इस्लामाबाद। पाकिस्तान के हिंदू सांसदों ने वहां के एक शीर्ष जज की टिप्पणी से खफा होकर नेशनल असेंबली का बहिष्कार किया। जज ने टिप्पणी की थी कि शायद हिंदू ही पाकिस्तान में आतंकी गतिविधियों के लिए आर्थिक मदद दे रहे हैं।
पाकिस्तानी पीपुल्स पार्टी के सांसद रमेश लाल ने ये मुद्दा नेशनल असेंबली में उठाया और कहा कि लाहौर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ख्वाजा मुहम्मद शरीफ की इस टिप्पणी से चालीस लाख पाकिस्तानी हिंदुओं को ठेस पहुंची है।
सोमवार को अफगान तालिबानी नेता से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस शरीफ ने एक वकील से बहस करते हुए कहा कि पाकिस्तान में लगातार हो रहे हमलों के पीछे अमेरिकी सिक्योरिटी फर्म ब्लैकवाटर और हिंदुओं का हाथ है।
लाल ने कहा है कि अगर किसी व्यक्ति पर शक है तो उसका नाम सार्वजनिक किया जाए, न कि देशभक्त हिंदू समुदाय पर ही आरोप मढ़ दिया जाए। लाल ने राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी का ध्यान इस ओर खींचा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस इफ्तिखार चौधरी से अपील की कि इस मुद्दे को स्वयंसंज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया जाए।
पीपीपी के चीफ व्हिप और लेबर मिनिस्टर खुर्शीद अहमद शाह ने सफाई दी कि जज की ये टिप्पणी जानबूझ कर नहीं की गई बल्कि गलती से हो गई। उन्होंने कहा कि जज आर्थिक मदद के लिए भारतीयों को जिम्मेदार ठहरा रहे थे न कि पाकिस्तान के हिंदुओं को।
पीएमएल-एन के राशिद अकबर निवानी ने कहा कि जजों को न्यायपूर्ण बातें करनी चाहिए। वहीं पीपीपी के सांसद मुनव्वर तलपुर ने हिंदू समुदाय से माफी मांगी और कहा कि वे भी उतने ही अच्छे पाकिस्तानी हैं जितना कि कोई और। उन्होंने जज के बयान की निंदा की।
एजेसियों की जानकारी के साथ








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