धार। ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व की इन गुफाओं के बारे में कहा जाता है कि भीम ने यहां पर एक शिवलिंग स्थापित किया था। शिवलिंग तो जरूर दिखाई दिया, लेकिन बेहद खराब हालत में।
इन गुफाओं को देखकर अचरज होता है कि पुराने जमाने में इन गुफाओं को बनाया गया होगा। आज के दौर में मशीनों से पहाड़ों को तराशकर ऐसी गुफाएं बनाना काफी मुश्किल काम है।
यहां पर सबसे पहली गुफा को भीम गुफा भी कहा जाता है। कहते हैं इसे भीम ने बनाया था। वो इस गुफा में शिवजी की पूजा किया करते थे। यहां शिवलिंग की आकृति का एक पत्थर भी है।
मगर गुफा के हाल बद से बदतर होते जा रहे हैं। पत्थर गल-गल कर मिट्टी में तब्दील हो चुके हैं। घुटने तक कीचड़ और पानी जमा हो गया है। लेकिन इस धरोहर की कोई सुध लेने वाला नहीं है।
वैसे पुरातत्व विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक इन गुफाओं में कभी बौद्ध भिक्षु रहे होंगे। मगर मान्यता ये भी है कि बौद्धों से पहले इन गुफाओं में पांडव आकर रहे थे।
पहले यहां देशी-विदेशी पर्यटक आया करते थे। लेकिन अब तो यहां के लोगों को पर्यटकों को देखे अरसा बीत चुका है। वो गुफाएं जिनके बारे में माना जाता है कि उन्हें पांडवों ने बनवाया था, वो अपने हाल पर रो रही हैं। मगर कोई देखने सुनने वाला नहीं है।
क्या इन गुफाओं में सचमुच कभी पांडव रहे होंगे। यहां के लोग कम से कम यही मानते हैं। पहले भीम गुफा के अंदर मौजूद शिवलिंग की लोग पूजा करने आते थे।
स्थानीय लोगों की अभी भी यही आस्था है कि इस शिवलिंग को भीम ने बनवाया था। मगर गुफा के हाल बुरे होने के बाद से अब यहां कोई नहीं आता।
भीम गुफा अंदर से देखने में काफी रहस्य समेटे सी लगती है। टपकता पानी, शिवलिंग के आकार का पत्थर और ये आभास की कभी यहां बलशालि भीम ने तपस्या की होगी, इसे और रहस्यनुमा सा बना देता है।
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