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मार्च में निकला पसीना, पारा 40 डिग्री के पार

Posted on Mar 20, 2010 at 06:23pm IST | Updated Mar 20, 2010 at 08:24pm IST

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नई दिल्ली। गर्मी ने अभी से पूरे देश में पैर पसार लिए हैं। मार्च के ही महीने में पारा 40 पार हो गया है तो मई और जून में क्या होगा। ये आने वाले दिनों के लिए बहुत खतरनाक संकेत हैं। अगर गर्मी की शुरुआत में ही महाराष्ट्र के जलगांव में पारा 43 डिग्री तक पहुंच चुका है।

महाराष्ट्र के जलगांव में दोपहर के वक्त सड़कों पर कर्फ्यू जैसा सन्नाटा पसरा है। लोग घरों में बंद हैं और शहर का मेन बाजार वीरान। सुबह से ही सूरज ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। पश्चिमी महाराष्ट्र के इस इलाके में पिछले 5 दिन से पारा 43 डिग्री से ऊपर जा चुका है।

जाहिर है अगर गर्मी बढ़ी तो फसलें भी खराब हो जाएंगी। क्योंकि जब पीने के लिए ही पानी नहीं मिलेगा तो सिंचाई के लिए कहां से लाएंगे। मौसम के कहर का शिकार अकेला जलगांव नहीं। महाराष्ट्र की राजधानी समेत तकरीबन सभी शहरों में तापमान बढ़ना शुरू हो गया है।




नासिक, जलगांव, धुले और नंदुबार में दिन का तापमान 41 से 43 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया है। जबकि बाकी इलाकों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री से ज़्यादा हो चुका है। मौसम के जानकार साफतौर पर इस खतरे की वजह ग्लोबल वॉर्मिंग को बता रहे हैं।

मार्च में जून के नजारे दिखना अच्छे संकेत नहीं माने जा सकते। हालत ये है कि अभी बीच मार्च में ही लोग जब घरों से निकलते हैं तो धूप से बचने के लिए पूरी तैयारी कर लेते हैं। गला तर करने के लिए गन्ने के रस का सहारा ले रहे हैं। जलगांव अब जल का गांव नहीं, वो धूप गांव में तब्दील हो रहा है।

जलगांव को देश की बनाना कैपिटल कहा जाता है। इसके अलावा महाराष्ट्र का ये शहर दुनिया का सबसे बड़ा दाल मिलिंग सेंटर भी है। मौसम में इतनी उठापटक चलती रही तो क्या ये शहर अपना उत्पादन कायम रख सकेगा। ऐसे में आम जलगांव निवासी का क्या हाल होगा कहना मुश्किल है।

ग्लोबल वॉर्मिंग इंसान के अस्तित्व के लिए खतरा

ग्लोबल वॉर्मिंग इंसान के अस्तित्व के लिए ही खतरा बन गई है। मौसम वैज्ञानिकों ने तो आने वाले दिनों में तापमान के 50 डिग्री तक पहुंचने की आशंका जाहिर कर दी है। पिछले 10 सालों में मार्च के महीने में इतनी भयानक गर्मी नहीं पड़ी।

मार्च का महीना और लू से जूझता समूचा गुजरात, मारे गर्मी के लोगों का घरों से निकलना मुश्किल है। पिछले 10 सालों के दौरान मार्च महीने में इतनी भयानक गर्मी नहीं पड़ी। मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ेगी। एक एंटी सयकलोनिंग सर्क्युलेशन खड़ा हुआ है जिस के चलते हिट वेव बढा है।

गुजरात के कई शहरों में तापमान अभी से 40 पार जा चुका है।

इडर- 43.9

डीसा- 43.8

वड़ोदरा- 43.1

राजकोट -43

भुज- 43

सूरत 42.9

अहमदाबाद 41.7

और नलिया में तापमान 42 डिग्री तक जा पहुंचा है।

अहमदाबाद में गर्मी बढ़ने से एसी, रेफ्रिजरेटर और पंखे की बिक्री में काफी इजाफा हो रहा है। सड़कों में लोग गर्मी से निजात पाने के लिए कोल्ड ड्रिंक्स, नारियल पानी और शरबत का सहारा लेते दिखाई पड़ रहे हैं। चिलचिलाती धूप ने पिछले कई सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।

अब लोग ये सोचकर परेशान हैं गर्मी की शुरुआत में ये हाल हैं, तो मई और जून में क्या अंजाम होगा। दोपहर में गुजरात की सड़कों पर निकलना यानी अग्नि पथ पर चलना। मौसम विभाग की मानें तो आनेवाले चार से पांच दिनों तक हीट वेव जारी रहेगा ऐसे मैं गर्मी से फिलहाल तो कोई रहत मिलने की गुंजाइश है।

कश्मीर का तापमान 10 डिग्री बढ़ा

ग्लोबल वॉर्मिंग से होने वाला खतरा अब हमारी मुसीबत बन चुका है। लोग, तपती धूप और गर्मी से राहत पाने के लिए कश्मीर जाने की सोचते हैं। वहां की ठंडी हवा से शरीर और मन दोनों को ठंडक पहुंचती है। लेकिन धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर के कई इलाकों में तापमान पहले के मुकाबले 10 डिग्री से ज़्यादा चल रहा है।

दुनियाभर के सैलानियों की सैरगाह और मार्च के महीने में बारिश से सराबोर कश्मीर। लेकिन इस साल कश्मीर में सब कुछ बदला हुआ लगता है। बारिश के बदले चिलचिलाती धूप और गर्मी। इस साल मार्च में यहां पारा सामान्य से 10 डिग्री ऊपर हो चुका है और बारिश 60 फीसदी कम।

इस साल अभी तक कश्मीर में महज 43.9 mm बारिश रिकॉर्ड हुई है। जो आमतौर पर तकरीबन 108 मिलीमीटर होती है। बारिश न होने से तापमान लगातार बढ़ रहा है।

हालात ये हैं कि कश्मीर का किसान परेशान है क्योंकि जरूरत के बराबर पानी नहीं है। इसका सीधा असर फल उद्योग पर पड़ रहा है। जो पूरे कश्मीर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और जिससे 60 फीसदी आबादी जुड़ी है। फलों की फसल के लिए जितनी बारिश चाहिए, उसकी आधी भी इस साल नहीं हुई है।

लोग कश्मीर के बदलते मौसम से परेशान हैं। वैज्ञानिक इसकी वजह बढ़ता प्रदूषण बताते हैं। तो क्या खूबसूरती के लिए जाने जाना वाला कश्मीर अपनी रौनक खो देगा।

कश्मीर में लगातार बढ़ रहा तापमान अभी तो सिर्फ यहां के कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों को ही सता रहा है। लेकिन अगर स्थिति ऐसी ही रही तो यह बदलाव कश्मीर कर हर नागरिक के लिए चिंता का कारण बनेगा।

बढ़ते तापमान की वजह ग्लोबल वॉर्मिंग

धरती का तापमान तेजी बढ़ रहा है इसकी वजह ग्लोबल वॉर्मिंग है। वातावरण में हानिकारक गैसें इतनी ज्यादा बढ़ चुकी हैं कि वो गर्मी को बाहर नहीं जाने देतीं। इसका सबसे ज्यादा असर ग्लेशियर्स पर ही पड़ा है जो तेजी से पिघल रहे हैं। आखिर वो कौन सी वजह हैं जो ग्लोबल वॉर्मिंग के लिए जिम्मेदार हैं।

दरअसल कुदरत का ये खेल इंसानी कारनामों का असर है। ग्लोबल वॉर्मिंग के जिम्मेदार सिर्फ हम हैं और कोई नहीं। वातावरण में हो रहे इस बदलाव के पीछे ग्रीनहाउस गैसों की अहम भूमिका है। इनमें कार्बन डाई ऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड जैसी गैसें हैं। जो हमारे वातावरण में बढ़ रही हैं। ये गैसें वातावरण की गर्मी को बाहर नहीं जाने देतीं।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर ग्लोबल वार्मिंग के पीछे कौन से कारण हैं? जिसकी वजह से इतनी गैसें पैदा हो रही हैं। वैज्ञानिक की मानें तो इसके पीछे कई वजहें हैं:-

- पेट्रोलियम पदार्थों के धुएं से होने वाला प्रदूषण

- तेजी से हो रहा औद्योगिकीकरण

- जंगलों का तेजी से काटा जाना सबसे अहम वजहें हैं।

क्या होगा ग्लोबल वार्मिंग का असर?

ग्लोबर वॉर्मिंग की वजह से ही कुदरत भयानक तबाही बरपा रही है। वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चिंता इसके असर को लेकर ही है। इसकी वजह से ग्लेशियर्स पिघलने शुरू हो जाएंगे। और तूफान आने शुरू होंगे। समुद्र के किनारे के शहर का नामों निशान मिट जाएगा और उपजाऊ जमीन कम होती जाएगी यानी रेगिस्तान बढ़ेंगे।

वैज्ञानिक कहते हैं कि अगर ग्लोबल वार्मिंग में कमी लानी है तो सबसे पहले इंडस्ट्रीज में प्रदूषण रोकने के उपाय करने होंगे। वाहनों के लिए पर्यावरण मानकों का सख़्ती से पालन करना होगा और पेड़ों की कटाई रोकनी होगी। एक बात तो तय है कि जो भी हो रहा है, उसके लिए इंसान ही जिम्मेदार है। केवल वही इस मुश्किल से निजात भी दिला सकता है।


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