एक और अंजाम की तलाश में...
निकल पड़ा हूं हाथ में तिरंगा लिए,

मैं अन्ना हूं,
मैंने अन्न छोड़ा है,
अब आवाज जब तक बुलंद है....
लगाउंगा,
उठाउंगा,
मिटाउंगा,
अब देश को जगाउंगा,
कि अब उठो, जागो,
कि अब पहर है निकल चलने की...
तो निकल चलो मेरे साथ,
एक और अंजाम की तलाश में...
(IBNkhabar के मोबाइल वर्जन के लिए लॉगआन करें m.ibnkhabar.com पर!)
More on: readers poem, ibnkhabar, website, ibn7, spirit








कमेंट्स
4