नई दिल्ली। क्या मायावती ने नोटों की माला पहनकर कोई अपराध किया है? क्या उनके माला पहनने पर हल्ला मचा रहीं पार्टियां सचमुच गरीबों के लिए चिंतित हैं या वे महज राजनीतिक विलाप कर रही हैं? देशभर में इसपर बहस हो रही है। समझाने की कोशिश हो रही है कि दलित की बेटी करोड़ों में खेल रही है। जनता की कमाई अपने निजी एजेंडे पर लुटा रही है। इस मुद्दे पर माया के विरोधी कुछ इस सुर में बोल रहे हैं जैसे उनका असल अपराध दलित की बेटी होना है क्योंकि इससे पहले भी नेता सिक्कों से तौले जाते रहे हैं। तो क्या सवर्णवादी राजनीति को बदलना होगा मायावती पर अपना नजरिया? यही था इस बार का मुद्दा और इसपर चर्चा के लिए मौजूद थे लखनऊ से कांग्रेस सांसद जगदंबिका पाल, समाजवादी पार्टी के नेता वीरेंद्र भाटिया और दलित चिंतक विवेक कुमार। एंकरिंग आशुतोष ने की।
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