नई दिल्ली। अमेरिका के कुछ बड़े निवेशक बैंकों का तो दिवाला निकल चुका है लेकिन अफवाहें तो ये भी हैं कि भारत के बैंकों पर भी खतरा मंडरा रहा है।
भारत के वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि भारतीय उद्योग बिल्कुल सुरक्षित है। उन्होंने जांच की और बताया की भारत के बैंको की स्थिती मजबूत है और उन्हें इस तरह की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा।
क्या आपका बैंक सुरक्षित है?
इंवेस्टमेंट एडवाइजर संदीप शानबाग का कहना है कि हालांकि दुनिया के कुछ बैंकों का दिवाला निकल चुका है इसका मतलब ये नहीं कि वैसी ही स्थिती भारत में भी हो जाए।
बैंगलोर के चार्टर्ड एकाउंटेंट केतुल शाह का कहना है कि बैंक जमाकर्ताओं से पैसे बनाता है और उससे ही दूसरों को देता और कमाई करता है। अगर पैसे देने का तरीका सही नहीं या फिर निवेश गलत ढंग से किया जा रहा है तो ऐसी स्थिती में बैंक को घाटा हो सकता है। तो आप ये समझ जाइए कि जितना सुरक्षित आपके बैंक का निवेश है उतना ही सुरक्षित आपका पैसा रहेगा।
जैसा कि वित्त मंत्री का कहना है कि बैंकों की हालत ठीक है इसका आखिर क्या मतलब है। इसका मतलब ये हुआ कि आरबाआई ने बैंकों के लिए कुछ नियम बनाए हैं जिन्हें सभी बैंकों को मानना होगा और इस तरह से जमाकर्ताओं का पैसा सुरक्षित रहेगा।
यहां कुछ नियम हैं---
- बैंक एक निश्चित सीमा तक ही लोन दे सकता है। लोन बोले तो होम लोन, क्रेडिट कार्ड इत्यादि।
- आरबीआई की मॉनिटरी प़ॉलिसी उस लिमिट के बारे में बताती है जिसमें ये बताया जाता है कि कौन सा बैंक स्टॉक मार्केट में पैसे लगा सकता है। इसमें ये होता है कि बैंक एक लिमिट तक ही निवेश कर सकते हैं।
- फॉरेन फंड के इस्तेमाल के लिए भी बैंकों के पास एक लिमिट होती है। इससे ये साबित होता है क्राइसिस के समय अगर विदेशी अपने हाथ खींच लें उसके बावजूद भी हमारे बैंकों को कोई फर्क नहीं पड़े।
-बैंकों के ऑटिड और डिस्क्लोजर की सख्त जरूरत होती है ताकि ये जाना जा सके कि बैंक कितने पैसे उधार पर दे और ले रही है।
- बैंकों को भविष्य में किसी मुसीबत से बचने के लिए मिनिमम कैपिटल फंड मेंटेन करके रखना चाहिए। बैंकों के पास लिक्विड फंड भी होने चाहिए जैसे कि सीआरआर और एसएलआर।
CNN-IBN पर दिखाए जाने वाले एक शो के दौरान CNBC TV 18's के बैंकिंग एडिटर लता वेंकटेश ने बताया कि बैंक में जमा किए जाने वाले हर 100 रुपए पर सरकार 25 रुपए बॉन्ड के रूप में अपने पास रखती है। सरकार गलत नहीं कर सकती है इसलिए आपका 25 रुपया किसी भी हाल में सुरक्षित है। दूसरा 8.5 फीसदी कैश आरबीआई के पास भी होता है तो ये भी सुरक्षित ही समझिए। लीमन ब्रदर्स ने अपनी पूंजी को लोन के तौर पर 40 बार रखा और गोल्डमौन ने 27 बार।
फाइनेंनशियल प्लैनर अरविंद राव का कहना है कि भविष्य की सुरक्षा के लिए सरकार ने एक डिपोजिट इंश्योरेंस प्लान निकाला है जिसके तहत आपका बैंक 1 लाख तक की रकम सुरक्षित रखता है।
सभी कमर्शियल बैंक, भारत में विदेशी बैंकों की शाखाएं, लोकल एरिया वाले बैंक और गांव में स्थित बैंक सभी डिपोजिट इन्श्योरेंस स्कीम के तहत सुरक्षित हैं।
विदेशी बैंक?
शानबाग बताते हैं कि विदेशी बैंक जिनकी सब्सिडरी भारत में है, सुरक्षित हैं। हालांकि जिनके हेड क्वार्टर विदेश में हैं और सिर्फ शाखाएं भारत में हैं उनकी हालत कुछ अलग ही है। अगर उनका संचालन विदेशों में फेल हो जाता है तो भारत में स्थित उनकी शाखाओं के संचालन पर भी एक सवाल खड़ा हो सकता है। ऐसी स्थिती में बैंकों का भविष्य उनकी सरकार के हाथ में होता है।
यहां कुछ बातें हैं जिन्हें जानना आपके लिए जरूरी है-
ऐसी स्थिती में किसी भी तरह का पैनिक न क्रिएट करें। अपने निवेश के बारे में दोबारा से सोचें। अगर आपका निवेश किसी असुरक्षित बैंक में है तो उसे निकाल कर किसी सुरक्षित और भरोसेमंद बैंकों में जमा कर दें।
स्मार्ट टिप—आप सिर्फ नाम से ही किसी बैंक की सुरक्षा व्यवस्था के बारे में नहीं जान सकते हैं। इसके लिए आपको बैंक की बैलेंस शीट, ऑडिट रिपोर्ट और डिस्क्लोजर पढ़ने की जरूरत होती है।
पैसे लेने या फिर जमा करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के सभी नियमों को जान लें। इसके लिए आप बैंक की वेबसाइट पर भी चेक कर सकते हैं। हांलाकि ये समय देने वाला हो सकता है लेकिन आपके पैसे से ज्यादा जरूरी कुछ नहीं हो सकता।
कुछ बातें जिन्हें आपको नहीं करनी चाहिए—
कोआपरेटिव बैंकों से हमेशा दूर रहें। क्योंकी इनके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। हालांकि इन बैंकों के लिए भी वहीं नियम होते हैं जो बाकी बैंकों के लिए हैं लेकिन बहुत बार ये उसे सही तरीके से इस्तेमाल नहीं करते। अरविंद का कहना है कि कोऑपरेटिव बैंकों का गिरना कोई नई बात नहीं है।
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