धार। बाग की गुफाएं न केवल पांडवों के अज्ञातवास के लिए जानी जाती हैं, बल्कि वहां की दीवारों पर मौजूद चित्रों के लिए भी काफी मशहूर हैं।
बाग की ये चित्रकारी अब कपड़ों में भी उतर चुकी है। इन कपड़ों की देश-विदेश में काफी मांग है।
बाग की गुफाओं में 300 से ज्यादा भीती चित्र थे, जो एक एक करके लापरवाही की भेंट चढ गये । ये सभी चित्र प्राकृतिक रंगों से बनाए गए हैं।
गुफाओं में हो रहे पानी के रिसाव और क्षरण को देखते हुऐ, इन चित्रों को एक संग्रहालय में रख दिया गया। पिछले दो साल से ये सभी चित्र इस म्यूजियम में बंद हैं।
भले ही ये चित्र नष्ट हो गये या ताले में बंद होकर रह गये हों, मगर इनसे प्रेरणा लेकर बाग के कारीगरों ने अपना नाम देश विदेश तक कर डाला।
यहां के बनाये प्रिंट बाग के प्रिंट के नाम से मशहूर हुऐ। इन भीति चित्रों की तर्ज पर ही कलाकारों नें प्राक्रतिक रंगो को बनाना शुरु किया और उनकी छाप कपड़ों पर ऐसी लगी कि भीति चित्रों की तरह ही उनका रंग भी पक्का हो गया।
बाग में घर-घर में इस तरह के प्रिंट का काम होता है । अब बाग की गुफाऐं कब तक रहेंगी इनका तो भगवान ही मालिक है मगर इन गुफाओं से मिला ये हुनर हमेशा इन गुफाओं की याद ताजा करता रहेगा।
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