सत्ता का सेमीफाइनल शुरू हो चुका है। इलेक्शन कमीशन ने 6 राज्यों मिजोरम, दिल्ली, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और जम्मू-कश्मीर में चुनाव का ऐलान कर देश का राजनीतिक पारा चढ़ा दिया है। यदि इन चुनावों, उसमें उठाए जा रहे मुद्दों या प्रत्याशियों के संबंध में आपके मन में भी है कोई सवाल या आप देना चाहते हैं कोई राय अथवा जानकारी तो यहां क्लिक करें। आपके सवालों के जवाब देंगे आईबीएन7 एडिटर्स पैनल में शामिल मैनेजिंग एडीटर आशुतोष, एक्जेक्यूटिव एडिटर संजीव पालीवाल, एक्जेक्यूटिव एडिटर मृत्युंजय कुमार झा, एक्जेक्यूटिव एडिटर प्रबल प्रताप सिंह, चुनाव कवरेज प्रभारी प्रभात शुंगलू, राजनीतिक संपादक सुमित अवस्थी। इनके साथ रहेंगे आईबीएन7 के देश के कोने-कोने में फैले रिपोर्टर्स।
24*7 लाइव चैट के क्रम में एक्जीक्यूटिव एडिटर संजीव पालीवाल से हुई चैट के प्रमुख अंश..
अजय कुछाल
इस देश की राजनीति इतनी गंदी हो चुकी है कि अब जनता को इससे कोई मतलब नहीं है कि कौन मुख्यमंत्री बनेगा। कौन कहां से जीतेगा। दरअसल जनता को नेताओं पर भरोसा नहीं रहा, इससे तो अच्छा यही है कि भारत में भी अमेरिका जैसे राष्ट्रपति राज लागू हो और जनता अपनी पसंद का एक आदमी चुन सके।
IBN7 एडिटर्स पैनल (संजीव पालीवाल): कानून और न्याय प्रक्रिया अपने यहां भी अच्छी है। जरूरत है कि हम अपने अधिकार के प्रति जागरुक हों और कोशिश करें खुद को बदलने की तभी हम देश को बदल पायेंगे।
विपेन्द्र कुमार
इलेक्शन आ ही गया है मेरा आज की युवा पीढ़ी से कहना है कि अपने मताधिकार का प्रयोग करें और किसी भी अपराधी और भ्रष्ट नेता को अपना वोट हरगिज़ ना दें। अपना वोट केवल पढ़े-लिखे और अच्छे नेता को ही दें। हम युवा क्या नहीं कर सकते यदि हम आगे मिलकर आए तो देश की राजनीति को पलट कर रख सकते हैं। नेता ऊपर से पैदा नहीं होते हमारी वोटों से वो नेता बनते हैं। वोट लेकर वादे करके कुर्सी तक पहुंचने के बाद जो नेता जनता के लिए काम ना करे उसे कोई अधिकार नहीं जीतने का। मैं पढ़े-लिखे लोगों के लिए एक दल बना रहा हूं मुझे युवाओं की प्रतिक्रिया चाहिए। मेरे दल का नाम होगा भारतीय स्नातक दल। इस दल की ख़ास बात ये होगी कि इसमें सिर्फ़ स्नातक तक पढ़ाई किए लोग दल का संचालक व पदाधिकारी होंगे। स्नातक ही अपने दम पर एक नया भारत बनाकर देश की जनता के लिए काम करेंगे। मुझे आप सभी की राय चाहिए।
IBN7 एडिटर्स पैनल (संजीव पालीवाल): आप अच्छा काम कर रहे हैं, बधाई।
डी अलबर्ट
भाजपा सीधे आतंकवाद के साथ दिख रही है कोर्ट की आंखे बंद क्यों है?
IBN7 एडिटर्स पैनल (संजीव पालीवाल): आंखें कोर्ट की बंद नहीं है। न भाजपा आतंकवाद के खिलाफ है। वो सिर्फ मुसलमानों के खिलाफ है, बल्कि यू कहें कि वो सिर्फ वोट के साथ है। तभी तो वो भगवा आतंकवादियों का बचाव कर रही है।
कलामुद्दीन खान: हर दल के नेता कैसे अमीर हो जाते हैं, क्या कोई बता सकता है?
IBN7 एडिटर्स पैनल (संजीव पालीवाल): नेतागिरी अब धंधा हो चुकी है। कमाई का इससे आसान रास्ता नहीं है। ये सच्चाई हमें स्वीकार कर लेनी चाहिए।
डी अलबर्ट: आरएसएस पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया जाता है?
IBN7 एडिटर्स पैनल (संजीव पालीवाल): आरएसएस एक बड़ा संगठन है, सासंकृतिक संगठन है जिसकी एक विचारधारा है। पहलs भी आरएसएस पर प्रतिबंध लगा है अगर कभी सरकार को लगा कि आरएसएस देश के खिलाफ काम कर रहा है तो वो फैसला करेगी।
नरेन्द्र सिंह: अभी हाल ही में मारग्रेट अल्वा ने ये कहा कि कांग्रेस मे टिकट बेचे जा रहे हैं, यह बात कितनी सच्चाई है? IBN7 एडिटर्स पैनल (संजीव पालीवाल): टिकट हर पार्टी में बिकते हैं, ये सच है।
वंशज: हिंदू संगठन अगर आतंकवाद के विरोध में अपने सगठनों को जागरूक कर रहे हैं तो क्या यह ग़लत है? देश में जब भी बम फ़टते हैं तो जेहाद का नाम देते हैं।
IBN7 एडिटर्स पैनल (संजीव पालीवाल): आंतकवादी हिन्दू हो या मुसलमान वो महज आतंकवादी है। देश का और जनता का दुश्मन है। ये हिन्दुस्तान है, भारत है कोई पाकिस्तान नहीं कि जिसका मन आ जाये और कानून हाथ में ले ले। अगर ये होता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब हर इंसान के हाथ में बम होगा और वो अपने पड़ोसी के खून में होली खेल रहा होगा। बंद कीजिये ऐसी वाहियात बात।
विपेन्द्र कुमार: मैं आपके माध्यम से ये कहना चाहता हूं कि इस देश में क्या एक ऐसा कानून नहीं बन सकता? जिस व्यक्ति पर कोई भी अपराधिक मुक़दमा चल रहा हो, वो जेल में हो या वो ज़मानत पर हो। उसे चुनाव में लड़ने के अधिकार से वंचित किया जाए। आज राजनीति में अपराधियों की भरमार है। ऐसा लगता है की राजनीति का अपराधिकरण या कहिए कि अपराधियों का राजनीतिकरण हो रहा है। सब जानते हैं कि ये अपराधी हैं पर दल उसे टिकट देते हैं, लोग उन्हें वोट देते हैं। चुनाव आयोग को ये पहले करनी चाहिए कि एक क़ानून बने। ताकि अपराधियों को टिकट ना मिले। ये सुनिश्चित हो कि किसी भी दल में कोई अपराधिक छवि का नहीं है।
IBN7 एडिटर्स पैनल (संजीव पालीवाल): न्याय का सिद्धांत ये कहता है कि महज आरोप लगने से कोई अपराधी साबित नहीं हो जाता। अपराधी तब कहलायेगा जब अदालत में आरोप साबित हो जाये। तब तक तो इंतजार करना ही होगा।
राहुल शर्मा: आज अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में तेल के दाम काम होने के कारण पाकिस्तान ने अपने यहां पेट्रोल के दाम कम कर दिए हैं हमारी सरकार इस बारे में क्या कर रही है या इस सरकार को हमारी समस्या से कोई मतलब नहीं है?
IBN7 एडिटर्स पैनल: पिछले एक साल में तेल कंपनियों ने काफी घाटा उठाया है। जिसकी भरपाई होना अभी बाकी है। वैसे भी अगर अभी तेल के दाम घटाये जाते हैं तो सभी राजनीतिक पार्टियां शोर मचायेंगी कि सरकार वोट पाने के लिये तेल के दाम घटा रही है। थोड़ा इंतजार कीजिये तेल के दाम जरूर घटेंगे।
देव: सबसे पहले में आई बी एन को धन्यबाद देना चाहता हूं कि आपने ये सुबीड़ा एक आम जनता के लिए उनकी आवाज़ सब तक पहुंचाने के लिए की है। जहां तक मुझे जानकारी है कि हमारे देश में बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो मदद करना चाहते हैं पर उनको वो जगह नहीं मिल पाती है जहां से वो सीधा देश के गरीब तबकों के लिए अपना योगदान दें।
IBN7 एडिटर्स पैनल (संजीव पालीवाल): अगर आप मदद करना चाहते हैं इसके लिए किसी का सहारा क्यों ढूंढ रहे हैं। अपने आसपास देखिये काफी ऐसे लोग मिल जायेंगे जिन्हें मदद की जरूरत है। बस शुरुआत कीजिये।
खुशनूद: हम तो सिर्फ़ इतना जानना चाहता है कि यह नेता वोट लेकर कहां चले जाते हैं और फिर कभी अपने वोटरों की समस्या को नहीं देखते हैं?
IBN7 एडिटर्स पैनल (संजीव पालीवाल): देखिये नेतागिरी अब धंधा है, देश की सेवा तो है नहीं। नेता भी एक सामान है जैसे आसी, टीवी, फ्रिज या पंखा, जिसे आप 5 साल में एक बार खरीदते हैं और उसके बाद खराबी आने पर सर्विस के लिये भटकते रहते हैं। जब खरीदा है तो भुगतिये और सर्विस करने वाला मिल जाये तो हालत खराब कर दीजिये। 5 साल बाद तो उसने वापस आना ही है। बदला ले लीजियेगा।
रवीन्द्र सोनी: सही राजनीति क्या है?
IBN7 एडिटर्स पैनल(संजीव पालीवाल): देश में नीति का राज हो, यही राजनीति है। जहां नीति का राज नहीं होता वहां पाकिस्तान होता है, अफ्गानिस्तान होता है, ईराक होता है। जनता के लिये नीतियां बने और नीति के हिसाब से राज चले, यही राजनीति है।
रवीन्द्र सोनी: क्या ये माना जाए की सभी नेता भ्रष्ट हैं?
IBN7 एडिटर्स पैनल(संजीव पालीवाल): ये नहीं कह सकते। अगर ऐसा होगा तो देश का अस्तित्व ही खत्म हो जायेगा। इतने नाउम्मीद नहीं होते। जाईये वोट डालिये एक अच्छे उम्मीदवार को, वो इमानदार जरूर होगा।
24*7 लाइव चैट के क्रम में मैनेजिंग एडिटर आशुतोष से हुई चैट के प्रमुख अंश..
Arvind:हमारे संविधान में जाति धर्म के आधार पर चुनाव लड़ना मना है फिर क्यों चुनाव में वही सब होता है, इस पर रोक कैसे लगेगी ?
IBN7 एडिटर्स पैनल (आशुतोष): इस पर रोक लग जायेगी जब आप और हम जाति धर्म के आधार पर नेताओं को वोट देना बंद कर देंगे।
Kuldeep :हाल ही में मार्ग्रेट अल्वा ने यह कहा कि कॉग्रेस में टिकट बेचे जाते हैं और राहुल गांधी ने एक बयान में कहा था कि राजनीति मे आने के लिए, व्यक्ति को या तो राजनेता का बेटा/ बेटी होना होगा या फिर पैसे वाला तो इसका क्या मतलब निकाला जाए। सभी जानते हैं कि मोतीलाल नेहरू एक अमीर व्यक्ति थे और फिर ज़वाहार लाल नेहरू, इंदिरा, राजीव, संजय सभी अमीर और राजनेताओं के बेटा या बेटी रहे क्या कांग्रेस ही इन हालातों के लिए उत्तरदायी नहीं है क्या?
IBN7 एडिटर्स पैनल (आशुतोष): कांग्रेस इस देश की ढेरों समस्यायों के लिये जिम्मेदार हैं लेकिन इसी देश में गरीबों के यहां से भी नेता सामने आ रहे हैं और मुख्यमंत्री भी बन रहे हैं। लालू यादव, मायावती इसके प्रमाण हैं।
Yaya:आपने एक प्रश्न का उत्तर दिया कि जिसको आप राजनीति में लायक नहीं समझते उसको बाहर का रास्ता दिखाओ लेकिन राजनीति में कोई नया नाम तो है नहीं...सपा के मुलायम सिंह के अगुआई वाली सरकार को हर काम में पैसा लेते देखा, कांग्रेस को पिछले दिनों बहुमत की ज़ोर आजमाइश के समय देखा फिर मार्ग्रेट अल्वा जी द्वारा लगाए आरोप ..टिकेट बिके हैं को गंभीर मानते हुए दोषिओं के खिलाफ़ कार्रवाई की बजाए मार्ग्रेट अल्वा जी को ही कटघरे में खड़ा किया गया। भ्रष्टाचार के आरोपों में लालू जी, मायावती जी आरोपों के घेरे में चल ही रहे हैं तो ये पार्टियों के मुखिया ही जिस राह पर चलेंगे सदस्य भी क्या बच जाएंगे और पार्टियां ही टिकेट का वितरण करती हैं कुछ हो पाएगा ऐसा लगता ही नहीं?
IBN7 एडिटर्स पैनल (आशुतोष): निराश होने से काम नहीं चलेगा। विकास हो रहा है लोग समझ रहे हैं वो ही खुद इनका इलाज करेंगे। लोकतंत्र ने इन लोगों को अगर जगह दी है तो वही इनका इलाज भी करेगा।
Yaya:जब नेता सत्ता में होते हैं तो अपने खिलाफ़ चल रहे भ्रष्टाचार आदि के मामले जांच प्रक्रिया से रुकवा देते हैं क्या ऐसा ना हो और न्याय प्रक्रिया को बाधित न किया जा सके, ऐसी कोई व्यवस्था नहीं लालू यादव... मायावती... मुलायम सिंह..अमर सिंह आदि करोड़ों की संपत्ति के मालिक हो गए और दूसरे करोड़पति होते जा रहे हैं प्रशासनिक अधिकारियों कर्मचारियों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई हो जाती है नेता जो सब कामों की जड़ में होते हैं वो साफ़ बच जाते हैं जैसे मुलायम सिंह की सरकार में पुलिस के सिपाहियों की भर्ती हुई थी माया सरकार के आते ही भर्ती निरस्त कर दी गई। भर्ती में शामिल अधिकारिओं की जांच हुई सज़ा के लिए सिफ़ारिशें हुईं। कुच्छ को सज़ा हो भी गई पर इस प्रक्रिया में जो नेता शामिल रहे उनके खिलाफ़ कोई जांच, कोई कार्रवाई आख़िर क्यों नहीं हुई क्योंकि अधिकतर काम सरकारों के लिखित मौखिक आदेशों से ही होते हैं तो संबंधित नेताओं को भी उस ग़लती में शामिल क्यों नहीं माना जाता ?
IBN7 एडिटर्स पैनल (आशुतोष): कानून इन नेताओं को सजा देने में नाकाफी है ये आप भी जानते हैं और हम भी। इसका सबसे बड़ा इलाज ये है कि लोग इन को चुनना ही बंद कर दे सारी समस्या खत्म हो जायेगी।
Anil:हमारे देश में लगातार बढ़ रही राजनीतिक पार्टियों को रोकने की ज़रूरत हें, हर कोई एक या दो सीट जीतकर बड़ी पार्टियों को ब्लैकमेल करता है, क्यों नहीं एलेक्शन कमिशन इस पर रोक लगाता, इस से देश में कठोर निर्णय लेने के लिए हर किसी ऐरे गैरे की जी हज़ूरी नहीं करनी पड़ेगी?
IBN7 एडिटर्स पैनल (आशुतोष): सफल लोकतंत्र के लिये जरूरी है कि कम पार्टियां हो लेकिन जितना बड़ा भारत देश है और जितने ढेर सारे मुद्दे इस देश में हैं उस हिसाब से सिर्फ दो पार्टियों पूरे देश का प्रतिनिधित्व नहीं कर पायेंगीं। छोटी पार्टिय़ां लोकतंत्र में कभी-कभी ब्लैकमेल करती हैं लेकिन इन पर रोक सिर्फ लोग ही लगा सकते हैं चुनाव आयोग नहीं।
Mohammad Salim: जो पार्टियां इन राज्यों में जीतेंगी वो ही अगले आम चुनावों में जीत हासिल करेंगी क्या, इन विधानसभा चुनावों को अगले आम चुनावों से जोड़कर देखना सही होगा?
IBN7 एडिटर्स पैनल (आशुतोष):विधानसभा के चुनाव राष्ट्रीय मुद्गों पर नहीं लड़े जाते ऐसे में ये कहना थोड़ी जल्दबाजी होगी कि जो इसे जीतेगा वहीं लोकसभा भी जीतेगा। हां, इस आधार पर थोड़ा सा अंदाजा जरूर लग जायेगा कि हवा किस तरफ बह रही है।
Girish Tripathi:आप कह रहे हैं कि साध्वी को कांग्रेस नहीं फ़सा रही है, इसमें सत्यता होगी, क्या इसी तरह कांग्रेस ने कुछ साल पहले जैन हवाला कांड के नाम पर विरोधी पार्टी के तमाम बड़े नेताओ को नहीं फ़ंसाया था, बाद में सारे नेता बेदाग़ छूट गये लेकिन क्या कांग्रेस ने देश से माफ़ी मांगी? उससे पहले सेंट किट्स कांड भी कांग्रेस ने बोफ़ोर्स कांड से देश का ध्यान हटाने के लिए रचा था, क्या हुआ बाद मे सब ख़त्म हो गया, कांग्रेस का तो इस तरह का इतिहास ही रहा है कि चुनाव के समय षडयंत्र करके चुनाव जीता जाए फिर हम क्यों न मानें कि इस बार भी मीडिया को आगे करके कांग्रेस उसी इतिहास को दोहराने जा रही है|
IBN7 एडिटर्स पैनल (आशुतोष): राजनीति बेदाग नहीं होती ये मैं मानता हूं लेकिन अगर इन गिरफ्तारियों के पीछे कोई साजिश है तो फिर इसका भी खुलासा हो जायेगा और कांग्रेस को इसका नुकसान उठाना पडेगा लेकिन जांच पूरी होने का हमें और आपको इंतजार करना चाहिये।
Ashutosh:सब वोट बैंक की साज़िश हैं, प्रज्ञा सिंह की गिरफ़्तारी से लगता हैं कि मुस्लिमों को खुश रखने के लिए ही ये साज़िश रची गयी हैं, दूसरे तरफ़ मुस्लिम आतंकवादियों की तरफ़ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा हैं। आप की क्या राय हैं?
IBN7 एडिटर्स पैनल (आशुतोष):इसके पीछे की राजनीति के बारे में तो मुझे नहीं पता है लेकिन इतना तय है कि ये लोग पाक साफ नहीं है। दोनों ही तबकों को ये समझना चाहिये कि आतंकवादी का कोई धर्म नहीं होता चाहे वो हिंदू हो या फिर मुसलमान। और कानून को अपना काम करने देना चाहिये।
24*7 लाइव चैट के क्रम में एक्जीक्यूटिव एडिटर प्रबल प्रताप सिंह से शुक्रवार को हुई चैट के प्रमुख अंश..
Jaya:हम जानते हैं कि जिनको हम वोट दे रहे हैं कल को जो काम नियमानुसार इन्हें करना है जैसे नौकरी देना, ट्रांसफ़र करना आदि उसके लिए ये जनता से लाखों रुपये की मांग करेंगे। इस समस्या से छुटकारा पाना कैसे संभव हो पाएगा, क्या है इस बीमारी का इलाज, आप कुछ बता सकते हैं क्योंकि भ्रष्टाचार निश्चित रूप से घटाया जा सकता है यदि नेता ईमानदार हो जाएं, वो ख़ुद भ्रष्टाचार में लिप्त हैं तो किसी पर सख्ती कैसे कर सकते हैं अब तो नेताओं के अधीनस्थ के रूप में भी एक और बीमारी आ गई है कुछ सुझाव दें ?
IBN7 एडिटर्स पैनल (प्रबल प्रताप सिंह): भ्रष्टाचार का सबसे बढ़िया जवाब है कि उन लोगों की पहचान करें जो कि ऐसा करते हैं औऱ चुनाव में उन्हें मत नहीं दें लेकिन हमारी दिक्कत ये है कि हम जात, पात धर्म जैसी भावनाओं में बहकर अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल करते हैं औऱ हमी भुगतते भी हैं।
Navin Choudhary:आपको ऐसा नहीं लगता कि कांग्रेस पार्टी जानबूझ कर प्रज्ञा सिंह को फ़ंसा रही है........ क्योंकि सिर्फ़ उसी राज्य की पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है जहां कांग्रेस की सरकार है... ये कहीं मुस्लिम वोट बैंक को खुश करने की चाल तो नहीं?
IBN7 एडिटर्स पैनल (प्रबल प्रताप सिंह): मुझे ऐसा नहीं लगता क्योंकि प्रज्ञा सिंह के अलावा फौज का अफसर भी पकड़ा गया है। महज राजनीति के लिए ऐसा कदम कोई भी सरकार नहीं उठाएगी। उसमें जरूर सत्यता होगी औऱ अगर गलत है तो फिर अदालत बरी कर देगी और फिर कांग्रेस के लिए जवाब देना मुश्किल हो जाएगा।
Mahendra:दमोह। यहां एक 22 साल के उम्मीदवार का पर्चा पहले मान लिया गया। चुनाव चिन्ह भी दे दिया गया और फिर निर्वाचन आयोग ने पर्चा ख़ारिज़ कर दिया, क्या यह उचित है?
IBN7 एडिटर्स पैनल (प्रबल प्रताप सिंह): जाहिर तौर पर चुनाव आयोग ने इसमें कोई गलती पाई होगी। कभी-कभी चूक भी होती है।
Harshit, नीमच:सबसे ग़लत बात तो यह है कि टिकट उन लोगों को दिए गए हैं जिसको अपने चुनाव क्षेत्र का रास्ता ही नहीं मालूम। मतलब टिकेट उन लोगो को दिए गये जिनका हारना तय है।
IBN7 एडिटर्स पैनल (प्रबल प्रताप सिंह): तो आप उन्हें अपने हक का इस्तेमाल करके बाहर का रास्ता दिखा सकते हैं।
Jaya:पाकिस्तान ने अपने यहां से अफ़ग़ान शरणार्थियों को देश छोड़ने को कहा और हमारे देश में जनसंख्या में विशेष बढ़ोतरी के लिए शरणार्थी ज़िम्मेदार हैं। इनको वोट के चक्कर में देश में बसाया जा रहा है आख़िर क्यों, जनता क्या करे कुछ सुझाव चाहूंगी ?
IBN7 एडिटर्स पैनल (प्रबल प्रताप सिंह): जनता के पास सबसे बड़ा हथियार वोट ही है अगर लगता है कि बाहरी लोगों को बसाया जा रहा है तो जनता को वोट के हथियार से इसका जवाब देना चाहिए।
24*7 लाइव चैट के क्रम में पॉलिटिकल एडिटर सुमित अवस्थी से गुरुवार को हुई चैट के प्रमुख अंश..
Deep Chandra Chowdhry:एक चीज़ मेरी समझ में नहीं आती कि अभी संसद मे जो विश्वासमत हुआ था उसमें कई सांसद ऐसे थे जिन्होंने किसी को भी वोट नहीं दिया, संसद में ऐसी व्यस्था है कि अगर कोई किसी भी प्रत्याशी को पसंद न करे तो तीसरा विकल्प है, जबकि आम चुनावों में ऐसा बिल्कुल नहीं है। चुनाव आयोग जहां वोट डालने के लिए इतनी जागरूकता लाने की क़ोशिश कर रही है वहीं तीसरे विकल्प पर विल्कुल गंभीर नहीं है ? आप क्या कहते हैं!
IBN7 एडिटर्स पैनल (सुमित): तीसरे विकल्प का सुझाव यानी किसी को वोट नहीं देना -- एक अच्छा सुझाव है नेताओं को उनका असली चेहरा दिखाने का। लेकिन मेरे ख्याल से ये समस्या का परमानेंट उपाय नहीं है। ऐसी कोई तरकीब निकालनी होगी कि नेता चुने भी जायें और उनकी जवाबदेही भी जबरदस्त हो..ताकि कोई गलत काम न कर सकें। वैसे चुनाव आयोग आप जिस सुझाव की बात कर रहे हैं उसपर विचार भी कई सालों से कर रहा है..लेकिन जब तक तमाम राजनीतिक पार्टियां नहीं मानेंगीं..तब तक ऐसा कोई कानून बन पाये मुश्किल लगता है।
Tanhakaran: वाई वी नोट सिलेक्ट यंग प्राइम मिनस्टर ओर प्रेसीडेंट?
IBN7 एडिटर्स पैनल (सुमित): दरअसल हमारे यहां अनुभव को काफी महत्ता दी जाती है। नये लोगों पर भरोसा करने में थोडी दिक्कत होती है..लेकिन अब हालात बदल रहे हैं..नौजवान आगे आ रहे हैं...चुनाव लड़ रहे हैं और चुने भी जा रहे हैं..14वीं लोकसभा इसका बेहतरीन उदाहरण है। लगता है कि वो वक्त भी जल्द आयेगा..जब यंग पीएम और प्रेसिंडेंट भी होगा।
Sanjeev:वाई वी पोलिंग टू पोलिटिशियन?
IBN7 एडिटर्स पैनल (सुमित): आपसा सवाल ठीक से समझ में नहीं आया.. अगर मैं ठीक से समझ रहा हूं तो वोट तो उन्हें ही करना होगा जो चुनाव लड़ रहे होंगे या फिर राजनीति में दिलचस्पी रखते होंगे।
Sachindra Dubey :महोदय यदि आपने छत्तीसगढ़ में चुनाव सर्वेक्षण किया हो तो क्या चुनाव में जातिवाद हावी रहेगा? यदि रहेगा तो और भी दूसरी बातों का महत्व कम हो जायगा क्या?
IBN7 एडिटर्स पैनल (सुमित): देखिये, ये हमारे देश की सबसे बड़ी विसंगति है कि आज भी चुनाव जातियों के नाम पर लड़े जाते हैं। छत्तीसगढ़ में भी कुछ हद तक ये बात देखी जा रही हैं लेकिन मेरे ख्याल से छत्तीसगढ़ में नक्सली समस्या और नक्सलियों के बॉयकाट की धमकी के बावजूद उस इलाके में कितने वोट पड़ेंगे..यही तय करेगा नयी सरकार की रुपरेखा।
Tpod:देश के चुनाव-आयोग के चुनाव सुधार संबंधी सुझावों को लागू क्यों नहीं किया जाता है? मसलन:- 1. मत- एक विकल्प यह भी होना चाहिए कि "इनमें से कोई भी नहीं" ऐसा होने से मतदाता को अगर कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं है तो वह इस विकल्प को चुन सकता है 2. पहली दृष्टि में या कम से कम निचली अदालत द्वारा दोषी करार दिए गये अपराधी को चुनाव के लिए अयोग्य घोषित करना। 3. कुल (25 प्रतिशत) सदस्यों को उनके दलों द्वारा प्राप्त मतों के अनुपात में मनोनीत करना ?
IBN7 एडिटर्स पैनल (सुमित):आपके सुझाव स्वागत योग्य हैं लेकिन उनको लागू करवाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। संविधान में संशोधन की ज़रूरत होगी।
Mohd.Tariq Ansari:मैं सिर्फ़ एक सवाल पूछना चाहता हूं कि जब किसी नेता या राज नेता का किसी कांड मे कुछ दोष निकलता है तो उसे सज़ा क्यों नहीं दी जाती है? चाहे वह छोटा नेता हो या किसी राज्य का मुख्यमंत्री?
IBN7 एडिटर्स पैनल (सुमित): ये बात ठीक है कि हमारी न्याययिक व्यवस्था धीमी है..दोष तय होने में काफी वक्त लग जाता है। लेकिन लोगों को सजायें भी मिलती हैं..कुछ बाहुबलि नेता हैं जो इस वक्त जेल की हवा खा रहे हैं। कानून से बड़ा वाकई में कोई नहीं..प्रभावशाली लोग कुछ तिकड़म लगाकर चीजों को बदलने की कोशिश या अपनी तरफ मोड़ने की कोशिश करते हैं लेकिन वो हमेशा कामयाब भी नहीं होते।
NAVEEN CHAUHAN:आप कह सकते हैं कि हमारा क़ीमती वोट सही नेता के हाथ में जायगा क्योंकि हम हर बार ये ही सोच कर वोट देते हैं कि ये नेता सही काम करेगा और आम जनता का ध्यान रखेगा लेकिन कुर्सी पर आने के बाद ये बदल जाते हैं क्यों? क्या हम को अब भी वोट देना चाहिए?
IBN7 एडिटर्स पैनल (सुमित): अगर हम यही सोच लें कि हमारा वोट पाकर नेता सत्ता मिलते ही बदल जाते हैं तो फिर एक ही आदमी हमेशा आपकी नुमांइदगी करता रहेगा..और उन नेताओं को बदलने का (य़ा फिर उनको आईना दिखाने का) मौका हम गंवा देंगे। भाई मेरे वोट की चोट से ही हम सबक सीखा सकते हैं... इसे मत गंवाओं।
Girish Tripathi:क्या कांग्रेस जिस तरह आतंकवाद के गंभीर मुद्दे को हल्के ढंग से लेकर सतही रूप से निपटाने का प्रयास कर रही है वो हमारे वोट की हक़दार है? कश्मीर मे दूसरा रूप, महाराष्ट्र मे दूसरा, बैगलोर, गुजरात व उड़ीसा मे उसका अलग रूप तथा अपने शासित राज्य, असम व आंध्रा के लिए अलग रूप| क्या यह एक वही पुरानी राष्ट्रीय पार्टी का रूप है,जिसका नेतृत्व गांधी, ज़वाहर लाल, इंदिरा गांधी ने किया था या हम ही एक विदेशी महिला के नेतृत्व के साथ सामंजस्य नहीं बैठा पा रहे हैं या वो ही हमारे सभ्यता व संस्कृति से अनजान होने के कारण कुछ स्वार्थी कांग्रेसियो के हाथ का खिलोना बन गयी हैं?
IBN7 एडिटर्स पैनल (सुमित):वोट आपका अपना अधिकार है..जिसको चाहे वो वोट करें कोई बंदिश या जबरदस्ती नहीं। कांग्रेस के बारे में जो आपकी राय है उससे बहुत से लोग सहमत भी नहीं है। लेकिन मेरा मानना है कि आप को जो उचित लगे..वही करें.. किसी के बहकावे में नहीं आयें।
Rajeev Kant Goswami, Damoh (MP) :मैं अपने यहां के किसी भी प्रात्याशी को वोट नहीं देना चाहता, क्योंकि सारे चोर हैं, क्या मैं इनमे से कोई नहीं जैसा विकल्प चुन सकता हूं, मैं चाहता हूं कि ये प्रात्याशी दुबारा भी खड़े ना हो सकें। मैं क्या करू.?
IBN7 एडिटर्स पैनल (सुमित): मेरे ख्याल से अभी हमारे देश में वो व्यवस्था नहीं है जहां मतपत्र में किसी को वोट देना जैसा विकल्प कि आप किसी को नहीं चुन रहे -- मौजूद हो। न ही हमारे यहां वो व्यवस्था है कि किसी को भी दोबारा चुनाव लड़ने से रोका जा सके। आपके तर्क को अमली जामा पहनाने के लिये संविधान में संशोधन की ज़रूरत पड़ेगी।..काफी मेहनत करनी पड़ेगी।
Arun:इस देश का क्या होगा, यहा पर टिकट भी बिकने लगे हैं, हमारा देश किस दिशा में जा रहा है?
IBN7 एडिटर्स पैनल (सुमित): बिल्कुल, बहुत ही गंभीर बात है..टिकट बेचे जाने वाली..लेकिन इस कड़वी सचाई से कोई मुंह भी नहीं मोड़ सकता। इस व्स्वस्था को बदलने की ज़रूरत है..आप जैसों को आगे आकर इसको खत्म करने में समाज की मदद करनी चाहिये ताकि देश सही और मुनासिब दिशा में ही आगे बढे और हमारी आने वाली पीढ़ी चैन से जी सके।
Arun: मध्य प्रदेश मै किसकी सरकार आएगी?
IBN7 एडिटर्स पैनल (सुमित): जनता की...। (भाई मेरे इस सवाल का जवाब अगर किसी के पास होता तो जनता -जनार्दन को कौन पूछता)
Haripal:साब जानते हैं कोई ईमानदर आदमी तो राजनीति मैं आता नही सब पैसे और सत्ता चाहते हैं फिर इन लोगों को चुनने का क्या फ़ायदा ये सब हमने अपने कोलेज चुनाव में भी देखा है?
IBN7 एडिटर्स पैनल (सुमित): देखिये मेरा तो मानना है कि राजनीति में आकर सत्ता की चाह रखने में कोई गलती नहीं..लेकिन अपनी उस चाह को पूरा करने के लिये गलत तरीके अपनाना..या हर कीमत पर सत्ता में बने रहले का लालच पाल लेना गलत है। हरेक व्यक्ति अपने चुने हुए क्षेत्र में अव्वल होना चाहता है.. लेकिन सत्ता मिलने के बाद जनता को भूल जाना...विकास के नाम पर भ्रष्टाचार करना सरासर गलत है और एसे लोगों का तो पर्दाफाश होना ही चाहिये। लेकिन ये भी मान लेना कि सभी गलत काम कर रहे हैं ये भी ठीक नहीं। आपके पास मत का अधिकार है और जो काम न कर रहा हो उसे बाहर फेंककर आप अपनी इच्छा पुरी कर सकते हैं।
Salman Rizvi:हिंदुस्तान की राजनीति और उसके राजनेता हमेशा से उन टेढ़े रास्तों की तरह से रहे हैं जो दिखाई तो देते हैं लेकिन उस पर चलना बहुत मुश्किल होता है| यही है असली चेहरा राजनीति का, चुनाव में भी यही हो रहा है। देश के कई राज्यो में हो रहे चुनावों से राजनीतिक पार्टियों के पास कोई मुद्दे नहीं हैं, तो धमाकों और आतंकवाद को मुद्दा बना लिया गया, वैसे हैं ये मुद्दे ज़रूरी देश के लिए, लेकिन कभी किसी धर्म को राजनीति के तहत पकड़ा गया तो आज हिंदुओ को भी आतंकवाद से जोड़ दिया गया, ये सारी चीज़ें चुनाव के मद्देनज़र हो रही हैं और इस आवाज़ के बीच मे विकास के मुद्दों को दबाकर जनता को भ्रम मे डाला जा रहा है जो देश के विकास में बाधक है, जिसको ध्यान में रखकर ही मतदान करना होगा?
IBN7 एडिटर्स पैनल (सुमित):भई सलमान जो आप कह रहे हैं..उसमें दम है। हम सभी को वोट करते वक्त इस तरह की हर छोटी-बडी बात का ध्यान रखना चाहिये।
पेश हैं चुनाव प्रभारी प्रभात शुंगलू से बुधवार को हुई चैट के प्रमुख अंश..
IRSHAD M:आख़िर वोट किसे दें-क्या हम वोट जिसे देंगे वह ईमानदर होगा-सब चोर चोरे मौसेर भाई हैं। यहा तो-आख़िर कब तक हम लोग यूं ही घुट-घुट कर मरते रहेंगे? IBN7 एडिटर्स पैनल (प्रभात शुंगलू): खुद क्यों नहीं राजनीति में उतरते हैं। आप जैसे अच्छे और सच्चे लोगों की ही तो देश को जरूरत है। जरा सोचिये।
NAVEEN CHAUHAN:क्या आप को लगता है की नई नेताओं का रुझान कस्बों मे बढ़ेगा क्योंकि कोई भी नेता हो वो कस्बों में बिल्कुल नहीं जाते लेकिन मीडिया के दर से कुछ टकराते हैं पर मीडिया गांव में जाती नहीं और नेता कुछ काम नहीं करते तो हमें क्या करना चाहिए जिससे वो गांव में आएं?
IBN7 एडिटर्स पैनल (प्रभात शुंगलू): नेता गांव से ही आते हैं। मगर वोट लेने के बाद पलट कर नहीं लौटते। ये सही है। मगर अगर जनता जागरूक है तो उस नेता को वहां घसीट कर लायेगी। ऐसे मुद्दे उठायेगी जिससे नेता को उनकी सेवा में हाजिर होना पड़े। सब जनता के हाथ में है। चाहे तो किसी को सर माथे पर बिठा दे चाहे चुनाव में ऐसी धूल चटाये कि उसे नानी याद आ जाये।
NAVEEN CHAUHAN:आख़िर हम वोट किसे दें ओर क्या देख कर दें?
IBN7 एडिटर्स पैनल (प्रभात शुंगलू): उम्मीदवार को परखिये। उसके काम को तौलिये। उसका रिपोर्ट कार्ड खुद बनाइये। जो आपके मापदंड पर खरा उतरे उसे ही वोट दीजिये। लेकिन अपने मत को प्रयोग जरूर कीजिये। उसे ज़ाया न होने दें।
Sachindra Dubey :महोदय, छत्तीसगढ़ में हो रहे चुनाव मे भाजपा-कांग्रेस के घोषणा पत्र में 1 रुपये में चावल ओर मुफ़्त मे बिजली...क्या उचित है राज्य की संपत्ति लूटाने के लिए है ऐसी घोषणा करना?
IBN7 एडिटर्स पैनल (प्रभात शुंगलू): उन गरीबो की कौन सुध लेगा जिन्हें दो जून की रोटी नसीब नहीं। सरकार अगर रोजगार नहीं मुहैया करा सकती तो कम से कम गरीबों को सस्ता अनाज तो दे ही सकती है। ये जरूर है कि ऐसे कदमों से गरीबी नहीं मिटती। जरूरत है सब हाथ को काम हो ताकि किसी को भी किसी के सामने हाथ न पसारना पड़े।
Md Mahtab Alam:क्या इन नेताओं के लिए कोई नियम लागू नहीं होता है, एक छोटा सा बिज़नेस के लिए हमे 100 तरह के प्रूफ़ दिखाने होते हैं पर जो सारा देश का बिज़नेस चलाते है उसके लिए बहूत आसान है एक नेता बनना?
IBN7 एडिटर्स पैनल (प्रभात शुंगलू):आजकल तो चुनाव आयोग काफी सख्त हो गया है। नेताओं को अपनी संपत्ती का पूरा ब्योरा देना होता है। हलफनामा झूठा हुया तो नामांकन रद्द भी हो सकता है। चुनाव में तय सीमा से ज्यादा पैसे खर्च करने पर भी उम्मीदवार का नामांकन रद्द हो सकता है। लेकिन इसको और सख्ती से लागू करने की गुंजाइश जरूर बचती है।
Tejpal Singh Hanspal:राजनीतिक पार्टियां जनसंख्या नियंत्रण के मामले पर ध्यान नहीं दे कर क्या अपनी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ रही हैं, ये देश के बारे में नहीं सोचगें तो कौन सोचेगा कौन करेगा?
IBN7 एडिटर्स पैनल (प्रभात शुंगलू): जनसंख्या तभी घटेगी जब ज्यादा से ज्यादा लोग शिक्षित होंगे, आम लोगों तक मूलभूत स्वास्थ सेवायें पहुंच पायेंगी। इन दोनो फ्रंट पर कोई भी सरकार सफल नहीं हो पायी है। यही कारण है कि जनसंख्या नियंत्रण पर कोई भी सरकारी स्कीम काममाब नही हो पाती।
Kapil Dev Saggi:आज महंगाई, आतंकवाद और भ्रष्टाचार सबसे बड़ा मुद्दा है, सताधारी पार्टी के लोग जनता के सामने जब वोट मांगने जाएंगे तो उन्हें अपनी करतूतों पर लज्जा नहीं आएगी? आख़िर हम इन्हें वोट क्यों दें?
IBN7 एडिटर्स पैनल (प्रभात शुंगलू): वोट देना आप का हक ही नहीं बल्कि कर्तव्य भी है। मत का प्रयोग जरूर करें। और इसी के जरिये उन नेताओं को सबक सिखायें जिन्होंने आपके हितों को आगे नहीं रखा और सत्ता पर काबिज होते ही आम इंसान से जुड़े मुद्दों से कन्नी काट ली। महंगाई हो या आतंकवाद या फिर भ्रष्टाचार इन सब के लिये वोट के दिन अपने अपने मत के अधिकार का प्रयोग करें और ऐसे नेताओं को मजा चखाये जिन्होंने अपना हित देखा आपका नजरअंदाज किया।
Harpal S. Atwal:देश के नेता अब सब अपने बिल में से बाहर आएंगे, आम जनता के बीच मे झुग्गी झोपड़ियों में जाएंगे , मैं इनसे यह पूछना चाहता हूं अब तक ये कहां थे, प्रश्न यह कि अपन साथ में अंगरक्षक लेकर चलते हैं अपनी हिफ़ाज़त के लिए ,जब ये अपनी जान बचाने के लिए पुलिस का इंतज़ाम करते हैं फिर आम जनता की हिफ़ाज़त कैसें करेंगे?
IBN7 एडिटर्स पैनल (प्रभात शुंगलू):सही कहा आपने। आम आदमी की सुरक्षा बेहद जरूरी है। law & order की दिक्कते लगभग सभी राज्यों में है। राजधानी दिल्ली भी इससे अछूती नहीं। यहां का आम इंसान खासकर महिलाएं सूरज ढलने के बाद घर में रहना ही सुरक्षित समझती है। सौम्या वारदात कौन भुला सकता है। नन्हीं सी जान पल भर में चली गयी। आरोपी फरार है। वोटर को चाहिये कि सुरक्षा के मुद्दे पर नेताओं को इन चुनावों में माकूल जवाब दें। वोट डालना हमारा कर्तव्य भी है।








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