दंडकारण्य, आंध्र प्रदेश। यहां मौजूद है रामायण के एक अहम पात्र गिद्धराज जटायु का मंदिर। जब सीता का अपहरण कर रावण पुष्पक विमान से लंका जा रहा था, तो सबसे पहले जटायु ने ही रावण से लोहा लिया था।
स्थानीय मान्यता के मुताबिक दंडकारण्य में के आकाश में ही रावण और जटायु का युद्ध हुआ था और जटायु के कुछ अंग दंडकारण्य में आ गिरे थे। ऐसा माना जाता है कि दुनिया भर में सिर्फ यही जटायु का एकमात्र मंदिर है।
इन सब चीजों के ऐतिहासिक साक्ष्य भले ही न हों, लेकिन आस्था और भक्ति को शायद किसी साक्ष्य की जरूरत नहीं पड़ती। दुनिया के इकलौते जटायु मंदिर को देखना काफी दिलचस्प अनुभव है।
साथ ही इससे देश की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की दिलचस्प झलक भी देखने को मिलती है।
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