वाशिंगटन। आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई न किए जाने पर पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए भारत ने दो टूक कहा है कि उसके संयम को उसकी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। भारत ने यह भी कहा कि उसके खिलाफ विध्वंसकारी एजेंडा चलाने वालों से प्रभावी तरीके से कैसे निपटा जाए, यह उसे आता है।
विदेश सचिव निरुपमा राव ने सोमवार को वाशिंगटन के प्रसिद्ध थिंक टैंक वुडरो विल्सन सेंटर में कहा कि उकसावों के अलावा हम आतंकवादियों का निरंतर सामना कर रहे हैं, जिनका संबंध पाकिस्तान की धरती से है। पाकिस्तान जमीन से ताल्लुक रखने वाले आतंकवादियों से मुश्किलें झेलने के बावजूद हम संवाद के रास्ते से अलग नहीं हुए हैं।
उन्होंने कहा कि अमेरिका की तरह भारत भी अपने पड़ोसी देश में विद्यमान आतंकवादी ढांचे से चिंतित है। हमारे पड़ोस में आतंकवादी ढांचे की मौजूदगी और इसको राज्य की नीति के रूप में इस्तेमाल करना भारत के लिए चिंता की बात है।
उन्होंने कहा कि हमारी जमीन, शहरों और हमारे लोगों पर आतंकवाद का खतरा निरंतर बना हुआ है। यह खतरा उसी तरह का है जैसा अमेरिकी जनता को भी है। इसे अमेरिका भी समझता है।
राव ने कहा कि आतंकवाद से निपटने के लिए भारत का रुख संयमयुक्त है लेकिन हमारे संयम को कमजोरी या हमारे लोगों को नुकसान पहुंचाने, देश में अनिश्चितता पैदा करने और विकास में बाधा पहुंचाने के इच्छुक लोगों के खिलाफ कार्रवाई की अनिच्छा नहीं समझा जाना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि हम एक मजबूत देश हैं और हमारे पास भारत और उसके लोगों के खिलाफ विध्वंसात्मक कार्यो को बढ़ावा देने वालों से प्रभावी तरीके से निपटने की क्षमता है।
उन्होंने कहा कि प्रकृति के खतरों का सामना करने के बावजूद भारत ने विश्वास और भरोसे को बहाल करने के लिए कई प्रयास किए हैं।
पाकिस्तान के विदेश सचिव सलमान बशीर के साथ हाल में हुई मुलाकात का हवाला देते हुए राव ने कहा कि हमने फिर पाकिस्तान के साथ बकाया मुद्दों, आतंकवाद के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे को वार्ता के माध्यम से हल करने का प्रयास किया।
राव ने कहा कि वार्ता में प्रगति के लिए यह जरूरी है कि पाकिस्तान आतंकवाद को लेकर हमारी चिंताओं पर सार्थक कदम उठाए और भारत को निशाना बनाने वाले आतंकवादियों को उत्साहित करना बंद करें।
पाकिस्तान को अमेरिकी सैन्य सहायता के बारे में राव ने कहा कि इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि इसका उपयोग अफगानिस्तान सीमा पर आंतकवादियों के खिलाफ ही हो।
काबुल में पिछले दिनों हुए आतंकवादी हमले के बावजूद राव ने अफगानिस्तान के विकास और पुनर्निर्माण में भारत का योगदान जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से भी वहां डंटे रहने की अपील की।
उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में भयावह हालात हमारे क्षेत्र में सबसे कठिन सुरक्षा चनौतियों में से एक है। हमारा मानना है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को अफगानिस्तान में अपने कार्यो को जारी रखना चाहिए।
राव ने कहा कि अफगानिस्तान में जारी कार्यों को हम कम नहीं करेंगे। हम वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठा रहे हैं।
भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते को दोनों देशों के संबंधों के इतिहास में एक मील का पत्थर बताते हुए राव ने कहा कि समझौते को लागू करने की प्रक्रिया 'सुचारू और संतोषजनक ढंग' से आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि दोनों सरकारों के नजदीकी सहयोग से हम समझौते को लागू करने की प्रक्रिया में हैं।
राव ने एक सवाल के जवाब में कहा कि असैन्य परमाणु जवाबदेही विधेयक को भारतीय संसद में पेश किए जाने की तैयारी है और संसद के अवकाश के बाद इसे पेश किया जाएगा।
किसी दुर्घटना की स्थिति में परमाणु संयंत्र संचालकों और उपकरण आपूर्तिकर्ताओं पर जिम्मेदारी की अधिकतम सीमा लगाने वाले 'आणविक नुकसान के लिए नागरिक दायित्व विधेयक' को सरकार सोमवार को पेश करने वाली थी लेकिन बाद में इसे वापस ले लिया गया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच हुए असैन्य परमाणु समझौते का यह एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता के लिए अमेरिकी समर्थन के बारे में राव ने कहा कि दोनों सरकारें इस बात पर सहमत हैं कि नई वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए छह दशक पुराने ढांचे की समीक्षा और सुधार की आवश्यकता है।
राव ने कहा कि जहां तक सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता के दावे का सवाल है, यह वैध है और भारत अमेरिका का समर्थन चाहता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के परमाणु हथियारविहीन दुनिया के सपने का समर्थन करते हुए राव ने कहा कि इस बात को भारतीय नेतृत्व पिछले छह दशकों से निरंतर कहता आ रहा है।
राव ने कहा कि वर्ष 2006 में भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक नए परमाणु नि:शस्त्रीकरण प्रारूप को पेश किया था।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अगले महीने परमाणु नि:शस्त्रीकरण पर ओबामा द्वारा आयोजित शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और उम्मीद है कि यह सम्मेलन इस समस्या को हल करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।








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