नई दिल्ली। विनायक सेन को मिली सजा के खिलाफ वामपंथी रुझान वाले बुद्धिजीवी लामबंद हो गए हैं। दिल्ली समेत देश भर में कई जगहों पर सेन को मिली सजा के खिलाफ प्रदर्शन हुए। इन बुद्धिजीवियों का आरोप है कि सेन को जानबूझकर फंसाया गया है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ की एक अदालत ने उन्हें राजद्रोही करार देकर उम्रकैद की सजा सुनाई है। विनायक सेन पर माओवादियों की मदद का आरोप है।
छत्तीसगढ़ सरकार विनायक सेन को नक्सलियों का मददगार मानती है। जबकि बुद्धिजीवियों का एक तबका उन्हें आदिवासियों को सस्ता इलाज देने वाला डॉ़क्टर ही मानता है। सेन के समर्थक कह रहे हैं कि उनको सुनाई गई सजा कानूनी आधार पर खरी नहीं उतरती। उनके खिलाफ कोई गवाह तक नहीं है। दस्तावेजी सबूत भी देशद्रोह का आरोप सिद्ध नहीं करते।

छत्तीसगढ़ पुलिस का कहना है कि डॉक्टर सेन नक्सली विचारक नारायण सान्याल के संदेश नक्सली पीयूष गुहा तक पहुंचाते पकड़े गए। उन्हें राजद्रोह, आपराधिक षडयंत्र और गैरकानूनी गतिविधि निरोधक कानून के तहत उम्रकैद की सजा दी गई है। डॉक्टर सेन इस सजा के खिलाफ ऊपरी अदालतों में अपील कर सकते हैं। मगर सेन के समर्थक इसे सरकारी नीतियों की आलोचना करने वालों का मुंह बंद करने की तिकड़म करार दे रहे हैं।
सेन पर लगे आरोप कितने सही हैं और उन्हें मिली सजा कितनी गलत है इस पर बहस हो सकती है। लेकिन हमारी न्यायपालिका हमारे लोकतंत्र का एक मजबूत स्तंभ है लिहाजा आईबीएन7 का एजेंडा साफ है विनायक सेन को मिली सजा के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील हो, और वहीं होगा झूठ सच का फैसला। इसपर चर्चा के लिए मौजूद थे हैदराबाद से नक्सल समर्थक कवि वरवर राव, वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे, बुद्धिजीवी और चिंतक नीलाभ और छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्यपाल रिटा. ले. जनरल के एम सेठ। एंकरिंग आशुतोष ने की। चर्चा देखने के लिए वीडियो देखें।
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