लद्दाख। ऐसे लोगों की कमी नहीं जो अपने समाज के सच्चे नायक हैं। अपनी और किसी ख़ासियत की वजह से नहीं बल्कि अपने काम की बदौलत वो बन गए रियल हीरोज। आईबीएन18 ऐसे ही लोगों को ढूंढ कर दे रहा है एक मंच। आज के हीरो हैं मोहम्म्द इक़बाल। जिन्होंने शारीरिक रूप से कमजोर लोगों को पढ़ाने और रोज़गार दिलाने की मुहिम छेड़ दी। वो भी लद्दाख के एक छोटे से गांव में।
शारीरिक तौर पर कमज़ोर 43 साल के मोहम्म्द इक़बाल। अब एक संस्था खड़ी कर चुके हैं। मकसद है अपने जैसे लोगों को आत्मनिर्भर बनाना। इक़बाल ने शारीरिक तौर पर कमजोर 35 लोगों को इकठ्ठा कर बेकार के कागज और कपड़ों से काम की चीजें बनाना शुरू कीं।
धीरे-धीरे शेय गांव में बेकार के कागज और कपड़ों को जलाना बंद कर उनका दोबारा इस्तेमाल किया जाने लगा। इस काम से जुड़े लोगों को आमदनी होने लगी। 30 साल की स्कर्मा शेडप अपने परिवार पर निर्भर थी। लेकिन आज वो खुद हर महीने 4 हजार रुपए कमा रही हैं।
इकबाल का जन्म लद्दाख के शेय गांव में हुआ। उनके 6 भाई बहनों ने तो शिक्षा ले ली। लेकिन उन्हें स्कूल जाने का मौक़ा नहीं दिया गया। इसलिए उन्होंने अपने जैसों को शिक्षित करने और रोज़गार दिलाने की मुहिम चलायी हैं। 8 साल के रिग्जेन एग्मो को स्कूल से निकाल दिया गया था। लेकिन आज रिग्जेन पढ़ रहा है। साथ ही उस जैसे 30 और लोग भी।
इक़बाल ने संस्था की स्थापना साल 2007 में की। संस्था अब शारीरिक तौर पर कमजोर लोगों के लिए पर्यटन के मौके ढूंढने और एक रिसाइकिल यूनिट लगाने की तैयारी कर रही है। आज इकबाल का आत्मविश्वास देखते ही बनता है।








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