नंद गांव। शादी के बाद काफी दिनों तक भगवान श्रीकृष्ण राधा के साथ इन वनों में रास रचाते रहे। लेकिन एक दिन उन्हें नंद गांव की याद आई और वो राधा की गोद में वैसे ही बालक बन गए जैसे राधा को नंद जी ने दिया था।
इस घटना के बाद तो राधा रोने लगी। इसके बाद एक आकाश वाणी हुई। हे राधा इस वक्त शोक मत करो। अब तुम्हारा मनोरथ कुछ वक्त के बाद पूरा होगा।
राधा समझ गई कि भगवान अब अपने उस काम के लिए आगे बढ़ रहे हैं जिसके लिए उन्होंने अवतार लिया है। इसके बाद राधा भगवान श्रीकृष्ण के बालक रुप को गोद में लेकर नंद गांव गई और नंद के हाथों बाल गोपाल को समर्पित कर दिया।
ये कथा है राधा और कृष्ण के विवाह की। गर्ग संहिता में महर्षि गर्ग ने कहा है कि इस कथा को जो लोग ध्यान से सुनते हैं उनके जीवन में प्रेम की कोई कमी नहीं होती। उनका प्रेम राधा और कृष्ण की तरह अमर हो जाता है और जीवन में अचानक आया ठहराव अपनी दिशा पकड़ लेता है।
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