धारवाड़। कर्नाटक में परंपरा और अंधविश्वास ने नाम पर हो रहा है जिंदगी से खिलवाड़। धारवाड़ के एक गांव में लोगों ने अंगारों की होली खेलते हैं। इस अंगारों की होली का मकसद सिर्फ एक होता है ऊपर वाले को खुश करना। वो कितना खुश हुए पता नहीं लेकिन इस आग के खेल में कई लोग जख्मी हो गए।
अगर आग इंसान को छू भी जाए तो जलन के मारे हालत खराब हो जाती है। लेकिन अंगारों के भक्त इसे एक खेल मानते हैं। वो इसे अंगारों की होली भी कहते हैं। इस होली में कई लोग घायल होते हैं बावजूद इसके ये खेल चलता रहता है।
दरअसल रात होते ही चारों तरफ बिखरे होते हैं शोले ही शोले और सभी इस इंतजार में होते हैं कि कब मुखिया शोलों से खेलने की इजाजत दें। मुखिया यानी गांव का सबसे बड़ा आदमी। जिसकी इजाजत के लिए पहले पांच बार मुखिया पर अंगारे बरसाए जाते हैं।
इसके बाद एक-एक कर गांव वाले अंगारों के बीच में जाकर आग से खेलते हैं। कोई हवा में शोले उड़ाकर भागता है तो कोई उसमें जाकर पैरों से अंगारे हवा में उछालता है। ये तांडव पूरी रात चलता रहता है। जाहिर है आग अपना असर कैसे छोड़ देगी। अंगारों के इस खेल में कई भक्त घायल भी हो जाते हैं। मगर इससे खेल नहीं रुक सकता।
मालूम हो कि कर्नाटक के कमलेश्वर मंदिर के बाहर हर साल एक मेला लगता है। आसपास के गांवों के लोग यहां अपनी भक्ति की परीक्षा देने आते हैं। आग की होली खेलकर यहां सैकड़ों लोगों की भीड़ जुटती है। जो पास के गावों से आते हैं और रात होते ही अंगारों की होली शुरू हो जाती है।
लेकिन होली खेलने से पहले भगवान शिव की पूजा की जाती है। उसके बाद निकाली जाती है रथयात्रा। इस बीच अंगारों के बीच नाच की तैयारियां होनी शुरू हो जाती हैं। रथयात्रा निकालने के बाद जो होता है वो रोंगटे खड़े कर देने के लिए काफी है।
हर साल होने वाले इस तांडव में कई लोग जख्मी हो जाते हैं। लेकिन यहां के लोगों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। वो इसे भगवान के प्रसाद की तरह देखते हैं। कमलेश्वर मंदिर आने वाले भक्त मानते हैं कि अंगारों की होली खेलकर वो अपने भगवान को खुश करते हैं। गांव वालों की मानें तो अंगारों पर चहलकदमी और उनसे होली खेलने की ये परंपरा 11 वीं सदी से चली आ रही है।
एक तरफ विज्ञान के चमत्कार और वहीं दूसरी तरफ इस तरह का आस्था। गांववालों का मानना है कि नंगे पैर अंगारों पर चलने से उनकी मन्नतें पूरी होंगी। आस्था की वजह से इस मामले में प्रशासन कोई दखलंदाजी नहीं देता। यहां के लोगों को आग से डर तो है और इन्हें ये भी पता है कि इससे खाल जल सकती है। लेकिन ये जुनून के साथ आग से खेलते हैं।








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