अहमदाबाद। अहमदाबाद और दिल्ली में आतंक की इबारत कहां लिखी गई? दहशत की वो दीवार कहां है जिस पर इसके सबूत मौजूद हैं? उन बमों की टेस्टिंग कहां हुई, जिन्हें दिल्ली की सड़कों पर खून फैलाने के काम में लाया गया? बीते शुक्रवार दिल्ली पुलिस के हाथों मारे गए आतंकी आतिफ और साजिद कहां रहे थे?
ये सवाल जांच एजेंसियों के दिमाग में भी काफी वक्त से कौंध रहे थे। जो सुराग मिले वो अहमदाबाद के नरोल सर्किल की अल अहमदी सोसायटी के मकान नंबर 10 की तरफ इशारा कर रहे थे। शहर का ये मकान आम आबादी से अलग है और आतंकियों ने बहुत सोच समझकर इस जगह को अपनी प्लानिंग तैयार करने के लिए चुना था ताकि किसी को कोई शक न हो।
इस इमारत की बालकनी पर बाकायदा एक निशान छोड़ा गया था ताकि आतंकी सेल के सदस्य गुमराह न हों और सीधे मकान तक पहुंच सकें। देश के किस हिस्से में कहां हमला किया जाएगा, इसका एक कच्चा नक्शा दीवार पर उतारा गया था। दीवार पर लिखे 26 का मतलब था अहमदाबाद में धमाकों की तारीख।
इंडियन मुजाहिदीन का एक आधा-अधूरा निशान भी इस मकान की दीवार पर मौजूद है। कुछ फोन नंबर और बम बनाने का ढेर सारा सामान भी इसी मकान से क्राइम ब्रांच के हाथ लगा है। शहर के शांत इलाके में मौजूद दहशत की इस दीवार और इस इमारत का पता पुलिस को अहमदाबाद धमाकों में पकड़े गए आतंकी जाहिद शेख से मिला था।
क्राइम ब्रांच के अफसर जब यहां पहुंचे तो मकान मालकिन मैडम पुखराज इसके बारे में जानकर सन्न रह गईं। पुलिस को दहशत की इस इमारत के आसपास कुछ जलाने के निशान भी मिले। इससे इस बात की तस्दीक हुई कि आतंकियों ने सबूत मिटाने की कोशिश की थी। जांच एजेंसियों को पता चला कि 26 जुलाई के अहमदाबाद ब्लास्ट्स के लिए वांटेड कयामुद्दीन कपाड़िया ने जून के अंत में इस मकान को किराए पर लिया था और तीन महीनों के लिए उसने 25 हजार रुपए दिए।
इनमें मकान का किराया था 5000 रुपए महीना। जबकि पानी के कनेक्शन के लिए उसने अलग से 10 हजार रुपए दिए थे। मकान किराए पर लेते वक्त बताया गया था कि वो सभी रेडीमेड गारमेंट्स के व्यापारी हैं। 3 जुलाई से लेकर 27 जुलाई तक इस मकान में दहशतगर्द रुके।
हर वक्त मकान में दो लोग रहते थे और ज्यादा से ज्यादा 8 लोगों को एक वक्त में यहां देखा गया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक दिल्ली में पुलिस के हाथों मारे गए आतिफ और साजिद ने ये मकान 24 जुलाई को ही छोड़ दिया था। दहशत की दीवार पर आतंक की इबारत लिखने वालों के नेटवर्क का पता लगाने के लिए पुलिस मकान मालिक और ब्रोकर दोनों से पूछताछ कर रही है।
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