नोएडा। इस देश की सबसे शर्मनाक सच्चाई हैं यहां की तालिबानी पंचायतें। वो पंचायतें जो लोगों की सांसों पर भी पहरा बिठा देती हैं।
ग्रेटर नोएडा में पंचायत के हुक्म के बाद एक शादीशुदा जोड़ा छिप छिपकर जिंदगी बिता रहा है। घरवालों की इजाजत के बिना शादी करने पर पंचायत ने उनकी आंखें फोड़ने का फरमान सुना दिया।
शाइस्ता की आंखों में डर समाया हुआ है। ये लड़की इस देश की एक तालिबानी पंचायत की शिकार है। हर वक्त एक ही ख्याल रहता है अगर पंचायत के हत्थे चढ़ गए तो इनकी खैर नहीं।
ग्रेटर नोएडा के घोड़ी-बछेड़ा गांव की रहने वाली शाइस्ता को प्यार करने की सजा सुनाई गई है। घरवालों के इनकार के बावजूद शादी करने की सजा सुनाई गई है। सजा ये कि शाइस्ता और इसके पति जावेद की आंखें फोड़ दी जाएं। इन्हें चौराहे पर खड़ा करके गोली मार दी जाए। शर्मनाक बात ये है कि अपने ही गांववालों से जान बचाकर ये दोनों मारे मारे फिर रहे हैं।
शाइस्ता और जावेद एक ही गांव के रहने वाले हैं। घर की चारदीवारी में घुटती तलाकशुदा शाइस्ता को जावेद ने सहारा दिया। उसकी जिंदगी संवारने के लिए अपना हाथ बढ़ाया। पिछले महीने की 13 तारीख को दोनों ने घर से भागकर शादी कर ली। धार्मिक रीति रिवाज के अलावा इन्होंने कोर्ट में भी शादी की। यानी कानून ने भी इनकी शादी को मान्यता दे दी लेकिन तालिबानी पंचायत इस देश के कानून को नहीं मानती।
एक तलाकशुदा लड़की के दोबारा शादी करने का फैसला उनके गले नहीं उतरा। उसने फरमान सुनाया कि लड़का-लड़की जहां मिलें उनकी आंखें निकाल ली जाएं।
घरवालों की मर्जी के खिलाफ शादी करने वालों से ऐसी पंचायतें किस तरह पेश आती हैं ये किसी से छुपा नहीं है। जावेद और शाइस्ता के लिए अपने ही घर के दरवाजे बंद हो चुके हैं वो चाहकर भी गांव नहीं लौट सकते। पूरा गांव ही अब उनका दुश्मन बन बैठा है। समाज के ठेकेदार इनकी जान लेकर भी अपनी झूठी शान-मान-मर्यादा को जिंदा रखेंगे। इस खतरे को देखते हुए पुलिस ने दोनों को सुरक्षा मुहैया कराने का फैसला किया है।
पुलिस के लाख भरोसे के बाद भी शाइस्ता और जावेद गांव लौटने का जोखिम नहीं उठाना चाहते।
ऐसे में सवाल ये है कि अगर लड़का-लड़की को कुछ हो गया तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। क्या ऐसी तालिबानी पंचायत इस देश के कानून से ऊपर है। क्या ऐसी पंचायतों को खत्म नहीं कर दिया जाना चाहिए। क्या पंचायत में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
ग्रेटर नोएडा के घोड़ी बछेड़ा गांव में इन दिनों हर किसी की जुबान पर सिर्फ शाइस्ता और जावेद का ही नाम है । लेकिन इनकी मदद के लिए कोई हाथ नहीं बढ़ा रहा। वजह साफ है अगर किसी ने कोशिश भी को तो पंतायत उसे भी नहीं बख्शेगी।
पंचायत ने कैसे कैसे किया परिवार को परेशान
ग्रेटर नोएडा की पंचायत भी उस जमात में शामिल है जिसकी इजाजत के बगैर जीना मुश्किल है। अपनी मर्जी से शादी करने वाले बालिग लड़का-लड़की को परेशान करने के लिए पंचायत किसी भी हद तक जा सकती है। देखिए एक परिवार को परेशान करने के लिए इस तालिबानी पंचायत ने क्या-क्या किया।
इस देश का कौन सा कानून लड़का-लड़की की आंखें फोड़ने की सजा दे सकता है। कौन सा कानून प्यार करने वालों को चौराहे पर खड़ा करके गोली मारने को कहता है।
ऐसा तो तालिबान करते हैं। लेकिन इस देश में भी कई ऐसी पंचायतें हैं जो ये भयानक फरमान सुनाती हैं। शाइस्ता और जावेद के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। घर से भागकर शादी करना इतना महंगा पड़ेगा ये इन्होंने सोचा भी नहीं था। अब इन्हें अपने ही गांव में कदम रखने की इजाजत नहीं है। पंचायत के फरमान के बाद गांव में तानव का माहौल है। पुलिस और पीएसी दिन रात गश्त कर रही है क्योंकि पंचायत ने लड़का लड़की को जान से मारने की धमकी दी है।
ये सारा मामला पिछले महीने जावेद और शाइस्ता की शादी के बाद शुरू हुआ। जावेद अपने मामा मेहंदी हसन के पास रहता था। शाइस्ता के घरवालों ने दादरी थाने में शिकायत दर्ज कराई कि उनकी लड़की गायब है। पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों ने शादी कर ली है। जैसे ही ये खबर पंचायत तक पहुंची बवाल मच गया।
पंच ठेकेदार बन गए और लड़के के मामा को धमकी दी कि अगर लड़का लड़की को जल्द से जल्द पेश नहीं किया गया तो इसका अंजाम बहुत बुरा होगा।
आरोप है कि इस फरमान के दो दिन बाद लड़के के मामा खाली हाथ लौटे तो गांववालों ने उनपर पथराव कर दिया। जावेद के मामा की शिकायत पर दादरी थाने में 17 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। जब तालिबानी पंचायत ने देखा कि मामला ज्यादा तूल पकड़ गया है तो उसने आंखें फोड़ने के फरमान जैसे सारे आरोप नकारने शुरू कर दिए। अब गर्दन बचाने के लिए कहा जा रहा है लड़के ने पंचायत पर झूठे आरोप लगाए हैं।
पंचायत का कहना है कि उसने ऐसा कोई फरमान नहीं सुनाया है। वो सिर्फ लड़की को उसके घरवालों के सुपुर्द किए जाने की मांग कर रहे हैं। सवाल ये है कि जब दोनों मर्जी से शादी कर चुके हैं तो फिर लड़की अपने घर क्यों जाए। आखिर क्यों इन प्रेमियों को मुंह छिपाकर जीना पड़ रहा है। इस देश का कानून और संविधान इन्हें प्यार करने और आजादी से जीने का अधिकार जब पहले ही दे चुका है तो फिर पंचायत इसमें दखल देने वाली होती कौन है।
पहले भी कई हो चुके हैं पंचायत के फरमान का शिकार
पंचायत के तालिबानी फरमान का शिकार सिर्फ ग्रेटर नोएडा के शाइस्ता और जावेद ही नहीं हुए हैं।
- हरियाणा में रोहतक के खेड़ी गांव में लड़का लड़की को एक ही गोत्र में शादी करने के खिलाफ पंचायत ने अजीबोगरीब फरमान सुनाया। पंचायत ने हुक्म दिया कि दोनों का रिश्ता खत्म किया जाता है। इन दोनों की शादी तीन साल पहले हुई थी और उन्हें एक बच्चा भी है।
लेकिन पंचायत ने शादीशुदा जोड़े को भाई बहन बना दिया। पंचायत ने ये भी तय कर दिया कि कोई भी गांववाला लड़का लड़की के परिवार के साथ न रहे।
- हरियाणा में ही पंचायत ने एक ही गोत्र के लड़का लड़की को शादी करने के लिए उन्हें गांव से बेदखल कर दिया। भिवानी जिले के समसपुर गांव की खाप पंचायत ने पूरे परिवार को 2 मार्च से पहले गांव छोड़ने का फरमान सुना दिया।
पंचायत के मुताबिक समसपुर और मकरानी गांव के लड़का लड़की रिश्ते से भाई बहन हुए इसलिए ये शादी गैरकानूनी है।
- यूपी में बदायूं जिले के एक गांव की पंचायत ने लड़का लड़की को एक दूसरे को जूते से मारने के लिए मजबूर किया। वजह इतनी सी थी को दोनों एक पार्क में साथ बैठे पाए गए।
पंचायत को दोनों की नजदीकी नागवार गुजरी और हुक्म दिया कि दोनों अपने ही जूते चप्पलों से एक दूसरे की पिटाई करें।








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