर के मदद मांगते रहे। लेकिन न मदद आई न राहत। पूरी की पूरी सोसाइटी फूंक दी गई। अब पहली बार मोदी को देना होगा गुलबर्गा सोसाइटी के जख्मों का हिसाब।
एहसान जाफरी की पत्नी जकिया जाफरी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मोदी, उनके कुछ मंत्री और पुलिसवालों समेत 62 लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने एसआईटी को गुलबर्गा सोसाइटी मामले में जांच के आदेश दिए। 30 अप्रैल तक एसआईटी को इस मामले में अपनी जांच रिपोर्ट पेश करनी है और जांच की एक अहम कड़ी है गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी।
एसआईटी मोदी से पूछ सकती है....
क्या दंगाइयों पर कार्रवाई न करने का आदेश दिया गया?
क्या पुलिसवालों पर मोदी ने दबाव डालने की कोशिश की?
क्या गुलबर्गा सोसाइटी हत्याकांड प्रायोजित था?
आखिर दंगाइयों ने कैसे गुलबर्गा सोसाइटी को फूंक डाला?
दंगाइयों पर काबू पाने के लिए पुलिस ने क्या किया?
एसआईटी सबूत जुटाकर मोदी से पूछताछ को तैयार
वहीं समन भेजने से पहले एसआईटी ने सारे सबूत जुटा लिए हैं। मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल कुछ तत्कालीन मंत्रियों की भी गवाही दर्ज की जा चुकी है। एसआईटी मोदी के बयानों को तस्दीक अपने पास मौजूद सबूत और बयानों से करेगी और फिर 30 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में जांच रिपोर्ट पेश कर देगी।
मोदी मंत्रिमंडल में तत्कालीन गृह मंत्री थे गोर्धन जडाफिया, मोदी मंत्रिमंडल में स्वास्थ्य मंत्री थे अशोक भट्ट, बीजेपी नेता आई के जडेजा, तत्कालीन आईजी शिवानंद झा और पूर्व आईपीएस आर बी श्रीकुमार। एसआईटी इन तमाम लोगों से पूछताछ कर चुकी है, उनके बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें से कुछ लोगों की भूमिका पर तो एहसान जाफरी की बेवा जकिया जाफरी ने अपनी याचिका में भी उंगली उठाई है।
इसके अलावा गुलबर्गा सोसाइटी हत्याकांड के वक्त मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषणों की भी एसआईटी जांच कर रही है। गुजरात सरकार की नानुकुर के बाद सुप्रीम कोर्ट पहले ही उसे फटकार लगा कर जांच के लिए जरूरी तमाम जरूरी दस्तावेजों को मुहैया करवाने का आदेश दे चुका है। यानि एसआईटी के पास मामले से जुड़े हर पहलु की हर जानकारी मौजूद है।
गुलबर्गा सोसायटी पर हमले की हकीकत
गुजरात दंगों का जब-जब जिक्र होता है। अहमदाबाद के गुलबर्गा सोसाइटी का भी जिक्र होता है। ये वो सोसाइटी है जहां दंगाइयों ने 69 लोगों को बेरहमी से कत्ल कर दिया था। आरोप तो ये भी है कि ये कत्लेआम दरअसल राज्य सरकार औऱ स्थानीय प्रशासन के इशारे पर हुआ था।
28 फरवरी 2002 को अहमदाबाद की गुलबर्गा सोसायटी में गुजरात दंगों का सबसे भद्दा चेहरा दिखा। सैकड़ों लोगों की भीड़ ने दोपहर में अचानक गुलबर्गा सोसायटी पर हमला बोला। निशाने पर थे इस बिल्डिंग में रहने वाले कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी। वो लगातार पुलिस को फोन करते रहे। लेकिन मदद के नाम पर कुछ नहीं हुआ। भीड़ ने एहसान जाफरी समेत 69 लोगों को वहीं कत्ल कर दिया। किसी को बचने तक का मौका नहीं मिला। एक झटके में सब कुछ खत्म।
गुलबर्गा सोसायटी की इस भयानक हकीकत को सबसे ज्यादा एहसान जाफरी की पत्नी जकिया ने झेला। जकिया की याचिका के बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात दंगों में नरेंद्र मोदी की भूमिका की जांच का आदेश दिया है। उनकी मानें तो उन्हें अब जाकर इंसाफ की उम्मीद जगी है।
जकिया ने कहा- इंसाफ की आस जगी
गुजरात दंगों में अपने पति को खोने के बाद जकिया इंसाफ की लड़ाई लड़ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में उन्होंने मुख्यमंत्री मोदी के खिलाफ सनसनीखेज आरोप लगाए थे। जकिया का आरोप था कि गोधरा कांड के बाद हुए दंगों को संवैधानिक रूप से चुनी हुई गुजरात सरकार की सहमति मिली हुई थी। गोधरा कांड के बाद मुख्यमंत्री, उनके कुछ सहयोगियों और बड़े अधिकारियों के बीच बैठक हुई थीं। जिसमें पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को गैर-कानूनी काम करने के निर्देश दिए गए। गुजरात के एक पूर्व मंत्री हिरेन पंड्या ने सिटिजन ट्राइब्यूनल को दिए अपने बयान में इसकी ताकीद की थी।
इसी आरोप के साथ 8 जून 2006 को जकिया ने गुजरात के डीजीपी को एक लंबी शिकायत भी लिखी थी। लेकिन जब एफआईआर दर्ज नहीं हुई तो उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने भी जकिया की याचिका रद्द कर दी तब वो सुप्रीम कोर्ट पहुंची।
जकिया का आरोप है कि गुजरात के एक पूर्व मंत्री के मुताबिक मुख्यमंत्री की बुलाई बैठक में तत्कालीन मुख्य सचिव सुभा राव और तत्कालीन गृह सचिव अशोक नारायण और कुछ वरिष्ठ पुलिस अफसर मौजूद थे। इस बैठक में उन्हें साफ-साफ निर्देश दिया गया कि दंगे पर आमादा हिंदुओं पर कोई कार्रवाई न हो। ये दंगे राज्य सरकार की तरफ से प्रायोजित थे जिसमें हिंसा फैलाना और महिलाओं के साथ दुराचार की बात भी शामिल थी।
जाफरी के इन आरोपों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को जवाब देने के लिए नोटिस जारी कर दिया था। कोर्ट ने गुजरात सरकार से ये भी सवाल पूछा था कि अगर एक शख्स को किसी अपराध की जानकारी है। लेकिन उससे पुलिस कुछ भी पूछ नहीं रही तो ऐसे केस में उस शख्स के लिए क्या उपाय है।
गुजरात को मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को एसआईटी ने पूछताछ के लिए तलब किया। सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने मोदी के इस्तीफे की मांग कर डाली तो लेफ्ट पार्टियों ने कहा कि आठ साल बाद ही सही अब सच्चाई सामने आकर रहेगी।








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