शिवपुरी। मध्यप्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष और मुरैना से सांसद नरेंद्र सिंह तोमर जब शिवपुरी पहुंचे तो उनके स्वागत में गोलियों की बौझार कर दी गई। प्रशासन बंदूकों की इस सलामी का सिर्फ तमाशा देखता रहा। बाद में तोमर मुरैना पहुंचे तो वहां भी उनको ऐसे ही बंदूकों से सलामी दी गई। इस फायरिंग में बीजेपी का एक कार्यकर्ता घायल हो गया।
मुरैना में मौजूद लोगों की मानें तो जिस वक्त नरेंद्र सिंह के सम्मान में गोलियां चल रही थीं उस वक्त वहां एसडीएम और डीआईजी खुद मौजूद थे। लेकिन दोनों की ही हिम्मत बीजेपी कार्यकर्ताओं को रोकने की नहीं हुई। कांग्रेस ने तोमर की अगवानी में हो रही फायरिंग को मुद्दा बना लिया है। प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी ने इस मामले में मुख्यमंत्री से कार्रवाई की मांग की है।
मीडिया में मामले का शोर मचने के बाद सरकार दबाव में आई और मामला दर्ज हुआ। मगर तोमर के खिलाफ नहीं एक अनजान से कार्यकर्ता के खिलाफ और मामले की जांच अब आईजी स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है। पुलिस ने उमाशंकर सिंह नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया है। उमाशंकर सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 336 के तहत मामला दर्ज कर उनकी बंदूक जब्त कर ली गई।
साफ है, ये कदम मीडिया पर खबर चलने के बाद दबाव में उठाया गया कदम है। इसे सरकार और प्रशासन की लीपापोती की कोशिश माना जा रहा है।
कानून की मानें तो सार्वजनिक जगहों पर किसी भी तरह की फायरिंग गैरकानूनी है। किसी को 101 बंदूकों की सलामी देना आर्म्स एक्ट का उल्लंघन है। ऐसा करने वालों के लिए कानून ने कम से कम 6 महीने की सजा का इंतजाम किया है।
वहीं बीजेपी इस पूरे प्रकरण को बयानों के जरिए ढांकने की कोशिश कर रही है। लेकिन पार्टी के अपने बयान ही तस्वीरों से मेल नहीं खा रहे। सच्चाई को जितना दबाने की कोशिश की जा रही है वो उतनी ही बेपर्दा हो रही है। हद तो ये कि सूबे की बीजेपी सरकार ने इस मामले में एक मामूली एफआईआर तक दर्ज करने की जरूरत नहीं समझी।
दरअसल नरेंद्र सिंह तोमर को गडकरी की नई टीम में राष्ट्रीय महासचिव का दर्जा दिया गया है। इसके बाद वो पहली बार अपने संसदीय क्षेत्र मुरैना जा रहे थे। मुरैना जा रहे तोमर को रास्ते में शिवपुरी जिले में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने रोककर बंदूकों की सलामी दी। कार्यकर्ताओं ने 101 बंदूकों से हवाई फायर किए।
जिन हथियारों से फायरिंग की गई उनमें से ज्यादातर अवैध हैं। लेकिन इससे क्या। जब पुलिस को इस बात की कोई चिंता नहीं तो फिर अपने नेता का दिल जीतने में भला लोग क्यों कसर छोड़ते। यही वजह है कि जब तोमर मुरैना पहुंचे तो वहां भी शिवपुरी जैसा ही दृश्य दोहराया गया और उन्हें बंदूकों से सलामी दी गई। यहां हुई फायरिंग में बीजेपी का एक कार्यकर्ता जख्मी हो गया।








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