धार। इतिहास-पुराणों में ऐसी कई कहानियां सुनने को मिलती हैं जो बताती हैं बुरा वक्त जब दस्तक देता है तो राजा को भी रंक बनने में देर नहीं लगती। कुछ ऐसा ही पांडवों के साथ भी हुआ।
कहा जाता है कि मध्य प्रदेश के धार जिले में मौजूद जंगलों में पांडवों ने अपने अज्ञातवास का एक साल काटा था।
दरअसल कौरव और पांडवों के बीच जुए का खेल खेला जा रहा था। मामा शकुनी अपने भांजे दुर्योधन के लिए चौपड़ की बिसात बिछाए बैठे थे।
इस खेल में पांडवों के सबसे बडे़ भाई युधिष्ठिर अपना सबकुछ गंवा बैठे। यहां तक की द्रौपदी को भी। अब कौरवों ने पांडवों के सामने एक शर्त रख दी कि अगर पांडवों को अपना राजपाट वापिस चाहिए तो उन्हें 13 साल का वनवास काटना होगा।
शर्त के मुताबिक तेरहवें साल में पांडवों को अज्ञातवास काटना था। अगर कौरव उन्हें ढूंढ लेते तो अगले बारह साल उन्हें फिर से दर-दर की ठोकरें खाते हुए बिताने पड़ते।
फिर क्या था कौरवों से अपने अपमान का बदला लेने और सब कुछ दुबारा पाने के लिए पांडवों ने ये शर्त मान ली और पांचों भाई द्रौपदी के साथ निकल पड़े।
ऐसा माना जाता है भटकते-भटकते वो जा पहुंचे मध्यप्रदेश के धार में मौजूद इन्हीं गुफाओं में जिसे एक वर्ष तक उन्होंने अपने छिपने का ठिकाना बनाया। इन गुफाओं में तमाम ऐसी निशानियां बिखरी पड़ी हैं, जिन्हें पांडवों से संबंधित बताया जाता है। लेकिन सवाल यही है कि इतनी महत्वपूर्ण जगह को भला क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है। क्यों नहीं इसे संजो कर रखा गया? आखिर कौन है इन गुफाओं की इस हालत के लिए जिम्मेदार?
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