शिकागो। अमेरिकी नागरिक डेविड कोलमैन हेडली ने मान लिया है कि वो मुंबई हमले में शामिल था। उसने लश्कर ए तैयबा के साथ मिलकर हमले की साजिश रची। हेडली ने अमेरिकी सरकार के साथ किए गए करार में अपने खिलाफ लगे सारे आरोपों को कबूल कर लिया है। इसके बदले में वहां के अटॉर्नी जनरल ने भरोसा दिलाया कि अब उसे फांसी की सजा नहीं दी जाएगी, इतना ही नहीं उसे भारत भी नहीं भेजा जाएगा।
अमेरिकी जांच अधिकारियों के साथ किए गए करार के मुताबिक हेडली के पिछले सहयोग और भविष्य में उससे मिलने वाले सहयोग को देखते हुए और बाकी के सारे कारणों पर विचार करते हुए युनाइटेड स्टेट्स के एटॉर्नी जनरल ने शिकागो के एटॉर्नी को हेडली के खिलाफ मौत की सजा न देने के लिए अधिकृत किया है।
हेडली के साथ किए गए इस करार में ये भी लिखा है कि अगर हेडली इस करार से मुकरा या फिर कभी अपने बयान से पलटा तो फिर सरकार उसकी मौत की सजा के लिए भी अपील कर सकती है। हेडली ने गुरुवार को शिकागो की एक अदालत में पैंतीस पन्ने का एक एफिडेविड भी दाखिल किया। इसमें उसने अपने खिलाफ लगे सभी बारह आरोपों को मान लिया है। हेडली ने ये भी माना कि मुंबई हमले और फिर डेनमार्क के एक अखबार पर हमले की साजिश रचने में वो शामिल था।
हेडली ने स्वीकार कर लिया कि उसने पाकिस्तान में लश्कर ए तैयबा के प्रशिक्षिण शिविरों में 2002 से 2005 के बीच पांच बार भाग लिया। इसके अलावा वो रेकी के लिए पांच बार भारत भी आया था। अदालत में आधे घंटे की सुनवाई के दौरान एटॉर्नी जनरल एरिक होल्डर ने माना कि हेडली जांच में काफी मदद कर रहा है।
हेडली के इस खुलासे के साथ ही एक बार फिर आंतकी गतिविधियों को लेकर पाकिस्तान की पोल खुल चुकी है। लेकिन हैरान करने वाली खबर ये है कि गुनाह कबूलने के बाद अब हेडली को भारत को नहीं सौंपा जाएगा बल्कि करार के मुताबिक विदेश में चल रही किसी भी न्यायिक प्रक्रिया में अमेरिकी में रहते हुए ही वो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मदद करेगा।
कबूलनामे से सामने आया मुंबई हमले का पूरा सच
नई दिल्ली। हेडली के कबूलनामे के साथ ही शिकागो कोर्ट में मुंबई हमले का पूरा सच सामने आ गया। हेडली ने अपने खिलाफ दायर चार्जशीट पर पूरी तरह से हामी भर दी है। इस चार्जशीट के मुताबिक मुंबई हमले की साजिश तीन साल पहले 2005 में ही रच ली गई थी। इस काम में हेडली को तहव्वुर राणा का भी साथ मिला। चार्जशीट के मुताबिक लश्कर आकाओं ने साल 2005 के आखिर में हेडली और उसके एक साथी को कहा था उन्हें भारत जाकर उन ठिकानों की तलाश करनी है जहां बड़ा हमला किया जा सके।
पिछले साल अक्टूबर में गिरफ्तार किए गए अमेरिकी नागरिक हेडली पर एफबीआई ने मुंबई हमले की साजिश में शामिल रहने का भी आरोप लगाया था। हेडली के स्कूल के दिनों के साथी तहव्वुर राणा पर भी यही आरोप लगाए गए थे। चार्जशीट में खुलासा किया गया कि लश्कर आकाओं से भारत जाने का आदेश मिलने के बाद हेडली ने 15 फरवरी 2006 को अपना नाम बदल लिया। मकसद ये कि जब हेडली बदले हुए नाम के साथ भारत पहुंचे तो इस अमेरिकी नागरिक को ना तो पाकिस्तानी माना जाए और ना ही मुस्लिम।
मार्च 2006 में पाकिस्तान में बैठै लश्कर आका और हेडली के दोस्त ने मिलकर ये फॉर्मूला निकाला कि भारत में अपनी हरकतों को छिपाने के लिए मुंबई में एक इमिग्रेशन ऑफिस खोला जा सकता है। इस काम में मदद के लिए हेडली ने राणा से संपर्क साधा। चार्जशीट के मुताबिक जून 2006 में हेडली अपने दोस्त तहव्वुर राणा से मिलने खुद शिकागो गया। राणा से मुलाकात के दौरान हेडली ने भारत में उन ठिकानों के बारे में जानकारी मांगी जहां पर हमला किया जा सकता है। साथ ही हेडली ने राणा को इस बात के लिए तैयार कर लिया कि वो फर्स्ट वर्ल्ड इमिग्रेशन सर्विस नाम की अपनी कंपनी की एक ब्रांच मुंबई में भी खोले।
सरकारी वकीलों के मुताबिक हेडली से डील होने के बाद राणा ने अपने दफ्तर के एक कर्मचारी को तमाम फर्जी कागजात बनाने को कहा। इन फर्जी दस्तावेजों की मदद से मुंबई में इमिग्रेशन ऑफिस खोलने की प्लानिंग आगे बढ़ाई गई। सारा काम हो जाने के बाद राणा ने हेडली को मुंबई जाने के लिए हरी झंडी दिखा दी। ये भी कहा कि अब तुम भारत के लिए वीजा ले सकते हो।
अपनी वीजा एप्लीकेशन में हेडली ने अपना असली नाम, अपने पिता का नाम और भारत आने का मकसद सभी कुछ गलत जानकारियों से भर दिया। शिकागो कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में ये भी खुलासा किया गया है कि जुलाई 2006 में पाकिस्तान में बैठे लश्कर आका ने हेडली को मुंबई में दफ्तर खोलने के लिए 25 हजार अमेरिकी डॉलर दिए। साथ ही ये निर्देश भी कि अब लश्कर का काम पूरा करो। लश्कर से 25 हजार डॉलर मिलने के बाद हेडली ने कुल पांच बार मुंबई का दौरा किया। सितंबर 2006, फरवरी और सितंबर 2007, अप्रैल और जुलाई 2008।
इन पांच दौरों में हेडली ने हर उस ठिकाने की फोटो खींची, उसका वीडियो टेप बनाया जहां हमला किया जा सकता था। मुंबई में अपने दफ्तर का इस्तेमाल करते हुए हेडली बड़ी आसानी के साथ हर उस जगह गया जहां 26 नवंबर को हमला हुआ।
अमेरिकी जांच एजेंसी के मुताबिक जुलाई 2008 में हेडली के भारत आने से पहले लश्कर आका ने उसे 1500 अमेरिकी डॉलर और दिए। मकसद ये कि मुंबई में अपना दफ्तर बंद करने के बाद वो दिल्ली में नया ऑफिस खोल सके। लश्कर आका ने हेडली से साफ कहा कि आने वाले दिनों में दिल्ली में ऐसे ही काम को अंजाम देना होगा। लेकिन इस काम के पूरा होने से पहले ही वो पकड़ा गया।
हेडली के डबल एजेंट होने का शक हुआ पुख्ता
नई दिल्ली। एक करार के तहत जिस तरह से हेडली ने अपने गुनाह कबूले और फिर उसे रियायत दी गई उससे इस पूरे मामले पर सवाल खड़े हो गए हैं कि कहीं हेडली एफबीआई का डबल एजेंट तो नहीं। ये भी सवाल उठ रहा है कि आखिर मुंबई हमले की जानकारी एफबीआई को पहले से क्यों थी। कहीं ये किसी बड़ी साजिश का तो हिस्सा नहीं।
अमेरिकी फिल्मों का हिट फॉर्मूला है डबल एजेंट। एक ऐसा शख्स जो रहता तो आतंकियों के साथ है लेकिन काम सीआईए के लिए करता है। हेडली के कबूलनामे के बाद ये हिट फॉर्मूला अब भारत सरकार को भी समझ आने लगा है। वजह है मुंबई हमले का गुनहगार डेविड कोलमैन हेडली। हेडली ने जिस तरह से शिकागो कोर्ट में अपने बयान को बदलते हुए गुनाह को कबूल लिया और फिर उसे रियायत दी गई उससे हेडली के एफबीआई का डबल एजेंट होने का शक और पुख्ता हो गया है।
गुनाह कबूलने का मतलब है कि अब उसे मौत की सजा नहीं मिलेगी। सितंबर-2008 में अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई ने भारतीय खुफिया एजेंसियों को एक खबर दी। इस खबर के मुताबिक पाकिस्तान में बैठे लश्कर के आका मुंबई में एक बड़े हमले की तैयारी कर रहे हैं। एफबीआई ने ये तक बता दिया कि ये हमला ताज होटल पर होने वाला है। आखिर कैसे जानती थी ये एफबीआई?
क्या एफबीआई को ये सब हेडली ने बताया था? क्या हेडली ने एफबीआई को लश्कर के पूरे मिशन मुंबई का ब्यौरा दिया था? और अगर एफबीआई के पास लश्कर के मिशन मुंबई का पूरा ब्यौरा था तो उसने पूरी जानकारी भारत के साथ क्यों नहीं बांटी। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक हेडली ने एफबीआई से एक खास समझौता कर लिया है।
समझौते की शर्त ये कि हेडली मुख्य आरोपी राणा के बारे में सारे सबूत मुहैया कराएगा यानि राणा को सजा दिलवाकर एफबीआई हेडली को साफ बचा ले जाएगी। यही भारत सरकार की भी चिंता है क्योंकि गुनाह कबूल लेने के बाद अब हेडली को मौत की सजा नहीं मिलेगी। इसके साथ ही भारत या अन्य किसी भी देश में उसका प्रत्यर्पण नहीं किया जाएगा। ऐसे में भारत सरकार को खास रणनीति बनाने की जरूरत है।
हेडली के प्रत्यर्पण की कोशिशें जारी रहेंगीः चिदंबरम
नई दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री चिदंबरम का कहना है कि हेडली के खिलाफ जो आरोप थे वो उसने कबूल लिए हैं। जहां तक उससे पूछताछ का सवाल है तो अमेरिकी कानून के मुताबिक भारत को पूछताछ की इजाजत मिलने की संभावनाएं बनी हुई हैं। चिदंबरम ने कहा कि हेडली के प्रत्यर्पण की कोशिशें जारी रहेंगी।
चिदंबरम ने कहा कि अमेरिका में उम्रकैद का मतलब पूरी उम्र जेल में गुजारना होता है। इसलिए हम उसे फांसी न मिलने से निराश नहीं हैं। अभी हमें धीरज रखना होगा और हेडली के खिलाफ कार्यवाही पूरी होने का इंतजार करना होगा। चिदंबरम ने कहा कि हेडली प्रकरण का कसाब के खिलाफ चल रही कानूनी कार्यवाही पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
गृह सचिव जी. के. पिल्लई ने भी कहा कि मुंबई आतंकवादी हमले के मुख्य साजिशकर्ता डेविड कोलमैन हेडली को यदि उम्र कैद की सजा मिलती है तो भारत इससे असंतुष्ट नहीं होगा।
पिल्लई ने कहा कि हेडली ने आतंकवाद से जुड़े सभी 12 आरोपों में अपना गुनाह स्वीकार कर लिया है। एक तरह से यह अच्छा है। भारत को हेडली से पूछताछ की अनुमति मिलने की संभावना पर उन्होंने कहा कि इस सिलसिले में भारत को अमेरिकी एजेंसियों के चर्चा करनी चाहिए।
हेडली प्रकरण ने खोली सरकार की नींद
नई दिल्ली। आतंकी डेविड हेडली ने इमिग्रेशन ऑफिस खोलने के बहाने पूरे सिस्टम का दुरुपयोग किया। ऐसे में सरकार अब इससे सबक लेते हुए वीजा और इमिग्रेशन सिस्टम का पूरा ढांचा बदलने की तैयारी में है। मिशन मोड नाम की ये कवायद चार साल में पूरी होगी। सरकार को उम्मीद है कि ये सिस्टम लागू होने के बाद कोई विदेशी सुरक्षा एजेंसियों की आंख में धूल नहीं झोंक पाएगा।
अब न केवल देश के भीतर बल्कि दुनिया भर में फैले इंडियन मिशन भारत में आने वाले हर विदेशी पर नजर रखेंगे। मिशन मोड की कुल लागत करीब एक हजार करोड़ है। ये पूरा प्रोजेक्ट अप्रैल 2010 से सितंबर 2014 के बीच कई चरणों में पूरा किया जाएगा। मिशन मोड के तहत 169 इंडियन मिशन, 77 इमिग्रेशन चेक पोस्ट, देश भर में फैले फॉरनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन आफिस को आपस में जोड़ा जाएगा। इन सबकी कमान सेन्ट्रल फॉरनर्स ब्यूरो यानी सीएफबी के पास होगी।
मिशन मोड के जरिए सैलानियों और संदिग्ध विदेशियों में फर्क करना आसान होगा। सुरक्षा मामलों के रणनीतिकार मानते हैं कि वीजा सिस्टम की चूक के चलते ही हैडली जैसा आतंकी भारत में टूरिस्ट बनकर बेरोकटोक घूमता रहा। मुंबई हमलों की साजिश में शामिल रहा हेडली उसके बाद में भी कई बार भारत आया। उसके आतंकी होने का पता तब चला जब अमेरिकी एजेंसियों ने खुद इसका खुलासा किया।
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