नूरपूर, हिमाचल प्रदेश। यहां पर शिव के इस मंदिर का नाम डिबकेश्वर मंदिर है। यहीं पर वो गुफा है जहां सालों तक रावण ने शिव की तपस्या की थी और उसी गुफा से एक लिंग को लेकर वो लंका जा रहा था।
इस गुफा के बारे में कहा जाता है कि यहां से एक रास्ता अमरनाथ को जाता है तो दूसरा रास्ता गुफा के अंदर से ही हरिद्वार तक जाता है।
कहते हैं कि इन्हीं पहाड़ियों में भगवान शिव ने लंकापति रावण सैकड़ों सालों तक अपने पैरों के नीचे दबा लिया था जब वो कैलाश पर अपना कब्जा करने आया था।
जब भगवान शिव की शक्ति के आगे रावण का कुछ नहीं चला तो वो शिव भक्त हो गया और इसी गुफा में वो शिव की तपस्या करने लगा।
इस गुफा में हजारों साल पुराने शिवलिंग आज भी मौजूद हैं। और इसी गुफा के अंदर से एक रास्ता हरिद्वार और दूसरा सीधा अमरनाथ को जाता है।
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