कानपुर। मंदिरों में देवी देवताओं को खुश करने के लिए फल, फूल, माला और अगरबत्ती का चढ़ावा तो सामान्य बात है लेकिन उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक ऐसा मंदिर भी है जहां लोग अपने देवता को खुश करने के लिए सोने, चांदी और अन्य धातुओं से बने ताले चढ़ाते हैं।
लखनऊ से लगभग 80 किलोमीटर दूर कानपुर के बंगाली मोहल्ले में स्थित काली माता के मंदिर में इस तरह की अनोखी पूजा की परंपरा आज भी बदस्तूर जारी है।
काली माता के मंदिर के मुख्य पुजारी रविंद्र नाथ ने बताया, "पिछले 60 वर्षों से मंदिर में इस तरह की अनोखी परम्परा चली आ रही है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1949 में हुआ था।"
उन्होंने बताया कि मंदिर में पूजा-पाठ के लिए आने वाले श्रद्धालु सामान्यतया लोहे के ताले चढ़ाने के लिए आते हैं लेकिन विशेष मौकों खासकर नौ दिनों तक चलने वाले नवरात्र के समय यहां आने वाले श्रद्धालु सोने, चांदी और अन्य धातुओं के बने ताले चढ़ाते हैं।
प्रतिदिन औसतन लगभग 500 लोग काली माता के मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं और मूर्ति के सामने ताले चढ़ाते हैं। तालों को प्रत्यक्ष रुप से मूर्ति के सामने नहीं रखा जाता लेकिन मूर्ति से कुछ मीटर की दूरी पर बने खंभों में बांधे गए तार में ये ताले लटका दिए जाते हैं।








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