नई दिल्ली। गरीब परिवारों को सस्ती दरों पर राशन उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने कमर कस ली है। इस मुद्दे पर बनाए गए मंत्रियों के समूह ने नेशनल फूड सिक्योरिटी बिल को मंजूरी दे दी है।
यूपीए सरकार आम आदमी को लुभाने की खातिर एक बार फिर से बड़ा दांव चलने की तैयारी कर रही है। सरकार ने इस बार गरीबों के निवाले को टार्गेट किया है। गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों को बेहद ही सस्ती दरों पर अनाज उपलब्ध कराने की योजना को अमली जामा पहनाया जा रहा है।
इस बिल के तहत केंद्र हर राज्य में गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों की संख्या के आंकड़े तय करेगा। राशन उपलब्ध कराना केंद्र की जिम्मेदारी होगी, उसे जरूरतमंदों तक पहुंचाना राज्य की।
इस बिल के तहत गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले हर परिवार को हर माह 25 किलो राशन अनिवार्य रूप से मुहैया कराया जाएगा। इसकी कीमत 3 रुपया प्रति किलो से अधिक नहीं होगी।
गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों के आंकड़े योजना आयोग के तय किए होंगे। राज्य योजना के सही क्रियान्वयन की खातिर विजिलेंस कमेटी बनाएंगे। मगर इस बिल में सबसे बड़ी चिंता की बात गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले परिवारों की पहचान होगी।








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