नई दिल्ली। हर फ्लाइट मुकर्रर जगह और वक्त पर किताब रखेगा। हैरान हो गए न आप सुनकर। आखिर फ्लाइट किताब कैसे रखेगा। ये एक बड़ी गुत्थी है। इसे दिल्ली पुलिस अगर सुलझा लेती तो दर्जनों की जान बच जाती। दिल्ली में धमाके नहीं होते। उसे बस इतना करना था कि इस वाक्य में फ्लाइट की जगह आतंकवादी और किताब की जगह बम रख देती।
सारा माजरा पलक झपकते समझ में आ जाता। हर आतंकवादी मुकर्रर जगह और वक्त पर बम रखेगा। ये दिल्ली में बम रखने से पहले आतंकियों की कोड में बातचीत थी। इसमें सदस्यों को फ्लाइट के नाम से पुकारा जाता था और बम को नाम दिया गया था किताब।
ये तो आतंकवादियों की योजना की सिर्फ बानगी है। उनकी गतिविधियों पर किसी की नजर न पड़े इसलिए उन्होंने अपने सदस्यों के लिए भी अलग नाम रखा। फोन पर बातचीत के दौरान इन्हीं नामों का इस्तेमाल होता था। बिल्कुल कमांडो ऑपरेशन की तरह।
9811004309, 9718252340 ये फोन नंबर था आतिफ का। शकील का मोबाइल नंबर 9899284782, आरिफ का 9873574103, जिया-उर-रहमान का 9718542450, सैफ का 9936191893 और जीशान का मोबाइल नंबर 9811731423 था। लेकिन इन फोन नंबर्स पर कभी भी इनके मालिकों के नाम नहीं आए। आतंकवादी अपना नाम सामने लाना नहीं चाहते थे।
यही वजह थी कि आतंकियों के नाम के भी कोडवर्ड तैयार थे। आतिफ का नाम था मन्नू। शाकिब यानी पंकज। कोडवर्ड में शादाब था पप्पू। सैफ का नाम था राहुल। और जीशान का कोडनेम था पंकज। पुलिस के मुताबिक ये आतंकवादी इतने शातिर थे कि पूरे ऑपरेशन के दौरान कभी भी इन्होंने एक-दूसरे का असली नाम नहीं लिया। दिल्ली पुलिस ने आतिफ के मोबाइल सिमकार्ड को डीकोड कर लिया है जिसमें पुलिस को मिले हैं कुछ एमएमएस।
दिल्ली पुलिस ने अपनी जांच में पाया है कि गफ्फार मार्केट में धमाकों के लिए 10 किलो का बम इस्तेमाल किया गया जबकि बाकी जगहों पर ढाई-ढाई किलो के बम रखे गए थे। लेकिन अफसोस सिर्फ इतना है कि इस पूरी साजिश को दिल्ली पुलिस धमाकों के बाद ही जान पाई।
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