मुंबई। मंदी के चलते एक ही झटके में नौकरी गंवा चुके जेट एयरवेज के 1250 से ज्यादा कर्मचारियों ने बुधवार को जमकर हंगामा किया। जेट एयरवेज के प्लेसमेंट ऑफिस के सामने दिन भर हंगामा चलता रहा।
जब फ्लाइट से पहले कंपनी से भेजी जाने वाली पिकअप की गाड़ी इन कर्मचारियों के घर नहीं पहुंची तब उनको पता चला की उनको नौकरी से निकाला जा चुका है। निकाले गए कुछ कर्मचारी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे से मिलने के लिए भी गए हैं।
कर्मचारियों को निकालने के लिए जेट ने कुछ तर्क दिए हैं। उसके मुताबिक पिछले कुछ महीनों से लगातार इंटरनेशनल रूट पर कई अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों को रद्द करना पड़ा। एयर ट्रैफिक में आई मंदी की वजह से जेट को ऐसा करना पड़ा।
इसी सिलसिले में जेट एयरवेज के सीईओ वोफगेंग प्रोक ने कहा है कि कुल 1900 कर्मचारियों की छंटनी का फैसला किया गया है। छंटनी उन कर्मचारियों की हो रही है जो प्रोबेशन पर हैं या अनकंफर्म्ड हैं। साथ ही उन्होंने जोड़ा कि हालात बेहतर होने पर निकाले गए कर्मचारियों को वापस भी लिया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि यह वो स्टाफ था जिसे एक्सपेंशन प्लॉन के तहत समाहित करना मुश्किल था। जेट के सीईओ ने इस मामले में किसी भी राजनीतिक पार्टी के दखल से भी इनकार किया है।
उन्होंने कर्मचारियों को बाहर निकालने का बचाव करते हुए कहा कि हम अकेले नहीं हैं जो ऐसा कर रहे हैं। दरअसल ऐसा कर हम बाकी 11 हजार लोगों की नौकरियां बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
जेट के मुताबिक उनके खर्च में 30 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। जेट एयरवेज के चेयरमैन नरेश गोयल ने इस बढ़ते खर्च पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से मध्यस्थता की मांग की है लेकिन केंद्र सरकार ने इस बात से साफ इनकार कर दिया है।
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