नई दिल्ली। महंगाई लपलपाती आग की तरह घर का बजट जला रही है। देश की आधी आबादी भूखी है और सरकार की लापरवाही से लाखों टन अनाज सड़ रहा है। हो-हल्ले के बीच महंगाई के महंत पैदा हो गए हैं, जो सिर्फ बैठ कर तमाशा देख रहे हैं।
महंगाई महंत -
कृषि मंत्री - शरद पवार
सरकारी बोरों में सड़ रहा अनाज, उस बेफिक्री का सबूत है जिसने करीब 1 करोड़ लोगों के मुंह से करीब पौने आठ साल तक का निवाला छीन लिया। सच यही है - एक ओर देश की सवा अरब आबादी महंगाई से त्राहि-त्राहि कर रही है औऱ दूसरी ओऱ सरकार को फिक्र तक नहीं है कि करोड़ों किलो गेहूं यूं ही सड़ जा रहा है। इससे भला तो होता कि मुफ्त में ये अनाज गरीबों में बांट दिया जाता। सरकार को वाहवाही मिलती और गरीबों का पेट भरता लेकिन ऐसा न हुआ।
करीब 72 लाख मीट्रिक टन यानि 720 करोड़ किलो गेहूं सड़ गया, कीड़े पड़ गए। इंसान क्या जानवर के खाने लायक तक नहीं बचा। हर इंसान रोज करीब 250 ग्राम गेहूं खाता है,हिसाब किताब लगाया जाए तो 1 करोड़ मजदूरों का करीब पौने आठ साल तक का खाना कीड़े चट कर गए।
ये अंधेरगर्दी पंजाब का फतेहगढ़ जिले में हुई है। गेहूं की बोरियों का पहाड़, जिस देश में आज भी भूख से लोगों के मरने की खबरें आती हैं, वहां सरकार कीड़ों की भूख मिटाना ज्यादा जरूरी समझती है।
मालूम हो कि साल 2008 में काटे गए इस गेहूं को केंद्र ने पंजाब से खरीदा था लेकिन हजारों-करोड़ रुपए खर्च कर खरीदे गए गेहूं को केंद्र सरकार ने यहीं छोड़ दिया।
और सड़ते रहे गेहूं
मालूम हो कि पंजाब में इस वक़्त 72 लाख मीट्रिक टन गेहूं पड़ा है जिसे केंद्र के लिए खरीदा गया, इसमें से 68 लाख मीट्रिक टन पंजाब सरकार से केंद्र ने खरीदा, जबकि 4 लाख टन फ़ूड कॉरेपोरेशन ऑफ़ इंडिया ने खरीदा। इसमें से 80 फीसदी गेहूं खुले में पड़ा हैं जो वक़्त और मौसम के साथ खराब हो रहा है। चिंता की बात ये है कि अभी पुराना गेहूं उठा नहीं कि रबी की नयी फसल तैयार है। नयी फसल आते ही पंजाब में गेहूं समेत अनाज की मात्रा बढ़ कर 251 लाख मीट्रिक टन हो जाएगी।
जबकि पंजाब में इस वक़्त सिर्फ 181 लाख मीट्रिक टन अनाज रखने की ही क्षमता है। इसमें गेहूं और चावल दोनों शामिल हैं। यानी आने वाले दिनों में लगभग 70 लाख मीट्रिक अनाज रखने की जगह नहीं होगी। क्या होगा उस अनाज का।
पंजाब सरकार की तो यहां तक सलाह है कि इस अनाज को खराब होने की लिए छोड़ने की बजाए इसे गरीबों में मुफ्त बांट देना चाहिए।
एक क्विंटल गेहूं की कीमत 1000 रूपये से ज्यादा है। अब अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि हर साल सिर्फ पंजाब में ही 1000 करोड़ रूपये से ज्यादा का अनाज खराब हो जाता है।
पंजाब में गेहूं की बम्पर फसल तैयार है लेकिन सवाल यह है कि यह फसल जाएगी कहां? जब दो साल पुरानी गेहूं आज भी यहीं पडी है और खराब हो रही है ! पवार साहेब अब तो जागिये देश बहर में लोग भूख से मर रहे है और यह खराब हो रहा अनाज करोड़ों लोगों का पेट भर सकता है।
लेकिन महंगाई महंत यानि हमारे कृषि मंत्री के पास हर बार की तरह इस बार भी बहाना है करोड़ों भूखे मुंह का निवाला बर्बाद करने की जिम्मेदारी वो उलटा पंजाब सरकार पर थोप रहे हैं। कृषि मंत्री होते हुए भंडारों की कमी का रोना रो रहे हैं।
पवार एक नाम अनेक
शरद पवार देश के कृषि मंत्री हैंल लेकिन जब से महंगाई बेकाबू हुई है उन्हें तरह-तरह के नाम दिए जाने लगे हैं। इन दिनों जिस तरह से वो बयान पर बयान दिए जा रहे हैं और उन बयानों के बाद जिस तरह महंगाई बढ़ जाती है उससे उन्हें बयान मंत्री भी कहा जाने लगा है। लेकिन हैरत की बात ये है कि अब ताजे बयान में वो ये कह रहे हैं कि महंगाई के मुद्दे पर राज्य सरकारों ने उन्हें गुमराह किया। यानी अब वो गुमराह मंत्री भी बन गए हैं।
देश के कृषि मंत्री शरद पवार खुद को किसान कहने वाले शरद पवार कभी किसान कभी मंत्री कभी क्रिकेट प्रेमी तो कभी क्रिकेट प्रशासक। पवार एक चेहरे अनेक। लेकिन पवार से लोगों की जो उम्मीद है केवल वही नहीं हैं पवार। जब जनता पूछती है कि महंगाई कब होगी कम, तो पवार कहते हैं उन्हें नहीं मालूम। जब पवार से पूछा जाता है कि कब होंगे खाने-पीने की चीजों के दाम कम तो जवाब मिलता है वो ज्योतिषी नहीं।
देश में खेती की हालत सुधरे और देशवाले भूखे पेट नहीं सोएं ये जिम्मेदारी पवार पर है। अगर फसल की पैदावार में कमी आती है तो उसका सीधा असर खाने-पीने की चीजों पर पड़ता है। देश में जरूरत के हिसाब से अनाज हों जरूरत के हिसाब से आयात-निर्यात में संतुलन हो, ये जिम्मदारी भी पवार की है लेकिन जब इसमें गड़बड़ी होती है तो इसका सीदा असर खाने-पीने की चीजों पर पड़ता है और जब पवार से पूछा जाता है कब कम होगी महंगाई तो वो कहते हैं, मैं अर्थशास्त्री नहीं।
अब देश चलाने वाले मंत्री जी का एक और चेहरे से हम आपको रूबरू कराते हैं। बेतहाशा बढ़ी चीनी की कीमत पर देशभर में खूब हंगामा हुआ। 20 रुपये किलो बिकने वाली चीनी जब 50 रुपये में बिकने लगी तो कृषि मंत्री की खूब किरकिरी हुई। तब मंत्री जी ने जमाखोरों को महंगाई का जिम्मेदार ठहरा दिया। लेकिन अब वही पवार कह रहे हैं उन्हें राज्य सरकारों ने गुमराह किया।
ये कैसे मंत्री हैं जो किसी से गुमराह हो जाते हैं? ये कैसे नेता हैं जिन्हें कोई झांसा दे देता है? क्या पवार राज्य सरकार और अपने अफसरों से गुमराह हो सकते हैं? अगर ऐसा है तो ये उनकी काबिलितय पर सवालिया निशान नहीं?
खुद के ज्योतिषी नहीं होने का दावा करने वाले पवार अब भविष्यवाणी भी करने लगे हैं। पवार के कई चेहरों का हमने जिक्र किया। कुछ को वो नकारते रहे तो कुछ को खुद ही करते रहे पुष्ट। अब आप खुद तय कीजिए कि पवार का असली चेहरा कौन-सा है।








कमेंट्स
3