मुंबई। जापान के परमाणु हादसे के बाद जैतापुर में न्यूक्लियर पॉवर प्लांट का विरोध तूल पकड़ गया है। सोमवार की पुलिस फायरिंग में एक शख्स की मौत के बाद तो जैसे जैतापुर में आग ही लग गई है। नतीजा ये हुआ कि पूरे रत्नागिरि में कर्फ्यू लगाना पड़ा। उधर शिवसेना ने इस विरोध प्रदर्शन में सियासी रंग भी घोल दिया है। विधानसभा में भी इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। मगर इस तमाम शोरगुल में ये सवाल पीछे छूट गया है कि न्यूक्लियर प्लांट की जरूरत वहां है भी या नहीं।
दरअसल महाराष्ट्र का जैतापुर पश्चिम बंगाल का नंदीग्राम बनने की राह पर है। जैतापुर में न्यूक्लियर पॉवर प्लांट के विरोध की आग धधक रही है। सोमवार को प्रदर्शनकारियों पर पुलिस फायरिंग में एक शख्स तबरेज की मौत हो गई। पहले ही पॉवर प्लांट के खिलाफ खड़ी शिवसेना को इसी बहाने एक मुद्दा हाथ लग गया। मंगलवार को शिवसेना ने रत्नागिरी बंद का ऐलान कर दिया। मंगलवार को उस अस्पताल में भी हंगामा खड़ा हो गया जहां तबरेज का पोस्टमॉर्टम होना था।

जैतापुर में प्रदर्शन और फायरिंग का असर महाराष्ट्र विधानसभा में भी देखने को मिला। पूरे मामले में सरकार और पुलिस प्रशासन के रुख से नाराज विपक्ष ने सदन में हंगामा खड़ा कर दिया। हालांकि सरकार इस पूरे हंगामे को शिवसेना की साजिश करार दे रही है।
मालूम हो कि सरकार जैतापुर में 9,900 मेगावॉट के परमाणु बिजलीघर को हरी झंडी दे चुकी है। लेकिन इलाके के लोग शुरू से कई मुद्दों पर इस प्लांट के खिलाफ हैं। जैतापुर की जमीन खेती के लिहाज से बेहद अच्छी है इसलिए किसान जमीन नहीं छोड़ना चाहते हैं। यहां के अल्फांसों आम और काजू के निर्यात से किसान अच्छी खासी कमाई करते हैं। इलाके के मछुआरों को डर है कि प्लांट से निकलने वाला पानी समंदर में गया तो मछलियां मरेंगी।
वहीं जापान के फुकुशिमा में हुए हादसे ने आग में घी का काम किया है। लेकिन पर्यावरण मंत्रालय फिलहाल फैसला बदलने को तैयार नहीं। सवाल पर्यावरण मंत्रालय की हरी झंडी पर भी कम नहीं उठ रहे। फ्रांस की जिस कंपनी से ये डिजाइन ली गई है उसको यूरोप में ही मान्यता नहीं मिली। फिनलैंड में इसी तकनीक से बन रहा प्लांट चार साल बाद भी बनकर तैयार नहीं हुआ। किसी भी देश ने इस तकनीक की सुरक्षा को लेकर हरी झंडी नहीं दी है।
आईबीएन7 के खास कार्यक्रम एजेंडा में आज मुद्दे पर चर्चा हुई, चर्चा में आईबीएन7 के मैनेजिंग एडिटर आशुतोष के साथ शिवसेना नेता राम कदम, एनसीपी नेता जितेंद्र आव्हाण, कृषि विशेषज्ञ देवेंदर शर्मा और पर्यावरणविद प्रफुल्ल बिदवई हिस्सा लिए।
चर्चा का अंश वीडियो में देखें।
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