नई दिल्ली। रेलमंत्री कोई भी हो सभी दावा करते रहे हैं कि रेलवे का निजीकरण किसी कीमत पर नहीं होगा, लेकिन ये सच नहीं है। ममता बनर्जी ने तो रेलवे की कोर एक्टिविटी यानी माल की ढुलाई तक के लिए निजी क्षेत्र को खुला न्योता दे दिया है।
दरअसल सभी को पता है कि रेलवे को सबसे ज्यादा आय माल की ढुलाई से होती है। इसी माल ढुलाई पर निजी क्षेत्र की नजर लगी हुई थी और ममता ने उन्हें अपने इस रेल बजट ये तोहफा दे दिया।
बजट में साफ किया गया है कि रेलवे एक विशेष माल डिब्बा निवेश योजना शुरू करेगी। इससे लोहा, कोयला और सीमेंट की ढुलाई की जा सकेगी। इसके अलावा वनस्पति तेल, शीरा, रसायनों, पेट्रोकेमिकल्स और सीमेंट जैसे थोक यातायात के लिए विशेष मालगाड़ी चलाने के लिए निजी आपरेटरों को अनुमति दी जाएगी।
ममता के दावों की पोल खोलने के लिए रेल बजट के पेज 18 पर दर्ज ये योजनाएं काफी है। रेलवे की कोर एक्टिविटी यानी माल ढुलाई को निजी ऑपरेटरों के लिए क्यों खोला जा रहा है। इसका रेलवे के पास कोई जवाब नहीं है।
रेल राज्यमंत्री भले ही इसकी जानकारी होने से इनकार करें। लेकिन सच ये है कि जिस बजट को संसद ने पास किया है उससे अब जल्दी ही माल ढुलाई भी निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया जाएगा।
रेलवे की आमदनी पर पड़ेगा असर
बहरहाल माल की ढुलाई में निजीक्षेत्र को न्योता देने से रेलवे की आमदनी पर असर पड़ना तय है। कहा जा रहा है कि प्राईवेट ऑपरेटरों से रेलवे को सिर्फ लाइसेंस फीस और लीज चार्जेस ही मिलेगा, जबकि रेलवे को इन बोगियों के मेंटीनेंस से लेकर इंजन, स्टॉफ सब कुछ उपलब्ध कराना होगा।
जल्दबाजी में ये मामला बजट में शामिल तो कर लिया गया है, लेकिन इसका पूरा ब्यौरा अभी तैयार नहीं किया गया है।
कहा गया है कि इस पूरे मामले में एक विस्तृत नीति बाद में जारी की जाएगी। इसके जारी होने पर ये साफ हो जाएगा कि इन ऑपरेटरों पर रेलवे कितना मेहरबान है।








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