नई दिल्ली। आईएनएस अरिहंत के बाद भारत अब अपनी दूसरी परमाणु पनडुब्बी का निर्माण पूरा करने के अग्रिम चरण में है और अगले साल इसका भी जलावतरण किए जाने की उम्मीद है। जानकार सूत्रों ने बताया कि भारत की दूसरी परमाणु पनडुब्बी का नाम ‘आईएनएस अरिदमन’ होगा और यह अपनी पूर्ववर्ती अरिहंत की जुड़वा पनडुब्बी होगी। इसकी विशेषताएं, आकार एवं क्षमताएं अरिहंत जैसी ही होंगी।
भारत की इस दूसरी पनडुब्बी का खुलासा हाल ही में विशाखापत्तनम के शिपयार्ड में हुए हादसे की वजह से अचानक हो गया। इस हादसे में चार नौसेना कर्मियों की मौत हो गई। मीडिया के एक वर्ग में जब इस आशय की गलत खबरें प्रकाशित हो गईं कि इस हादसे से आईएनएस अरिहंत के समुद्री परीक्षण प्रभावित होंगे तो इसका खंडन करने के लिए कुछ अधिकारियों ने पुरजोर कहा कि जिस समय यह हादसा हुआ उस समय आईएनएस अरिहंत डाकयार्ड में थी ही नहीं।

इन अधिकारियों ने माना कि यह हादसा बेशक उस डाकयार्ड में एडवांस टैक्नोलाजी वैसल (यह परमाणु पनडुब्बी परियोजना का कूटनाम है) बनते हैं लेकिन हादसे के समय वहां अरिहंत के बजाए कोई और वैसल था।
बाद में दूसरे सूत्रों से इस बात की पुष्टि हुई कि आईएनएस अरिहंत तो समुद्री परीक्षणों के लिए चली गई थी और जिस दूसरे वैसल की बात कही जा रही है वह दरअसल भारत की दूसरी परमाणु पनडुब्बी है। आईएनएस अरिहंत का जलावतरण 26 जुलाई 2008 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पत्नी गुरशरण कौर ने किया था। परंपरागत रूप से नौसेना अपने पोतों का जलावतरण किसी महिला के कर कमलों से ही कराती रही है।
सूत्रों ने कहा कि हादसा उस समय हुआ जब इस गोदी में पानी के एक गेट का परीक्षण किया जा रहा था। कैसोन नाम की यह फ्रांसीसी गेट प्रणाली पहली बार वहां लगाई जा रही थी जिसमें तीन खांचे होते हैं। दो खांचों को लगाने के बाद तीसरा खांचा वहां उतारा जा रहा था। चालीस फुट ऊंचे और करीब पांच-छह फुट चौडे़ इस विशालकाय गेट के ऊपर नौसेना के अधिकारी और कर्मी खडे़ हुए थे। जब यह गेट लडखडा गया और ये लोग शुष्क गोदी में गिर गए। उसी समय समुद्र का पानी गोदी में छोड़ा जाना था और इस तरह हादसे के शिकार लोगों पर दोहरी मार पड़ गई।
सूत्रों ने जोर देकर कहा कि इस हादसे का आईएनएस अरिहंत या किसी और वैसल के निर्माण या परियोजना पर कोई असर नहीं होगा।
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